बॉलीवुड के ‘हीरो नंबर 1’ यानी गोविंदा और उनकी पत्नी सुनीता आहूजा(Govinda Sunita Ahuja marriage) की जोड़ी को हमेशा इंडस्ट्री की सबसे खुशमिजाज और बेबाक जोड़ी माना गया है. लेकिन हाल ही में सुनीता का एक ऐसा बयान सामने आया है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है. शादी के पूरे 40 साल बाद सुनीता आहूजा ने अपनी शादीशुदा जिंदगी का एक ऐसा कड़वा सच बयां किया है, जिसे सुनकर हर कोई दंग है. आखिर 40 साल साथ बिताने के बाद सुनीता के दिल में ऐसा कौन सा गिल्ट (पछतावा) है जो अब बाहर आया है? क्यों उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि ‘मुझे गोविंदा जैसा बेटा चाहिए, पति नहीं’? आइए जानते हैं सुनीता के इस दर्द के पीछे की पूरी कहानी और समझते हैं कि क्या वाकई एक वक्त के बाद शादीशुदा रिश्ता निभाना सिर्फ एक फर्ज बनकर रह जाता है.
एक इंटरव्यू के दौरान सुनीता ने गोविंदा के बारे में बात करते हुए कहा: “वो एक बहुत अच्छे बेटे हैं, बहुत अच्छे भाई हैं, लेकिन एक पति के रूप में जो मुझे चाहिए… जैसे मुझे थोड़ा पार्टी करने का शौक है, बाहर डिनर पर जाना, हॉलीडेज पर जाना पसंद है… लेकिन उनकी जिंदगी सिर्फ अपने परिवार की सेवा में ही बीत गई. उस आदमी ने कभी खुद के लिए मेवा नहीं खाया. वो 60 साल के हो गए हैं, पर आज तक अपने लिए जिए ही नहीं. ये देखकर मुझे बहुत दुख होता है.”
बात यहीं नहीं रुकी, सुनीता ने आगे जो कहा वो और भी हैरान करने वाला था. उन्होंने कहा, “आप जब इतने बड़े सुपरस्टार हो, तो आपने क्या जिंदगी देखी? कुछ नहीं देखा. मैं हमेशा कहती हूँ कि मुझे बेटा गोविंदा जैसा चाहिए, पति नहीं! अब रिग्रेट (पछतावा) करने का फायदा ही क्या है? छोड़ तो नहीं सकते ना अब? 40 साल बीत गए हैं, अब तो ऐसा सोचना भी गुनाह है.”
सुनीता की इन बातों से साफ है कि जहाँ एक तरफ उन्हें गोविंदा के त्याग की कद्र है, वहीं दूसरी तरफ 40 सालों तक एक पार्टनर के साथ क्वालिटी टाइम न बिता पाने का एक खालीपन भी है.
जब पार्टनर की सोच हो अलग, तो क्या करें?
सुनीता और गोविंदा की यह कहानी सिर्फ उनकी नहीं है. हमारे समाज में ऐसे कई कपल्स हैं जहाँ एक पार्टनर ‘ड्यूटी’ (जिम्मेदारी) को प्यार समझता है, तो दूसरा ‘शेयर्ड एक्सपीरियंसेज’ (घूमना-फिरना, साथ वक्त बिताना) को. इंडियन एक्सप्रेस में इस मुद्दे पर साइकोलॉजिस्ट राशी गुरनानी कहती हैं, “लंबे समय के रिश्तों में प्राथमिकताओं का अलग होना असंगति (incompatibility) नहीं, बल्कि अलग वैल्यू सिस्टम को दिखाता है. एक पार्टनर केयरगिविंग और फाइनेंशियल सिक्योरिटी में अपना प्यार ढूंढता है, तो दूसरा क्वालिटी टाइम में. दिक्कत तब आती है जब दोनों प्यार को सिर्फ अपने नजरिए से देखते हैं.”
एक्सपर्ट के मुताबिक, ऐसे में कपल्स को ब्लेम-गेम छोड़कर एक-दूसरे की भाषा को समझना चाहिए. यह समझना जरूरी है कि आपके पार्टनर का आपके लिए कमाना या परिवार संभालना भी उनके प्यार जताने का ही एक तरीका (Duty as Love) है.
क्या 40 साल बाद भी बदल सकता है रिश्ता? एक्सपर्ट से जानें 3 जरूरी टिप्स-
अगर आप भी अपने रिश्ते में ऐसा ही खालीपन महसूस कर रहे हैं, तो साइकोलॉजिस्ट राशी गुरनानी के अनुसार, बदलाव के लिए कभी देर नहीं होती. आप इन तरीकों से रिश्ते में दोबारा गर्माहट ला सकते हैं:
छोटे-छोटे कदम उठाएं: रिश्ते को बदलने के लिए किसी बड़े ड्रामे की जरूरत नहीं होती. रोजमर्रा की जिंदगी में एक-दूसरे की तारीफ करना, छोटी-छोटी बातों में दिलचस्पी लेना और ईमानदारी से बात करना भी खोई हुई नजदीकी वापस ला सकता है.
खुद की खुशियों की जिम्मेदारी लें (Self-Expansion): अगर आपका पार्टनर आपके साथ घूमने या पार्टी करने नहीं जा सकता, तो अपनी खुशियों को मत मारिए. अपने दोस्तों के साथ ट्रैवल करें, हॉबीज अपनाएं या नए लोगों से मिलें. एक ही इंसान से अपनी सारी जरूरतें पूरी होने की उम्मीद करना सही नहीं है.
स्वीकार्यता और नया रास्ता (Acceptance and Agency): जो सालों से नहीं मिला, उसे स्वीकार करें (Acceptance). लेकिन आज से आप रिश्ते को कैसा बनाना चाहते हैं, उस पर काम करें (Agency). पुरानी बातों का मलाल करने के बजाय आज में नई यादें बनाएं.
हमें यह समझना जरूरी है कि रिश्ते चाहे 4 साल के हों या 40 साल के, जिम्मेदारी और खुशी का बैलेंस होना बेहद जरूरी है. सुनीता आहूजा का यह बयान हमें सिखाता है कि खुलकर अपनी बात कहना और पार्टनर के त्याग का सम्मान करते हुए अपनी अधूरी ख्वाहिशों को नए तरीके से जीना ही असल जिंदगी है.(Image: Instagram-officialsunitaahuja)









