पत्रकार पिस्तौल नहीं कलम की मार रखते हैं

पत्रकार पिस्तौल नहीं कलम की मार रखते है,
इरादो में दम और सोच में गोली की रफ़्तार रखते है,

अरे मिट गए पत्रकार को मिटाने वाले क्योकि पत्रकार अपनी जवानी को आग में तपाने का जिगर रखते है,
पत्रकार आवाज नहीं बल्कि शेर की दहाड़ रखते है,

पत्रकार अगर मिलकर एक साथ खड़े हो जाए तो पहाड़ लगते है,
पत्रकार वो सुनहरे पन्ने है जिन को इतिहास भी अपने अंदर समाने की कोशिश करता है,

तभी तो दुनिया कहती है कि खतरनाक है पत्रकार की कलम का वार, जिसपर होता है वो उठता नहीं बल्कि इस दुनिया से ही उठ जाता है,
मौत को देखकर पत्रकार किसी के पीछे नहीं छुपते बल्कि सामने से शेर की तरह सीने पर वार करते है,

पत्रकार मरने से कभी नहीं डरते बल्कि निर्भय हो कर इन्साफ के लिए और अन्याय के खिलाफ हर पल लड़ने को तैयार रहते है,
पत्रकार अपने आप में गर्व करते है क्योकि वो समाज में फैले दुश्मनों को बेनकाब कर उन्हें काटने का जिगर रखते है,

अगर कोई ना दे पत्रकार को खुश रहने की दुआ तो भी कोई बात नहीं , वैसे भी पत्रकार खुद कभी रखते नहीं खुशियाँ, बल्कि दुसरों मे बाँट देते है।।

पत्रकार – शंकर दयाल शर्मा

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