पिता के बाद अब ताऊ का साया! भतीजी को चॉकलेट खिलाते अखिलेश का वीडियो, जो बताता है कठिन समय में क्यों परिवार ही सबसे बड़ी ताकत

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प्रतीक यादव के निधन के बाद सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो वायरल हो रहा है. बैकुंठ धाम में अपनी छोटी भतीजी को चॉकलेट खिलाते और उसका रैपर खोलते अखिलेश यादव के इस दुलार ने सबका दिल जीत लिया है. यह पल गवाह है कि कठिन समय में परिवार का साथ ही सबसे बड़ी ताकत होती है.

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पिता का साया उठा तो ढाल बने अखिलेश! भतीजी को चॉकलेट खिलाते वीडियो हुआ वायरलZoom

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव की, जो राजनीति के दांव-पेच से दूर एक ‘ताऊ’ और एक ‘अभिभावक’ की भूमिका में नजर आए.

दुनिया में राजनीति की बातें होती रहेंगी, सत्ता के गलियारे शोर मचाते रहेंगे, लेकिन कुछ तस्वीरें ऐसी होती हैं जो राजनीति और शोर-शराबे से बहुत ऊपर निकल जाती हैं. हाल ही में लखनऊ के बैकुंठ धाम से एक ऐसी ही तस्वीर और वीडियो सामने आया, जिसने पत्थर दिल इंसान को भी भावुक कर दिया. यह तस्वीर थी समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव की, जो राजनीति के दांव-पेच से दूर एक ‘ताऊ’ और एक ‘अभिभावक’ की भूमिका में नजर आए.
मौका था प्रतीक यादव के अंतिम संस्कार का. माहौल गमगीन था, अपनों को खोने की चीखें थीं और हर आंख नम थी. इस भारी दुख के बीच प्रतीक यादव की छोटी सी बेटी वहां बैठी थी. वो मासूम, जिसे शायद अभी पूरी तरह से यह भी नहीं पता कि उसके सिर से उसके पिता का साया हमेशा के लिए उठ चुका है. ऐसी स्थिति में जहां बड़े-बड़े लोग टूट जाते हैं, वहां उस बच्ची को संभालना सबसे बड़ी चुनौती थी.

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव की, जो राजनीति के दांव-पेच से दूर एक ‘ताऊ’ और एक ‘अभिभावक’ की भूमिका में नजर आए.

तस्वीरों में देखा गया कि अखिलेश यादव अपनी उस नन्हीं भतीजी के पास बैठे हैं. उन्होंने अपनी जेब से एक चॉकलेट निकाली और बच्ची को दी. जब मासूम के नन्हे हाथों से चॉकलेट का रैपर नहीं खुला, तो अखिलेश ने उन्होंने बड़े प्यार खुद उसे खोला और बच्ची को खिलाया.

यह सिर्फ एक चॉकलेट खिलाने का वीडियो नहीं था. यह एक संदेश था कि जब घर का एक मजबूत स्तंभ ढह जाता है, तो परिवार का दूसरा स्तंभ कैसे ढाल बनकर खड़ा हो जाता है. अखिलेश यादव का वह व्यवहार एक राजनेता का नहीं, बल्कि उस बड़े भाई का था जो अपने छोटे भाई के जाने के बाद उसकी सबसे कीमती अमानत (उसकी संतान) को यह भरोसा दिला रहा था कि “मैं हूँ.”





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