2 घंटे 29 मिनट की ‘कॉन सिटी’, जिसका हर किरदार है गद्दार, सबके पास है अपना गहरा राज, IMDb रेटिंग है 7.5

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ओटीटी के जमाने में एंटरटेनमेंट बस अब सिर्फ एक क्लिक दूर ही है। दर्शक अपने मूड के हिसाब से किसी भी समय एंटरटेनमेंट का लुत्फ उठा सकते हैं। हर हफ्ते डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग जॉनर की कई नई फिल्में और सीरीज रिलीज होती हैं, जो दर्शकों का मनोरंजन करती हैं। ओटीटी, खासतौर पर नेटफ्लिक्स पर थ्रिलर फिल्मों का भी भंडार है, लेकिन ऐसी कम ही फिल्में होती हैं जो दर्शकों को इम्प्रेस कर पाएं। इस बीच ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर एक फिल्म खूब पसंद की जा रही है। इस फिल्म का नाम है ‘कॉन सिटी’, जो एक तमिल क्राइम-थ्रिलर है, लेकिन नेटफ्लिक्स में हिंदी डब वर्जन में भी मौजूद है। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर ये फिल्म खूब देखी जा रही है और फिलहाल नंबर वन पर ट्रेंड कर रही है।

क्या है क्राइम-थ्रिलर ‘कॉन सिटी’ की कहानी?

‘कॉन सिटी’ एक क्राइम-थ्रिलर है, जिसकी कहानी सरवन नाम के शख्स से शुरू होती है। सरवन सिर से लेकर पैर तक कर्ज में डूबा है और हर समय परेशान रहता है। उसके घर में मां, भाई, पत्नी और एक छोटा बेटा है, लेकिन रिश्तों में प्यार और गर्माहट की कमी है। खासतौर पर पति-पत्नी के बीच एक गहरी खाई है और एक घर, एक कमरे में रहते हुए भी दोनों के बीच न के बराबर बातचीत होती है। इस परिवार की जिंदगी में तब भूचाल आता है, जब सरवन का पांच साल का बेटा स्कूल से गायब हो जाता है।

सब पर शक की सुई

पुलिस जांच में जुट जाती है और बच्चे का पता लगाने के लिए सीसीटीवी फुटेज की जांच करती है, जिससे पता चलता है कि बच्चे को कोई अनजान नहीं बल्कि जान-पहचान वाला शख्स ही अपने साथ लेकर गया है। इसी के साथ फिल्म सात साल पीछे जाती है। पता चलता है कि सरवन कर्ज से बाहर आने के लिए बिजली बिल में जमा होने वाली रकम का गबन करता है। फिर उसकी पत्नी मित्रा की कहानी आती है, जिसे उसका बॉयफ्रेंड प्रेग्नेंट हालत में छोड़कर चला जाता है। इस धोखे से वह सड़क पर आ जाती है, लेकिन वो हार नहीं मानती और प्रॉपर्टी मैनेजर बनकर लोगों को ठगने लगती है। फिर सरवन की मां और योगी की एंट्री होती है, जो बीमारी के नाम पर पैसे जुटाते हैं और फिर पता चलता है कि बीमारी भी पूरी तरह झूठ थी।

किडनैपर का सच कर देता है हैरान

‘कॉन सिटी’ की कहानी फिर वर्तमान में आती है, जहां पुलिस बच्चे की तलाश में जुटी है और तभी बच्चे के किडनैपर का पता चलता है, जो एक अपराधि नहीं बल्कि पुलिस अधिकारी है। दरअसल, ये पुलिस अधिकारी सात साल पहले इन चारों से धोखा खा चुका है और इनसे बदला लेना चाहता है। इसके इसके बाद अधिकारी सरवन और उसके परिवार के आगे एक ऐसी शर्त रखता है, जो इनकी जिंदगी में बड़ी तबाही मचा देता है। फिल्म के आखिरी तक ये समझ पाना मुश्किल होता है कि आखिर असली विलेन कौन है। फिल्म की आईएमडीबी रेटिंग भी बेहद शानदार है। इसे आईएमडीबी पर 7.5 रेटिंग मिली है।

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