CJP प्रोटेस्ट में शामिल लोगों को फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी से नहीं पकड़ रही पुलिस, दिल्ली पुलिस ने वायरल मैसेज को बताया झूठा

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दिल्ली पुलिस ने फेशियल रिकग्निशन सिस्टम के जरिए सीजेपी प्रोटेस्ट में शामिल लोगों को पकड़ने के झूठे दावे का खंडन किया है। दिल्ली पुलिस की तरफ से साफ किया गया है कि चेहरा पहचानकर किसी भी व्यक्ति को नहीं पकड़ा जा रहा है और उनके खिलाफ कोई अनैतिक कार्रवाई नहीं की जा रही है। सोशल मीडिया पर एक मैसेज वायरल हो रहा है, जिसे भेजने वाले व्यक्ति ने खुद को दिल्ली पुलिस के रूप में प्रस्तुत किया है।

वायरल मैसेज में कहा गया है कि संबंधित व्यक्ति कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में मौजूद था, जबकि उस दौरान सेंट्रल दिल्ली में जाने की मनाही थी। ऐसे में उससे जवाब मांगा गया है। इसके साथ ही दिल्ली छोड़कर न जाने के लिए कहा गया है। दिल्ली पुलिस ने इसे पूरी तरह से गलत बताया है।

वायरल मैसेज में क्या?

वायरल मैसेज में लिखा गया है, “सर, सीसीटीवी फुटेज और फेशियल रिकग्निशन सिस्टम रिकॉर्ड की जांच के दौरान, आपकी पहचान जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस के आस-पास के प्रतिबंधित इलाके में उस समय हुई जब रोक के आदेश लागू थे। आपको 48 घंटे के अंदर अपनी लिखकर सफाई देनी है, जिसमें उस इलाके में आपकी मौजूदगी का मकसद और हालात बताएं। क्योंकि अभी जांच जारी है, इसलिए आपको अगली सूचना तक बिना पहले से इजाजत के दिल्ली नेशनल कैपिटल टेरिटरी न छोड़ने का निर्देश दिया जाता है। आपको आने वाले हफ्ते में पूछताछ के लिए इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर के सामने पेश होने के लिए तैयार रहना चाहिए। आपके डिवाइस हमारे सर्विलांस पर हैं। हमारे पास 24 घंटे आपकी लोकेशन का एक्सेस है। इसलिए कृपया हमारे साथ बने रहें। इस नोटिस का पालन न करने पर कानून के लागू नियमों के तहत कानूनी कार्रवाई हो सकती है।”

वायरल मैसेज को असली जैसा दिखाने के लिए अंत में लिखा गया है कि ज्यादा अपडेट के लिए www.delhipolice.gov.in पर जाएं और अंत में “सादर, दिल्ली पुलिस सत्यमेव जयते” भी लिखा गया है।

झूठा और गुमराह करने वाला है मैसेज

दिल्ली पुलिस ने साफ किया है कि सीजेपी प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। मैसेज में किया गया दावा पूरी तरह से गलत है। दिल्ली पुलिस ने फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके किसी भी व्यक्ति को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में नहीं लिया है या किसी की आजादी पर रोक नहीं लगाई है। वायरल नोटिस नकली है और इसमें कोई सच्चाई नहीं है। लोगों को सलाह दी जाती है कि वे ऐसी गलत जानकारी पर विश्वास न करें या उसे शेयर न करें और सिर्फ दिल्ली पुलिस के ऑफिशियल अपडेट पर ही भरोसा करें।

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