चॉल, झुग्गी पुनर्वास केंद्र और खाली बिल्डिंग्स… इन जगहों से चल रही थीं संदेसरा ग्रुप की कंपनियां

राघव ओहरी, नई दिल्ली
बैंकों की ऑडिट टीमें जब स्टर्लिंग ग्रुपके मालिक संदेसरा परिवार की कंपनियों का पता ढूंढने निकलीं, तो एक चॉल, एक झुग्गी पुनर्वास केंद्र और एक खाली बिल्डिंग में पहुंचीं। संदेसरा परिवार की कई कंपनियों को कागज पर इन्हीं जगहों से चलाया जा रहा था। स्टर्लिंग ग्रुप ने बैंकों को अपनी कंपनियों का जो पता दिया था, उनमें से कई गलत निकलीं। कहा जा रहा है कि संदेसरा परिवार देश से फरार होकर अभी नाइजीरिया में छिपा है। उस पर बैंकों से धोखाधड़ी और 200 शेल कंपनियों के जरिए 8,100 करोड़ से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है।

बैंकों की फरेंसिक ऑडिट टीम की डिटेल के अलावा एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) संदेसरा परिवार की संपत्तियों की लिस्ट भी तैयार कर रहा है। स्टर्लिंग ग्रुप पर मालिकाना हक रखने वाले इस परिवार ने टैक्स हेवन में कई कंपनियां बनाई थीं। बैंकों से कर्ज लेकर उसे डायवर्ट करने के लिए सात कदम वाली प्रक्रिया का इस्तेमाल किया गया। संदेसरा परिवार की संदिग्ध कंपनियों में कथित तौर पर निवेश के लिए कई सरकारी एंप्लॉयीज की भूमिका की जांच भी की जा रही है। इससे अलावा सरकारी कर्मचारियों और अन्य को संदेसरा परिवार के कथित तौर पर रिश्वत देने के मामलों की भी जांच चल रही है।

ईडी ने अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में एक स्थानीय अदालत में संदेसरा परिवार के खिलाफ चार्जशीट फाइल की थी। इसके मुताबिक, ‘भारत और विदेश में परिवार के निवेश के कुछ पहलुओं की जांच अभी चल रही है। इनमें सरकारी कर्मचारियों के साथ दूसरे इन्वेस्टमेंट की पड़ताल भी की जा रही है। इस मामले में रिश्वतखोरी, संभावित भ्रष्टाचार से भी इनकार नहीं किया जा सकता।’ ईडी की जांच के दायरे में उन बैंकों के पूर्व निदेशक (डायरेक्टर) भी हैं, जिन्होंने संदेसरा परिवार को कर्ज दिया था। संदेसरा परिवार की कंपनियों की एसबीआई और आंध्रा बैंक की फरेंसिक ऑडिट टीम की रिपोर्ट की डिटेल भी ईडी ने सौंपी है। इसमें बताया गया है कि बैंकों की ऑडिट टीमें जब दिए गए पते पर पहुंचीं, तो वहां उन्हें एक रिहाइशी चॉल, झुग्गी पुनर्वास केंद्र और खाली इमारतें मिलीं।

चार्जशीट में एजेंसी ने बताया है कि बैंकों से जिस काम के लिए कर्ज लिया गया था, उसके लिए उसका इस्तेमाल नहीं हुआ। अनिवार्य डिसक्लोजर नहीं दिए गए। लोन फंड को निकाला गया और उनका भुगतान ऐसी पार्टियों को किया गया, जिनका वजूद ही नहीं था। 300 पेज की चार्जशीट में डायरेक्टर्स (संदेसरा परिवार के सदस्यों) को किए गए भुगतान का भी जिक्र है। यह पैसा उन्हें देने का कोई आधार नहीं था। एजेंसी ने संदेसरा परिवार की संपत्तियों पर मारे गए छापों में 10 लाख पेज के डॉक्युमेंट्स हासिल करने और 200 डिजिटल डिवाइस बरामद करने की जानकारी भी चार्जशीट में दी है।