नीट छात्रा केस मामले में अब हो सकेगा बड़ा खुलासा, दिल्ली एम्स खंगालेगी पोस्टमार्टम रिपोर्ट

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नीट छात्रा केस मामले में अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट पटना एम्स नहीं बल्कि दिल्ली एम्स खंगालेगी. नई पोस्टमार्टम रिपोर्ट के लिए विसरा, वेजाइनल स्वाब, टीशू, कपड़ा, बॉडी की वीडियोग्राफी, फोटो, खाने-पीने, इलाज के दौरान डॉक्टरों की जांच रिपोर्ट और पीएमसीएच की ओर से दी गई पोस्टमार्टम रिपोर्ट को दिल्ली एम्स भेज दिया गया है.

इससे पहले रविवार को एसआईटी की टीम पहले सहज सर्जरी नर्सिंग होम, इसके बाद प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल और जहानाबाद भी पहुंची थी. सभी जगहों पर पूछताछ के बाद तीन लोगों को कस्टडी में लिया गया है. ऐसे में माना जा रहा है कि टीम को लीड मिल चुकी है. पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह से एक्शन मोड में है, जिसके बाद अब जल्द ही मामले में बड़ा खुलासा होने की संभावना जताई जा रही है.

 

पटना के चित्रगुप्त नगर थाने के एक हॉस्टल में रहकर छात्रा नीट की तैयारी कर रही थी. वह 5 जनवरी को घर से हॉस्टल लौटी. 6 जनवरी को छात्रा कमरे से बाहर नहीं निकली. इसके बाद वह कमरे में बेहोशी की हालत में मिली, जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया. पहले सहज सर्जरी नर्सिंग होम, इसके बाद प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल और इसके बाद मेदांता हॉस्पिटल शिफ्ट किया गया. इसी बीच इलाज के दौरान 11 जनवरी को छात्रा की मौत हो गई.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर उठाए गए ये सवाल

पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद कई सवाल उठाए गए, जिसके बाद अब दिल्ली एम्स को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई. ये रहे रिपोर्ट पर उठते सवाल-

  1. दो दिन बाद यूरिन का क्यों लिया गया सैंपल ?
  2. महज कुछ ही घंटे के अंदर यूरिन की जांच रिपोर्ट कैसे आई?
  3. जांच रिपोर्ट में जिस नींद की गोली का जिक्र है, वह बैन है. इसकी एक गोली भी खतरनाक है, फिर कैसे मिली?
  4. मेडिको एक्ट के तहत यूरिन सैंपल को 15 दिनों तक रखना होता है प्रिसर्व, सैम्पल कहां है?
  5. क्या सोंची-समझी रणनीति के तहत तैयार की गई जांच रिपोर्ट ?

रविवार को जिस हॉस्टल में छात्रा रहती थी, उसके बाहर जमकर हंगामा हुआ. दरअसल, उस हॉस्टल में रह रही दूसरी छात्राएं अपने नोट्स, किताबें और जरूरी सामान लेने पहुंचीं थीं. उनका आरोप था कि उन्हें हॉस्टल के अंदर जाने से रोका गया और सामान देने से भी इनकार किया गया. छात्राओं का कहना है कि 2 फरवरी से इंटरमीडिएट की परीक्षा शुरू हो रही है, इसके बाद नीट होना है. ऐसे में उनका सामान हॉस्टल के कमरों में बंद है.

लेकिन हंगामे के बाद देर शाम पुलिस का आदेश मिलने पर हॉस्टल को खोला गया. छात्राओं ने अपने-अपने कमरे से सारे सामान लिए और परिजनों के साथ चली गईं. इस दौरान एक छात्रा ने बताया था कि वह पिछले 6 महीने से हॉस्टल में रह रही थी और घटना वाले दिन भी मौजूद थी, लेकिन उसने कोई सस्पिशियस एक्टिविटी नहीं देखी. लेकिन इस घटना के बाद उसने हॉस्टल छोड़ने का फैसला कर लिया है.

 

Kaushal kumar
Author: Kaushal kumar

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