बेंगलुरु, आईटी राजधानी, जहां छंटनी और एआई की अनिश्चितता रोज की बात है। वहीं लग्जरी फ्लैट्स की बिक्री भी तेज है। हाल ही में रेडिट पर एक शख्स की पोस्ट ने इस विरोधाभास को उजागर कर दिया। यूजर ‘@Cold_Delaybangalore’ ने पूछा कि, “मोस्ट न्यू 3BHK प्रोजेक्ट्स ₹2.5 करोड़ से शुरू होकर ₹5-6 करोड़ तक जा रहे हैं। इतनी बड़ी EMI (₹1-1.5 लाख या ज्यादा) के साथ लोग 20-25 साल का लोन कैसे ले रहे हैं? छंटनी, जॉब इनसिक्योरिटी के बीच क्या इतने लोग ₹3-5 लाख महीना कमा रहे हैं?”
रेडिट पर सवाल हुआ वायरल
शख्स ने अपनी पोस्ट में यह सवाल भी उठाया कि क्या खरीदार इतनी बड़ी दीर्घकालिक वित्तीय प्रतिबद्धताएं करने से पहले संभावित जोखिमों को ध्यान में रख रहे हैं, खासकर ऐसे समय में जब पेशेवर लोग छंटनी और नौकरियों पर AI के प्रभाव को लेकर चिंतित हैं। शख्स ने लिखा कि, ‘छंटनी, AI से संबंधित अनिश्चितता और नौकरी की असुरक्षा के माहौल में, खरीदार 20-25 वर्षों के लिए इतनी बड़ी ईएमआई चुकाने के लिए कैसे सहज महसूस कर रहे हैं? क्या इसका मुख्य कारण दोहरी आय, पारिवारिक संपत्ति या पुरानी संपत्ति की बिक्री है, या लोग बस एक बड़ा वित्तीय जोखिम उठा रहे हैं?’ यह पोस्ट “बेंगलुरु में लोग 2.5 करोड़ से 6 करोड़ रुपये के फ्लैट कैसे खरीद पा रहे हैं?” शीर्षक से शेयर की गई है।

Image Source : REDDIT/@COLD_DELAYBANGALOREरेडिट पर की गई पोस्ट।
यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं
इस पोस्ट पर कई प्रतिक्रियाएं आईं, जिनमें यूजर्स ने इस बात पर सहमति जताई कि बेंगलुरु में फ्लैट की कीमतें पेशेवरों के लिए वहन करना दिन-प्रतिदिन मुश्किल होता जा रहा है। एक यूजर ने लिखा कि, ‘ये कीमतें वेतन से पूरी तरह से अलग-थलग लगती हैं।’
एक अन्य व्यक्ति ने सुझाव दिया कि कुछ खरीदार अपनी वित्तीय स्थिति को आरामदायक सीमा से परे खींच रहे होंगे और लिखा, ‘कई खरीदार शायद बहुत बड़ा वित्तीय जोखिम उठा रहे हैं।’
एक तीसरे यूजर ने शहर के प्रॉपर्टी मार्केट की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा, ‘बेंगलुरु का हाउसिंग मार्केट अब बहुत महंगा लगता है।’
एक अन्य रेडिट यूजर ने सहमति जताते हुए लिखा, ‘हां, आप सही हैं।’
गौरतलब है कि, इससे पहले बेंगलुरु में रह रही महिला का वीडियो वायरल हुआ था। इसमें उसने पूछा था कि, क्या मैं ₹60,000 महीना किराया ज्यादा दे रही हूं?
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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