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बदला जमाना, बदल गया इश्‍क: चिट्ठी वाली मोहब्बत से आज के डिजिटल रोमांस तक का सफर, देखिए कैसे बदला प्यार का तरीका! टेस्ट सीरीज से पहले ऑस्ट्रेलिया को लगा झटका, तेज गेंदबाज माइकल नेसर कई हफ्तों के लिए बाहर अहमदाबाद में 30 हजार लीटर नकली घी बरामद, लुधियाना, कानपुर और हैदराबाद में भी मिलावट के बड़े खेल का भंडाफोड़ दिन-दहाड़े धान के खेत में घुसे दो हाथी, गजमित्रों ने हाका लगाकर जंगल खदेड़ा; फसल रौंदे जाने से किसान सहमे पाकिस्तान ने वेस्टइंडीज को हराकर WTC पॉइंट्स टेबल में लगाई छलांग, टीम इंडिया किस नंबर पर? ​54 फीट लंबा कांवड़ लेकर 500 कांवरिया बाबाधाम रवाना, मुंगेर के कच्ची कांवरिया पथ पर दिखी भक्ति की अनोखी तस्वीर

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Love Across Generations : कहते हैं कि ‘इश्क वही रहता है, बस अंदाज बदल जाते हैं.’ लेकिन अगर हम पिछली कुछ दशकों पर नजर डालें, तो प्यार करने, उसे निभाने और जाहिर करने के तरीकों में इतना बड़ा बदलाव आया है कि इसे ‘क्रांति’ कहना गलत नहीं होगा. दादा-दादी के

बदला जमाना, बदल गया इश्‍क: चिट्ठी वाली मोहब्बत से आज के डिजिटल रोमांस तक का सफर, देखिए कैसे बदला प्यार का तरीका!

Love Across Generations : कहते हैं कि ‘इश्क वही रहता है, बस अंदाज बदल जाते हैं.’ लेकिन अगर हम पिछली कुछ दशकों पर नजर डालें, तो प्यार करने, उसे निभाने और जाहिर करने के तरीकों में इतना बड़ा बदलाव आया है कि इसे ‘क्रांति’ कहना गलत नहीं होगा. दादा-दादी के जमाने की वो ‘चिट्ठी वाली मोहब्बत’ आज मेटावर्स के ‘डिजिटल अवतार’ तक पहुँच चुकी है. आइए जानते हैं कि बेबी बूमर्स, मिलेनियल्स और जेन-जी (Gen Z) के प्यार करने के तरीके में कितना बड़ा अंतर आया है. 1950 और 60 का वो चिट्ठियों वाला दौर 1950 और 60 के दशक(साइलेंट जनरेशन और बेबी बूमर्स वाला जेनरेशन) में प्यार का मतलब था- इंतजार. उस दौर में फोन दुर्लभ थे और सोशल मीडिया का नामोनिशान नहीं था. प्रेम का इकलौता जरिया कागज के टुकड़े और

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