बीजेपी ने नितिन नबीन के नेतृत्व में नई राष्ट्रीय टीम की घोषणा कर दी है। इस टीम में कई पुराने चेहरों को भी शामिल किया गया है। बीजेपी की इस टीम में तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों को भी शामिल किया गया है। इन तीनों पूर्व मख्यमंत्रियों का काम बेहद खास होने वाला है। हम जिन तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों की बात कर रहे हैं। उनमें उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत, त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब और राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का नाम शामिल है।
नितिन नबीन की नई टीम
मुख्य रूप से बात करें तो नितीन नबीन की इस टीम में राम माधव, लोकसभा सांसद डी. पुरंदेश्वरी और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत समेत 13 उपाध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं। वहीं केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया है।
पार्टी की तरफ से जारी की गई लिस्ट के मुताबिक बीजेपी ने ने बी.एल. संतोष को राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) के पद पर बनाए रखा है और अपनी आठ राष्ट्रीय महामंत्रियों की टीम में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब को शामिल किया है। विनोद तावड़े और सुनील बंसल ही वे दो राष्ट्रीय महामंत्री हैं, जिन्हें बीजेपी ने अपनी नई टीम में बरकरार रखा है।
बीजेपी ने अलग-अलग राज्यों से 16 राष्ट्रीय मंत्रियों की अपनी टीम में कविता पाटीदार, के. सुरेंद्रन, संदीप पाठक और मनोज टिग्गा समेत कई नए चेहरों को शामिल किया है। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया, बैजयंत जय पांडा और रेखा वर्मा को उपाध्यक्ष के पद पर बरकरार रखा गया है।
पूर्व मुख्यमंत्री और उन्हें मिली जिम्मेदारियां
- वसुंधरा राजे (पूर्व मुख्यमंत्री, राजस्थान) – उपाध्यक्ष
- तीरथ सिंह रावत (पूर्व मुख्यमंत्री, उत्तराखंड) – उपाध्यक्ष
- बिप्लब देब (पूर्व मुख्यमंत्री, त्रिपुरा) – राष्ट्रीय महामंत्री
2027 के विधानसभा चुनावों पर BJP की नजर
दरअसल, संगठन में बड़े बदलाव का समय चुनावी नजरिए से बेहद अहम माना जा रहा है। साल 2027 में ही उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गुजरात, हिमाचल प्रदेश और गोवा जैसे कई बड़े राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसलिए, नई राष्ट्रीय टीम की जिम्मेदारी BJP के केंद्रीय संगठन और राज्य इकाइयों के बीच तालमेल को मजबूत करने की होगी, क्योंकि पार्टी अगले बड़े चुनावी दौर की ओर बढ़ रही है।
संगठन में ये बदलाव ऐसे समय में हो रहे हैं जब NEET विवाद को लेकर राजनीतिक घटनाक्रम और विरोध-प्रदर्शन हुए हैं, जिससे BJP के नेतृत्व वाली सरकार पर दबाव पड़ा था। इस माहौल में, नई नियुक्तियों को सिर्फ एक सामान्य आंतरिक प्रक्रिया से कहीं ज़्यादा अहम माना जा रहा है। पार्टी अपने राष्ट्रीय संगठन को आने वाली राजनीतिक चुनौतियों के लिए तैयार कर रही है।
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