राप्ती नदी में हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी।

गोरखपुर ब्यूरों। कार्तिक पूर्णिमा को कई जगह देव दीपावली के नाम से भी जाना जाता है। इसके अलावा कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरारी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार इसी दिन भगवान शिव ने तारकाक्ष, कमलाक्ष व विद्युन्माली के त्रिपुरों का नाश किया था। त्रिपुरों का नाश करने के कारण ही भगवान शिव का एक नाम त्रिपुरारी भी प्रसिद्ध है। इस दिन गंगा-स्नान व दीपदान का विशेष महत्व है। इसी पूर्णिमा को भगवान विष्णु का मत्स्यावतार हुआ था। कई तीर्थ स्थानों में इसे बड़े पैमाने पर मनाया जाता है।
पूरे देश मे शुक्रवार को कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर पवित्र नदियों पर स्नान करने वालों की लगी रही। गोरखपुर जिले के राजघाट स्थित राप्ती नदी में भी लोग बड़े ही हर्षो उल्लास से स्नान दान करके इस पर्व को धूमधाम से मनाय। हिंदू धर्म में कार्तिक पूर्णिमा का विशेष महत्व है। दरअसल इस दिन गंगा स्नान, दीपदान, दान,भगवान की पूजा आरती हवन आदि का बहुत महत्व है।इस दिन किसी भी धार्मिक कार्य का सौ गुना फल प्राप्त होता है।  इस दिन लोग गंगा नदी में स्नान करते हैं। दान और दीपदान भी करते है। गोरखपुर के राजघाट पर स्नानिर्थियों की भीड भोर से ही जमा होनी शुरू हो गई जो शाम तक लगी रही और लोग स्नान करके दान,उपदान करते रहे।मौसम ने भी लोगों का साथ दिया और सुबह से ही खूब चटक धूप खिली जिससे स्नानिर्थियों को काफी स्कून मिला।

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