कोटा। कभी-कभी अपनों का दर्द झकझोर देता है। ऐसे में जागरूकता और सामाजिक बदलाव जीवन का लक्ष्य बन जाते हैं। ऐसी ही कहानी है शिक्षा की काशी कोटा के नजदीक कैथून कस्बे के गांव गोदल्याहेडी के छात्र सागर रेगर की। एलन शिक्षा संबल से पढ़कर सागर ने नीट में 564 अंक के साथ 98.6296 परसेन्टाइल हासिल कर ऑल इंडिया रैंक 27157 एवं एससी कैटेगिरी में एआईआर 684 प्राप्त की है। सागर ने कैथून के सरकारी स्कूल से पढ़ाई की और 10वीं में 76 प्रतिशत और 12वीं में 92 प्रतिशत अंक प्राप्त किए।
सागर का कहना है कि परिवार बड़ा है, अधिकांश सदस्य निरक्षर हैं। शिक्षा और जागरूकता के अभाव में परिवार के कई लोग नशे की गिरफ्त में हैं। बुआ की बेटी को गुटखे के सेवन के कारण कैंसर हो गया, जिसने मुझे झकझोर दिया। शिक्षा ही समाज को बदलने का सबसे प्रभावी माध्यम है। डॉक्टर बनने के बाद परिवार और समाज की नई पीढ़ी को शिक्षा के महत्व और नशामुक्त जीवन के प्रति जागरूक करने का भी प्रयास करूंगा।
कोटा में रहकर की पढ़ाई
सागर ने बताया कि यह सफलता संभव नहीं हो पाती, यदि एलन शिक्षा संबल का सपोर्ट नहीं मिलता। यहां कोटा में पढ़ाई के साथ-साथ रहना और खाना भी निशुल्क मिला। इससे मैं पूरी लगन से सालभर पढ़ाई कर सका और अपना व परिवार का सपना साकार कर सका। पिता ने असमर्थता जता दी थी क्योंकि इतने पैसे नहीं थे। इसके बाद राजकीय विद्यालय कैथून के प्रिंसिपल सर ने मुझे गाइड किया और शिक्षा संबल के बारे में बताया। मुझे परीक्षा देने के लिए प्रेरित किया। मेरा चयन हुआ और वहीं से जीवन बदला। योजना के तहत एलन में नीट की निशुल्क कोचिंग मिली और एलएन माहेश्वरी परमार्थ न्यास की ओर से निशुल्क आवास और भोजन की व्यवस्था उपलब्ध कराई गई।
इस संबंध में एलएन माहेश्वरी परमार्थ न्यास के ट्रस्टी व एलन के फाउंडर नवीन माहेश्वरी ने कहा कि सरकारी विद्यालयों के हिन्दी माध्यम की प्रतिभाओं को आगे लाने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम शुरू किया गया। जब ये बच्चे सफल होते हैं तो यह सफलता सिर्फ एक परिवार तक सीमित नहीं रहती। ये पूरे समाज में बदलाव लाते हैं, दूसरे बच्चों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।
आर्थिक अभाव के बीच मिला शिक्षा का सहारा
घर-घर कबाड़ एकत्रित कर परिवार का पालन-पोषण करने वाले सागर के पिता मुरली रेगर ने बताया कि इसका शुरू से ही डाॅक्टर बनने का सपना था, लेकिन हमारे पास खर्च करने के लिए पैसे नहीं थे। सरकारी स्कूल में पढ़ाया, लेकिन सागर की लगन कभी कम नहीं हुई, तो एलन शिक्षा संबल का सहयोग मिला जो बहुत लाभदायक साबित हुआ। सागर की मां गृहिणी हैं और जब पिता कबाड़ लेकर आते है, उसमें से स्क्रेप अलग करने में पिता की मदद करती है। मात्र दो कमरों का घर है। घर में सागर के अलावा दो छोटी बहनें हैं। बड़ी बहन मानसी 12वीं कक्षा में बायोलॉजी सब्जेक्ट से पढ़ाई कर रही हैं, जबकि सबसे छोटी बहन इशिका 10वीं कक्षा की छात्रा है।
बीएससी करनी पड़ती
सागर का कहना है कि शिक्षा संबल ने मेरे जीवन की दिशा बदल दी। यदि इस योजना का लाभ नहीं मिलता तो बीएससी में एडमिशन लेना पड़ता। मेरे पिता निरक्षर हैं और मां आठवीं कक्षा तक शिक्षित हैं, लेकिन दोनों को शिक्षा का महत्व पता है इसलिए उन्होनें हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
रिपोर्ट- दिनेश कश्यप
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