नई दिल्ली: पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ किए गए हमलों के नतीजों का पता लगाने के लिए कमर्शियल सैटेलाइट तस्वीरों का सहारा लेने की कोशिश की थी। इसमें उसने चीनी सैटेलाइट कंपनियों से तस्वीरें हासिल करने की कोशिश भी की, लेकिन वह अपने हमलों से किसी लक्ष्य को नुकसान पहुंचने का सबूत हासिल नहीं कर सका। जनरल चौहान ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन में आयोजित ‘विमर्श’ कार्यक्रम में ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद की स्थिति पर बात करते हुए यह जानकारी दी।
‘कोई भी हासिल कर सकता है ऐसी तस्वीरें’
पूर्व CDS ने बताया कि आज कमर्शियल सैटेलाइट तस्वीरें किसी एक देश तक सीमित नहीं हैं। अमेरिका और चीन की कई कंपनियां ऐसी तस्वीरें उपलब्ध कराती हैं। उन्होंने कहा कि इन सेवाओं का इस्तेमाल कोई भी कर सकता है और ऐसा नहीं है कि केवल पाकिस्तानी ही चीनी कंपनियों से तस्वीरें खरीद सकते हैं। उन्होंने कहा,
‘चीनी कमर्शियल सैटेलाइट की तस्वीरें किसी के लिए भी उपलब्ध हैं। कोई भी उन्हें खरीद सकता है। ऐसा नहीं है कि केवल पाकिस्तानी ही इन्हें खरीद सकते हैं। अमेरिका की कई कंपनियां भी कमर्शियल सैटेलाइट इमेजरी उपलब्ध कराती हैं। इसी तरह चीन में भी अब कई कंपनियां इस क्षेत्र में काम कर रही हैं और व्यावसायिक आधार पर तस्वीरें देती हैं।’
‘कमर्शियल सैटेलाइट तस्वीरें तुरंत नहीं मिलतीं’
पूर्व CDS ने यह भी समझाया कि कमर्शियल सैटेलाइट से तस्वीरें हासिल करना हमेशा तत्काल संभव नहीं होता। इसके लिए पहले कंपनी के साथ अनुबंध करना पड़ता है, भुगतान करना होता है और कई मामलों में तस्वीरें मिलने के लिए इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग कंपनियों के भुगतान और सर्विस मॉडल अलग हो सकते हैं यानी सिर्फ पैसे देकर तुरंत किसी इलाके की तस्वीर हासिल कर लेना हमेशा संभव नहीं होता। जनरल चौहान ने कहा,
‘हमेशा एक वेटिंग टाइम होता है। यह आपके अनुबंध पर निर्भर करता है। ऐसा नहीं है कि चीजें तुरंत उपलब्ध हो जाती हैं। आपने अनुबंध किया होता है और भुगतान के अलग-अलग मॉडल के तहत आपको तय तरीके से तस्वीरें दी जाती हैं।’
आखिर पाकिस्तान क्या पता लगाना चाहता था?
जनरल चौहान ने कहा कि पाकिस्तान को अपने हमलों के नतीजों की सही जानकारी नहीं थी। उनके मुताबिक, पाकिस्तान यह पता लगाने की कोशिश कर रहा था कि उसके हमलों से वास्तव में किसी लक्ष्य को नुकसान पहुंचा या नहीं। उन्होंने कहा,
‘मुझे लगता है कि पाकिस्तान को अपने हमलों के नतीजों को लेकर ब्लाइंड थे, उन्हें पता ही नहीं था कि उनके हमलों के क्या नतीजे निकले हैं।’
जनरल चौहान ने आगे बताया कि पाकिस्तान ने 10 मई के बाद भी करीब 12 मई तक तस्वीरें हासिल करने की पूरी कोशिश की, ताकि उसे अपने हमलों से किसी लक्ष्य को नुकसान पहुंचने का सबूत मिल सके।
चीनी सैटेलाइट से भी सबूत नहीं मिला
पूर्व CDS ने दावा किया कि जब पाकिस्तान को अपेक्षित सबूत नहीं मिले तो उसने दूसरी चीनी सैटेलाइट सेवाओं से भी तस्वीरें हासिल करने की कोशिश की। लेकिन इसके बावजूद वह यह साबित नहीं कर सका कि उसके हमलों ने किसी लक्ष्य को निशाना बनाया था। उन्होंने कहा,
‘दुर्भाग्य से, जब उन्हें तस्वीरें नहीं मिलीं तो उन्होंने दूसरी चीनी सैटेलाइट सेवाओं को भी आजमाया। लेकिन चूंकि वे किसी लक्ष्य को हिट नहीं कर पाए थे, इसलिए उन्हें कोई सबूत नहीं मिला।’
पाकिस्तान में उठने लगे तरह-तरह के सवाल
जनरल चौहान के मुताबिक, जब पाकिस्तान को हमलों के नतीजों का सबूत नहीं मिला तो वहां इस बात को लेकर शक पैदा हुआ कि शायद उससे कोई जानकारी छिपाई गई है। उन्होंने कहा,
‘इससे उनके मन में यह संदेह पैदा हुआ कि शायद कुछ लोगों ने यह तथ्य उनसे छिपाया है। उन्हें लगा कि शायद भारत के दबाव के कारण उनसे जानकारी छिपाई गई। इसके बाद वहां इस तरह की हर तरह की थ्योरी चलने लगी।’
ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान को लगी थी बड़ी चोट
बता दें कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारत ने 7 मई 2025 को शुरू किया था। यह कार्रवाई 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद की गई थी। उस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। भारत ने कहा था कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में मौजूद आतंकी ढांचे को निशाना बनाया गया। भारत के इस हमले में दर्जनों आतंकी मारे गए थे और पाकिस्तानी सेना के कई अहम ढांचे तबाह हो गए थे। बाद में पाकिस्तान ने खुद ही कार्रवाई रोकने की गुहार लगाई थी जिसके बाद सीजफायर हो गया था। (ANI से रिपोर्ट के साथ)
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