डॉक्टर शुभम वत्स ने डाइट से कम किया 35 किलो वजन, 110 से 75 पर पहुंचें, शेयर की अपनी वेट लॉस जर्नी

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मोटापा, आजकल देश दुनिया में तेजी से बढ़ता हुआ एक स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। बढ़ते वजन को कम करने के लिए लोग कई तरह के नुस्खे और तरीके आज़माते हैं लेकिन हर किसी के लिए वजन कम करना आसान नहीं होता। लेकिन वहीं, कुछ लोग अच्छी डाइट फॉलो कर अपना वजन कम कर लेते हैं। ऐसी ही एक कहानी है डॉक्टर शुभम वत्स की। अपनी जर्नी के बारे में बताते हुए शुभम वत्स ने कहा कि 33 साल की उम्र में उनका वजन 110 किलो हुआ करता था। उन्होंने यू ट्यूब वीडियो शेयर कर बताया कि अपना वजन कैसे कम किया?

ऐसे शुरू हुई वेट लॉस की कहानी 

बढ़ते वजन के साथ उन्हें प्री-डायबिटीज, लगातार थकान, सुबह उठते ही बहुत ज़्यादा थकावट, पेट का बहुत ज्यादा टाइट होना, एसिडिटी, ब्लोटिंग, शुगर क्रैश, दिनभर एनर्जी की कमी और खराब नींद जैसी परेशानियां होने लगी थीं। इसके बावजूद वह इन लक्षणों को लगातार नजरअंदाज कर रहे थे। डॉक्टर ने बताया कि उनकी जिंदगी में बदलाव तब आया, जब एक मरीज ने उनसे कहा, ”आपका खुद का वजन बढ़ा हुआ है, पहले आप अपना वजन कम कर लीजिए।” मरीज की इस बता को उन्होंने चुनौती के तौर पर लिया। इसके बाद डॉक्टर ने अपना वजन कम करने की ठानी और अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव करना शुरू किया। फिर, 110 किलो से उन्होंने अपना वजन 75 किलो पर कर लिया और इस तरह उन्होंने 35 किलो वजन कम किया।

डाइट में प्रोटीन है बेहद ज़रूरी

डॉक्टर ने कहा कि लोग ध्यान नहीं देते हैं लेकिन प्रोटीन की कमी भी वजन बढ़ने की मुख्य वजह बनती है। जब शरीर में प्रोटीन की कमी होती है तो बॉडी का मेटाबॉल्ज़िम स्लो डाउन होने लगता है। क्योंकि इसकी कमी से मसल्स मॉस मेंटेन नहीं हो पाता है। मसल्स ही वो टिशूज़ है जो ग्लूकोज को अब्सॉर्ब करता है और कैलोरी को बर्न करता है। जब लोग हर मील में बीस से तीस ग्राम प्रोटीन नहीं लेते हैं तो इस वजह से मेटाबॉल्ज़िम स्लो चलने लगता है। जब डाइट में रिफाइंड ऑयल, प्रोसेस्ड फूड्स, फ्राइड फूड्स बहुत ज़्यादा होता है और खानपान अनियमित हो जाता है तो पाचन प्रकिया को डिस्टर्ब करते हैं जिससे वजन बढ़ता है

वजन कम करने के लिए ऐसे की डाइट फॉलो:

  • इन्सुलिन फ्रेंडली मील: डॉक्टर कहते हैं कि उन्होंने वजन कम करने के लिए सबसे पहले अपनी डाइट में इन्सुलिन फ्रेंडली मील को शामिल किया क्योंकि वो प्री डाइबिटिक थे। वे कहते हैं कि वो जानते थे कि जब तक इन्सुलिन रेजिस्टेंट ब्रेक नहीं होगा तब तक उनका वजन कम नहीं हो पाएगा। इसलिए, उन्होंने सुबह के नाश्ते को हाई प्रोटीन और लो कार्ब्स रखा, जिससे शुगर और क्रेविंग कम हुई। 

  • प्रोसेस्ड रिफाइंड फ्लोर का इस्तेमाल किया बंद: डॉक्टर कहते हैं कि रिफाइंड फ्लोर यानी मैदा से बने भोजन का सेवन ब्लोटिंग, क्रेविंग और खाने के बाद आने वाली नींद की समस्या को बढ़ाते हैं। खासकर, उन लोगों में जिनका गट सेंसिटिव होता है। डॉक्टर शुभम वत्स ने बताया कि उन्होंने अपनी डाइट से रिफाइंड फ्लोर बेस्ड फूड्स को हटाकर उनकी जगह अंडे, पनीर, ग्रिल्ड चिकन, मखाना और चना जैसे विकल्प शामिल किए। उनके मुताबिक, इन बदलावों से उनका डाइजेशन बेहतर हुआ, पेट की परेशानी कम हुई और खाने के बाद सुस्ती भी कम महसूस होने लगी।

  • मील टाइमिंग की सही: डॉक्टर बताते हैं कि उन्होंने अपनी मील टाइमिंग को भी ठीक किया। क्योंकि, लंबे समय तक कुछ नहीं खाने के बाद, जब वह खाना खाते थे तो कई बार में जरूरत से ज़्यादा खा लेते थे। इससे कैलोरी बढ़ती है  और वजन कम नहीं होता है। इसलिए उन्होंने सुबह नाश्ते में लेमन वाटर और प्रोटीन-रिच मील का पैटर्न अपनाया। इस तरह समय पर और संतुलित तरीके से खाना खाने से क्रेविंग को कंट्रोल करने में मदद मिली।

  • इवनिंग कैलोरी को किया कंट्रोल: डॉक्टर कहते हैं कि शाम के बाद मेटाबॉल्ज़िम और डाइजेशन स्लो होने लगता है। ऐसे में हेवी फूड्स का सेवन वजन को बहुत तेजी से बढ़ाता है। वो रात के समय ज़्यादा हेवी खाना खाते थे जिस वजह से उनका वजन इतना ज़्यादा बढ़ गया था, इसलिए उन्होंने शाम के बाद हल्का फुल्का खाने का विकल्प चुना।

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।





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