रेबिज एक गंभीर और घातक संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से संक्रमित जानवरों के काटने, खरोंचने या उनकी लार के संपर्क में आने से इंसानों में फैलती है। यह लीसावायरस नामक विषाणु के कारण होता है, जो सीधे शरीर के सेंट्रल नर्वस सिस्टम और मस्तिष्क पर हमला करता है। यदि समय पर इसका उपचार न किया जाए, तो लक्षण दिखाई देने के बाद यह बीमारी 100% घातक साबित होती है। हालांकि, सही समय पर देखभाल और टीकाकरण इससे बचा जा सकता है। लेकिन एक सवाल जो कई लोगों के मन में रहता है वो है कि यदि किसी को कुत्ता काटने से रेबीज हो जाए तो क्या पूरी तरह ठीक हो सकता है या नहीं। अगर आपके मन में भी ये सवाल है तो ये आर्टिकल आपके लिए है। डॉ. नेहा रस्तोगी, सीनियर कंसल्टेंट, संक्रामक रोग विभाग, फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम बता रही हैं कि क्या रेबीज पूरी तरह ठीक हो सकता है या नहीं।
क्या कहते हैं डॉक्टर
रेबीज को लेकर सबसे जरूरी बात यह समझना है कि बीमारी के लक्षण दिखाई देने के बाद यह लगभग हमेशा जानलेवा होती है। एक बार रेबीज हो जाने पर मृत्यु की आशंका लगभग तय मानी जाती है। इसलिए इसका इलाज तभी संभव है जब कुत्ते के काटने के बाद बचाव के कदम उठाए जाए। कुत्ते के काटने या खरोंच लगने पर घाव को तुरंत साबुन और पानी से करीब 15 मिनट तक अच्छी तरह धोना चाहिए। इसके बाद डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है, ताकि घाव की स्थिति और संपर्क के तरीके के आधार पर टीके तथा जरूरत पड़ने पर रेबीजरोधी इम्युनोग्लोबुलिन देने का निर्णय लिया जा सके।
यह कोई जरूरी नहीं है कि कुत्ता के काटने से ही रेबीज हो। संक्रमित जानवर की लार भी रेबीज का कारण बन सकती है। यह त्वचा या आंख, नाक और मुंह की अंदरूनी सतह से संपर्क भी संक्रमण फैला सकता है। कई लोग इसे घरेलू उपचार से इसे कंट्रोल करना चाहते हैं। इसके लिए लोग घाव पर हल्दी, तेल या कोई दूसरा घरेलू पदार्थ लगाते हैं लेकिन आपको बता दें कि इससे रेबीज नहीं रुकता।
कुत्ता को भले की वैक्सीन लगी है, तब भी डॉक्टर की सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए। रेबीज में लक्षण आने का इंतजार करना जानलेवा साबित हो सकता है। ऐसे में समय पर घाव धोना, वैक्सीन लगवाना और जरूरत के अनुसार इम्युनोग्लोबुलिन लेना ही जान बचा सकता है।









