सांसद के सरकारी बंगले से कुर्सियां, कूलर, गद्दे चोरी मामले कोर्ट ने सुनाया फैसला, आरोपी को किया बरी

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दिल्ली की एक अदालत ने वर्ष 2019 में लुटियंस क्षेत्र में एक सांसद को आवंटित सरकारी आवास से कुर्सियां, कूलर, गद्दे समेत अन्य सामान चोरी होने के मामले में आरोपी को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। न्यायिक मजिस्ट्रेट कौतुक भारद्वाज संसद भवन थाने में दर्ज मामले की सुनवाई कर रहे थे। मामले में बिहार के खगड़िया निवासी नीरज कुमार सिंह आरोपी था।

सांसद के सरकारी बंगले से सामान चोरी का आरोप

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 21 जुलाई 2019 की तड़के डॉ. राजेंद्र प्रसाद रोड स्थित बंगले में कथित तौर पर अनधिकृत रूप से प्रवेश कर कूलर, कंप्यूटर, मॉनिटर, पर्दे, रसोई के बर्तन, गद्दे और प्लास्टिक की कुर्सियों समेत घरेलू सामान चोरी किया गया था। बाद में एक कूलर, तीन कुर्सियां और एक गद्दा आरोपी के पास से बरामद होने का दावा किया गया।

चालक के तौर पर काम करता था आरोपी

हालांकि, अदालत ने 24 अगस्त के अपने फैसले में कहा कि मामले का मुख्य प्रत्यक्षदर्शी और शिकायतकर्ता अदालत में यह कह गया कि उसे घटना के बारे में कुछ भी याद नहीं है। दूसरे गवाह ने बताया कि नीरज कुमार सिंह तत्कालीन सांसद के यहां चालक के तौर पर काम करता था और घटना वाले दिन बंगले में शराब पी रहा था।

चोरी की घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं

अदालत ने कहा कि मुख्य गवाह को किसी अन्य व्यक्ति से जानकारी मिली थी कि सिंह ने चोरी की है। शिकायतकर्ता के अपने बयान से मुकर जाने के बाद दूसरे व्यक्ति की गवाही का कोई स्वतंत्र मूल्य नहीं रह जाता। अदालत ने यह भी कहा कि घटना का कोई अन्य प्रत्यक्षदर्शी सामने नहीं आया।

अदालत ने बरामद सामान को लेकर भी अभियोजन पक्ष की दलील को पर्याप्त नहीं माना। अदालत के मुताबिक, यह साबित करने के लिए कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था कि आरोपी के पास से मिले कूलर, कुर्सियां और गद्दा वही सामान थे, जो चोरी हुए थे। केवल आरोपी के खुलासा बयान के आधार पर उसे दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

बरामद सामान सरकारी संपत्ति था, यह भी साबित नहीं

अदालत ने यह भी पाया कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि बरामद सामान केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) की सरकारी संपत्ति था। विभाग के किसी कर्मचारी को बरामद कूलर या कुर्सियों की तस्वीरें भी नहीं दिखाई गईं, जिससे उनकी पहचान सरकारी संपत्ति के रूप में हो सके।

इन परिस्थितियों में अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि आरोपी ने चोरी के उद्देश्य से घर में छिपकर प्रवेश किया या सेंध लगाई थी। आरोप संदेह से परे साबित न होने के कारण अदालत ने नीरज कुमार सिंह को बरी कर दिया।

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