छपरा पोस्टमार्टम हाउसअब नहीं बनेंगे लावारिश शव कुत्ता-कौआ का आहार

छपरा। अब जिले के लावारिस शवों को रखने के लिए पुलिस कर्मियों को इधर -उधर नहीं भटकना पड़ेगा। सदर अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस को नए वर्ष में अत्याधुनिक भवन में शिफ्ट कर दिया जाएगा, जिसमें एक साथ छह लावारिस शवों को रखने की सुविधा होगी।

यह भवन पूरी तरह वातानुकूलित है। एक करोड़ रुपए की लागत से बने इस भवन में ना केवल पोस्टमार्टम करने के लिए अलग व्यवस्था की गई है, बल्कि चिकित्सकों के बैठने के लिए अलग कमरे का प्रबंध है | शवों के विसरे को भी रखने की भी व्यवस्था की गई है । पोस्टमार्टम के सभी अभिलेख रखने के लिए अलग से अभिलेखागार बनाया गया है ।

शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए आने वाले पुलिसकर्मियों तथा परिजनों को भी बैठने के लिए अलग से प्रतीक्षालय की व्यवस्था है । पेयजल तथा रोशनी की अत्याधुनिक व्यवस्था की गई है । रात के समय आपात स्थिति में पोस्टमार्टम करने के लिए अब तक कोई व्यवस्था नहीं थी । नए भवन में पोस्टमार्टम हाउस शिफ्ट हो जाने से रात के समय आधुनिक लाइट में पोस्टमार्टम किया जा सकेगा ।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में लावारिस शवों को कम से कम 72 घंटे तक सुरक्षित रखना है, लेकिन इसके लिए थाना और अस्पताल में पहले से कोई प्रबंध नहीं है। इस वजह से जैसे तैसे लावारिस शवों को रखा जाता है । सबको अस्पताल में वैसे जगह पर भी रख दिया जाता है, जहां मरीजों का इलाज किया जाता है । जिंदा और मुर्दा को एक साथ रखे जाने के कारण कई बार सदर अस्पताल में हंगामा भी हो चुका है । इस व्यवस्था के हो जाने से आने वाले समय में इस तरह की स्थिति उत्पन्न नहीं होगी ।

शव को खुले स्थान पर रखे जाने के कारण आवारा जानवरों कुत्ता- सियार, कौआ आदि के द्वारा नोंच कर क्षत-विक्षत कर दिया जाता था । अब शवों को भी सुरक्षित पनाह मिल सकेगा । खुले जगहों पर रखने के कारण संक्रमण फैलने का खतरा भी रहता था । अब ऐसी स्थिति नहीं आयेगी ।

उपाधीक्षक डा शंभूनाथ सिंह ने बताया कि एक करोड़ रुपए की लागत से पोस्टमार्टम हाउस सह शव गृह का निर्माण कराया गया है । इस सुविधा के बहाल हो जाने से सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करने में सहूलियत होगी । साथ ही आपातकालीन स्थिति में रात के समय शव का पोस्टमार्टम करने में आसानी होगी ।