सुपरस्टार यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ को लेकर दर्शकों के बीच भारी उत्सुकता है। टीवी शो ‘आप की अदालत’ में इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा के साथ एक व्यापक साक्षात्कार में यश ने अपनी आगामी फिल्म के बोल्ड गानों, डार्क दृश्यों और सोशल मीडिया आलोचनाओं पर खुलकर बात की। 26 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही इस फिल्म को लेकर सुपरस्टार ने स्पष्ट किया कि सिनेमा में दिखाई गई घटनाएं समाज का ही हिस्सा हैं। साक्षात्कार के दौरान उन्होंने ट्रोलर्स को करारा जवाब देने के साथ-साथ यह भी बताया कि यह फिल्म नई पीढ़ी यानी Gen-Z की भावनाओं, उनके विचारों और अभिव्यक्ति की आजादी को ध्यान में रखकर बनाई गई है।
‘कंडोम ऐड’ कमेंट पर करारा जवाब और सच्ची घटनाओं पर आधारित दृश्य
इंटरव्यू के दौरान जब रजत शर्मा ने फिल्म के गाने और दृश्यों पर इंटरनेट ट्रोल्स के बयानों का जिक्र किया, तो यश ने बड़े ही चुटीले अंदाज में जवाब दिया। रजत शर्मा ने पूछा, ‘एक दर्शक ने कमेंट किया कि ‘तबाही’ गाना है या कंडोम का विज्ञापन?’ यश ने आगे कहा, ‘कंडोम ऐड करनी है तो मैं पैसे लेकर करूंगा, अगर करनी है तो। मुफ्त में नहीं करूंगा।’ वहीं फिल्म के एक अन्य दृश्य में एक व्यक्ति को कब्र खोदते और शव से सोने की चेन छीनते हुए दिखाया गया है। इस दृश्य के बारे में यश ने कहा, ‘यह कहानी का हिस्सा है। एक बार फिल्म देखेंगे तो आपको पता चलेगा… ऐसे लोग होते हैं जो ऐसा करते हैं। यह एक वास्तविक घटना पर आधारित है। यह समाज में हुई एक घटना पर आधारित है।’
Gen-Z का समर्थन, अभिव्यक्ति की आजादी और सिनेमा का प्रभाव
जब उनसे पूछा गया कि हिंसा और अश्लीलता के फॉर्मूले के लिए जेन-Z को क्यों जिम्मेदार ठहराया जाता है तो यश ने कहा, ‘आई थिंक, अगली पीढ़ी हमेशा बेहतर होगी। जो पीढ़ी अतीत बन चुकी है, उसे लग सकता है कि नई पीढ़ी रास्ते से भटक गई है। यह जिंदगी भर की समस्या है। लेकिन हमें एक बात समझनी होगी। दुनिया नौजवानों की है। जब हमारा समय आया, हमने किया। जब आपका समय आएगा, आप अपनी अंतरात्मा की आवाज और अपनी अभिव्यक्ति की आजादी के अनुसार करेंगे। वल्गैरिटी गलत है। मैंने किस भी नहीं किया है। आप सभी ने इसे देखा है। हालांकि एक सीमा होती है और हम उसे जानते हैं। आपको चीजों को एस्थेटिक तरीके से शूट करना होता है। बाद में आपको विजुअली जो महसूस होता है, वही सिनेमा का इम्पैक्ट होता है। वह क्रिएटर की आवाज होती है। इस फिल्म को एक ऐसे इंटेंट के साथ बनाया गया है, जिसमें इमोशंस बहुत-बहुत महत्वपूर्ण हैं। जब आप फिल्म देखेंगे तो समझेंगे। यह जेन-Z के लिए है। इसमें वे बातचीत हैं, जो आप लोग कर रहे हैं। सीनियर लोगों से आपको जो समस्याएं हैं, सीनियर जेनरेशन से आप जो सवाल पूछते हैं, उसमें गलत क्या है? ऐसे तय नियम क्यों हैं? आपके जो भी विचार हैं, वे इस फिल्म के मूल पहलुओं में शामिल हैं।









