गुजरात के वडोदरा के अकोटा इलाके में करीब 15 वर्षों से बिना किसी मान्य मेडिकल डिग्री के क्लीनिक चलाकर मरीजों का इलाज करने के आरोप में एक व्यक्ति को LCB जोन-2 की टीम ने गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान 45 वर्षीय बिस्वजीत प्रफुल्ला हालदार के रूप में हुई है। वह मूल रूप से पश्चिम बंगाल का रहने वाला है और पुलिस के अनुसार केवल 10वीं कक्षा तक पढ़ा है।
क्लीनिक से 1.19 लाख का सामान बरामद
पुलिस के मुताबिक, पेट्रोलिंग के दौरान सूचना मिली थी कि अकोटा गांव गार्डन के सामने स्थित प्रोमिला क्लीनिक में बी. हालदार बिना वैध मेडिकल डिग्री के एलोपैथिक दवाइयों से मरीजों का इलाज कर रहा है। सूचना की पुष्टि के बाद LCB जोन-2 की टीम ने क्लीनिक पर कार्रवाई कर आरोपी को पकड़ लिया।
तलाशी के दौरान क्लीनिक से विभिन्न प्रकार के सिरप, इंजेक्शन, दवाइयां, ट्यूब, ORS और कैप्सूल समेत करीब 1,19,849 रुपये का सामान बरामद किया गया।
मामले में अकोटा पुलिस स्टेशन में BNS की धारा 125 और गुजरात मेडिकल प्रैक्टिशनर एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले की जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपी कितने समय से बिना वैध योग्यता के मरीजों का इलाज कर रहा था और उसके पास चिकित्सा संबंधी दवाइयां किस माध्यम से पहुंचती थीं। बीते दिन उत्तर प्रदेश में 41 फर्जी डॉक्टर पकड़े गए।
फर्जी डिग्री से नौकरी की कोशिश
एक अन्य खबर में, राजस्थान के सांचौर जिले में नौकरी हासिल करने के लिए फर्जीवाड़े का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। भारमल राम ने दिसंबर 2022 में राजस्थान सरकार की फिजिकल ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टर यानी PTI परीक्षा के लिए आवेदन किया था। आवेदन के साथ उसने चूरू की OPJS University से मिली B.P.Ed. की डिग्री लगाई, लेकिन आरोप है कि यह डिग्री फर्जी थी। परीक्षा पास करने के बाद जब मूल दस्तावेजों का सत्यापन हुआ तो उसने OPJS University की बजाय मध्य प्रदेश के सीहोर स्थित सत्य साईं यूनिवर्सिटी की B.P.Ed. डिग्री पेश कर दी। आवेदन और सत्यापन में अलग-अलग यूनिवर्सिटी की डिग्री देखकर प्रशासन को शक हुआ और जांच शुरू हुई। जांच में यह भी सामने आया कि कथित तौर पर PTI परीक्षा में भारमल राम की जगह एक डमी कैंडिडेट बैठा था।
मामले की जांच के दौरान यूनिवर्सिटी से जुड़े रिकॉर्ड और कंप्यूटर डेटा जब्त किए गए। फॉरेंसिक ऑडिट में कथित तौर पर भारमल राम के नाम से दो अलग-अलग अकाउंट मिलने और बैकडेट में डिग्री तैयार करने के लिए रजिस्टर में कुछ पन्ने खाली रखे जाने की बात सामने आई। आरोप है कि इन खाली पन्नों पर बाद में बैकडेट में डिग्री लेने वालों के नाम दर्ज किए जाते थे। फर्जी डिग्री का लेन-देन भी कथित तौर पर कैश में किया जाता था, ताकि ऑनलाइन पेमेंट का डिजिटल रिकॉर्ड न बने और डिग्री की तारीख का पता न चल सके। इस पूरे मामले ने भर्ती प्रक्रिया में फर्जी डिग्री, डमी कैंडिडेट और बैकडेट दस्तावेजों के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, सामने आए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।
(रिपोर्ट- सत्यम नेवासकर)
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