कर्नाटक के बेंगलुरु के पास एक फार्महाउस में चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। कर्नाटक फूड सेफ्टी एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के ड्रग एन्फोर्समेंट विंग ने 18 अगस्त को बिडदी के कुरुबाकेरेनहल्ली स्थित एक फार्महाउस पर छापेमारी कर बिना लाइसेंस चल रहे फार्मास्यूटिकल री-पैकिंग और री-लेबलिंग ऑपरेशन का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई के दौरान करीब 4 करोड़ 91 लाख 49 हजार 575 रुपये मूल्य की दवाएं और अन्य सामग्री जब्त की गई है।
कैसे चलता था फर्जीवाड़ा?
FDA के मुताबिक, एक गुप्त सूचना के आधार पर टीम ने फार्महाउस नंबर 34 पर यह कार्रवाई की। जांच में सामने आया कि दूसरे राज्यों से कम कीमत की दवाएं मंगाई जाती थीं और उन्हें नए वायल में भरकर महंगी मल्टीनेशनल कंपनियों की दवाओं और इंपोर्टेड ब्रांड के नाम पर दोबारा लेबल किया जाता था। जांच में फाइजर के नाम का भी कथित तौर पर इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार, इस्तेमाल किए गए लेबल पर मौजूद स्कैनिंग कोड भी काम नहीं कर रहे थे।
भारी मात्रा में इंजेक्शन और सामग्री बरामद
इस कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में दवाएं और मशीनरी जब्त की गई है, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं-
- Cefiavigent 2.5 Injection के 5,640 वायल
- Hizlam Injectables के 1,531 वायल
- Xavitaz के 470 वायल
- EMBLAVEO के 264 वायल
- Zavicefta के 165 वायल
- इसके अलावा Tigynt IV, Tigvnet, Aztreo और Trezam जैसे इंजेक्शन
- 30 बॉक्स एक्सपायर्ड दवाएं, पैकेजिंग सामग्री, इंजेक्शन भरने की मशीनरी, और फर्जी लेबल और स्टांप
स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा
FDA ने इसे मरीजों के स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर जोखिम बताया है। विभाग के अनुसार, कम कीमत वाली या अन्य दवाओं को प्रीमियम ब्रांड के तौर पर पेश किए जाने से मरीजों की वास्तविकता, गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। इसके अलावा, एक्सपायर्ड दवाओं की बरामदगी ने जांच एजेंसियों की चिंता को और बढ़ा दिया है।
बिना लाइसेंस दवाओं के निर्माण, भंडारण, वितरण और नकली दवाओं से जुड़ी ये गतिविधियां, ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 का उल्लंघन हैं। विभाग ने बताया कि ऐसे मामलों में संबंधित धाराओं के तहत कम से कम 10 वर्ष से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। जब्त दवाओं के बैच नंबर और रिकॉर्ड को कर्नाटक FDA पोर्टल पर ब्लॉक किया जा रहा है, ताकि इनकी आगे बिक्री या सप्लाई रोकी जा सके। बरामद दवाओं के सैंपल लैब में भेजे गए हैं जहां उनकी केमिकल कंपोजिशन, स्टेरिलिटी और पोटेंसी की जांच की जाएगी।
आरोपियों की भूमिका और नेटवर्क की तलाश
यह फार्महाउस सिद्धया नाम के व्यक्ति का है, जिसने इसे प्रशांत नाम के शख्स को लीज पर दिया था। प्रशांत ने अपने रिश्तेदार तेजस को फार्महाउस के रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपी थी। जब रेड हुई, तब प्रभु देव गौड़ा नाम का आरोपी इन नकली दवाओं और पैकेजिंग के सामान के साथ मिला, जिसे गिरफ्तार कर लिया गया है। बाकी आरोपियों की तलाश की जा रही है।
ये भी पढ़ें-
गंदगी के बीच बन रहे थे नूडल्स, सेवई के पैकेट में भरे मिले, फैक्ट्री सील; VIDEO में देखें






