Last Updated:
Hidden World of Office Romance: ऑफिस में रोमांस तो होता है लेकिन अक्सर यह छुपा हुआ रहता है. ज्यादातर लोग ऑफिस रोमांस में लिप्त सहकर्मियों के बारे में गॉसिप तो करते हैं लेकिन कोई कंफर्म नहीं करता. लेकिन एक नए सर्वे में ऑफिस की इस छिपी हुई दुनिया को उजागर किया जिसमें कहा गया है कि भले ही उसे नौकरी बदलनी पड़े लेकिन 43 प्रतिशत रोमांस शादी में बदल जाती है. वही बेवफाई करने वालों की भी कोई कमी नहीं है.
ऑफिस में रोमांस का बढ़ा चलन.
यह एक ऐसी रहस्यमयी दुनिया है जिसके बारे में पता तो सबको रहता है लेकिन कंफर्म कोई नहीं कर सकता है. यह बेहद छुपी हुई दुनिया है. ऑफिस रोमांस की इस छुपी हुई दुनिया में आपका स्वागत है. बात दरअसल ये है कि ऑफिस रोमांस को लेकर फोर्ब्स ने एक नया सर्वे किया है. इस सर्वे में कई चीजों से पर्दा हटाया गया है. सबसे पहले तो ये कि ऑफिस में रोमांस बहुत ज्यादा होने लगा है. दूसरा यह है कि ऑफिस का रोमांस अब शादियों में भी बदलने लगा है और तीसरा ये कि ऑफिस रोमांस भले ही चरम पर है लेकिन यहां बेवफाई की भी कोई कमी नहीं है. आइए इसकी दुनिया के अंदर चलते हैं.
43 फीसदी ऑफिस रोमांस शादी में
फोर्ब्स एडवाइजर द्वारा किए गए सर्वे में कहा गया है कि आजकल भले ही हजारों तरह के डेटिंग्स एप्स हैं लेकिन इन पर भरोसा न के बराबर है. जब युवा नौकरी में लग जाते हैं तो वर्क प्लेस ऐसी जगहें होती हैं जहां सबसे लंबा वक्त बिताया जाता है. जितना लोग अपने घर परिवार में अपने लोगों के पास नहीं रहते हैं उससे ज्यादा वे ऑफिस में रहते हैं वहां अपनी सहकर्मियों से घुलमिल जाते हैं. इस तरह वर्क प्लेस अब लंबे समय के रिश्तों का एक मजबूत केंद्र बनता जा रहा है. इसलिए अधिकांश युवा वर्क प्लेस पर अपने लाइफ पार्टनर की तलाश करते हैं और इसमें 43 फीसदी सफल हो जाते हैं. यानी वर्क प्लेस पर रोमांस करने वाले आधे से थोड़े कम अपने प्यार को शादी में बदल लेते हैं.
वर्क प्लेस का रोमांस क्यों पुख्ता होता
इस सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक किसी डेटिंग साइट पर मिले व्यक्ति की तुलना में अपने सहकर्मी से शादी होने की संभावना दो गुना से भी ज्यादा हो गई है. लेकिन ऐसा क्यों होता है. इसकी सबसे बड़ी वजह है कंफर्ट जोन. जब आप हर रोज 9 से 5 की नौकरी करते हैं तो यह एक जटिल माहौल होता है. कॉरपोरेट कल्चर की नौकरी में हमेशा तनाव रहता है. इस तनाव भरे माहौल को आप अपने पार्टनर के साथ मिलकर झेलते हैं. इतना ज्यादा समय साथ रहने से एक-दूसरे के कंपेटिबिलिटी को समझ पाते हैं. यानी एक-दूसरे सकारात्मक और नकारात्मक पक्ष को समझने के लिए बहुत समय मिल पाता है. इसमें जिसका रिश्ता आगे बढ़ गया तो इसका मतलब हुआ है कि वे हर चुनौती को साथ मिल कर झेल सकते हैं. इसलिए ऑफिस में इतनी देर का साथ केवल मज़ा ढूंढते नहीं बल्कि ऐसे व्यक्ति की तलाश भी करना है जो जीवन भर साथ दे सके. ऑफिस वह जगह है जहां कोई अपने परिवार से ज्यादा यहां के लोगों के साथ समय बिताते हैं. इसलिए वहां जो दिल को भा जाता है अगर दोनों में सामंजस्य बैठ जाता है तो वह रिश्ता मजबूत हो जाता है. यही कारण है कि करीब 43 फीसदी लोग अपने जीवनसाथी की तलाश ऑफिस की डेस्क के पास ही खत्म करते हैं.
रिश्ता छुपाए नहीं रहता
कॉरपोरेट कल्चर में ऑफिस रोमांस को मैनेजमेंट सही नहीं मानता. कुछ ऑफिसों में तो इसके लिए सख्त नियम बनाए गए हैं. ऑफिस रोमांस के कारण कामकाज पर भी असर पड़ता है. सर्वे में 57% से ज्यादा लोगों ने माना कि उनकी लव लाइफ ने सीधे तौर पर उनके काम के प्रदर्शन को प्रभावित किया है. इस कारण करीब 47% लोगों ने स्वीकार किया कि उन्होंने सहकर्मी के साथ रिश्ते को आगे बढ़ाने और एचआर से जुड़ी परेशानियों से बचने के लिए नौकरी बदल ली. इस स्थिति के कारण अधिकांश युवा अपने प्यार को राज बनाकर रखते हैं. सर्वे के मुताबिक करीब 39 प्रतिशत युवा अपने रिश्ते को छुपा कर रखना चाहते हैं लेकिन प्यार कभी छुपता नहीं है. उनकी हरकतों से करीब 60 प्रतिशत लोग पहले से ही भांप लेते हैं कि दोनों के बीच प्यार है. लेकिन इसकी चर्चा नहीं करते.
बेवफाई भी कम नहीं
जो रिश्ता इतनी कठिनाइयों के बाद आगे बढ़ जाता है, वह निश्चित रूप से मैच्योरिटी आने पर अंजाम तक पहुंच जाता है लेकिन ऑफिस में कुछ लोगों की मंशा पहले से बेवफाई की होती है. ऑफिस के ज्यादातर सीनियर लोग शादी-शुदा होते है. इसके बावजूद इनमें से अधिकांश ऑफिस में रोमांस करते हैं. सर्वे के मुताबिक वर्क प्लेस पर करीब 40 प्रतिशत रोमांस ऐसे होते हैं जिनमें पहले से ही एक पार्टनर के दिमाद में बेवफाई घुसी होती है. दरअसल, जो नजदीकियां भरोसा पैदा करती हैं वही कई बार आकर्षण और प्रलोभन भी बढ़ा देती हैं. लगभग 50% कर्मचारियों ने माना कि वे अपने सहकर्मियों के साथ फ्लर्ट करते हैं. ऐसे में प्रोफेशनल सहयोग और वैवाहिक बेवफाई के बीच की रेखा पहले से कहीं ज्यादा पतली हो गई है. रिश्ता टूटने के बाद होने वाली असहज स्थितियों का डर इतना बढ़ गया है कि कॉर्पोरेट दुनिया में एक नया ट्रेंड सामने आया है. वह है ब्रेकअप कंटिजेंसी प्लान. करीब 30% ऑफिस कपल्स अब पहले से ही एक तरह का समझौता कर लेते हैं, जिसे ऑफिस प्रीनप जैसा माना जा रहा है. इसमें तय किया जाता है कि अगर रिश्ता खराब हो गया या टूट गया तो वे ऑफिस में अपनी नौकरी, मीटिंग्स और साझा प्रोजेक्ट्स को कैसे संभालेंगे.
About the Author
18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …
और पढ़ें
अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज
खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में









