देवउठनी एकादशी से शुरू हो जाएंगे मांगलिक कार्य।

विनय कुमार मिश्र। गोरखपुर ब्यूरों। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवोत्थान यानी देवउठनी एकादशी का त्योहार मनाया जाएगा जो इस बार देवउठनी एकादशी 9 नवंबर को मनाई जाएंगी।देवउठनी एकादशी को हरिप्रबोधिनी एकादशी और देवोत्थान एकादशी के नाम से भी जाता हैं। शास्त्रों के मुताबिक भगवान विष्णु आषाढ़ शुक्ल एकादशी को चार महीने के लिए सो जाते हैं और एक ही बार कार्तिक शुक्ल एकादशी को जागते हैं। शास्त्रों के मुताबिक भगवान विष्णु ये चार महीनो के लिए सो जाते हैं और इस दौरान सभी मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं। जब देव (भगवान विष्णु) जागते हैं तभी कोई मांगलिक कार्य शुरू होते है। इस दिन भगवान विष्णु के उठने के कारण ही देव जागरण या उत्थान होने के कारण ही इसे देवोत्थान एकादशी कहते हैं। इस दिन उपवास रखने का विशेष महत्व है।

देवउठनी एकादशी के दिन व्रत रखने के नियम :
निर्जला या सिर्फ जूस और फल पर ही उपवास रखना चाहिए। अगर रोगी,वृद्ध,बालक  हैं तो वह कुछ घंटों का उपवास रखकर अपना व्रत खोल सकता है। इस दिन भगवान विष्णु या दूसरे किसी भी भगवान की उपासना कर सकते हैं। इस दौरान बिलकुल तामसिक और मसालेदार खाना न खाए, देवउठनी एकादशी के दिन “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः मंत्र का लगातार जाप करना चाहिए। आपका चन्द्रमा कमजोर है या किसी प्रकार की मानसिक समस्या है तो जल और फल खाकर एकादशी का उपवास करें। 

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