प्यार में पड़ते ही ‘होशियार’ भी बन जाते हैं बुद्धू! ये रही वो 6 बचकानी हरकतें, जो हर आशिक करता है!

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Common habits of lovers : कहते हैं प्यार अंधा होता है, लेकिन विज्ञान कहता है कि प्यार इंसान को थोड़ा ‘भोला’ और ‘तर्कहीन’ भी बना देता है. आपने अक्सर देखा होगा कि जो इंसान ऑफिस में बड़ी-बड़ी टीमें लीड करता है या जो स्टूडेंट क्लास का टॉपर है, प्यार में पड़ते ही वह ऐसी हरकतें करने लगता है जो उसकी मैच्योर इमेज से मेल नहीं खातीं. क्या यह सिर्फ एक अहसास है? जी नहीं, इसके पीछे ठोस न्यूरोलॉजी है.

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (UCL) के न्यूरोबायोलॉजी विभाग के शोध के अनुसार, जब हम किसी के प्यार में गहराई से डूबे होते हैं, तो हमारे मस्तिष्क का ‘प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स’ (Prefrontal Cortex), जो सोशल जजमेंट, लॉजिक और क्रिटिकल थिंकिंग के लिए जिम्मेदार होता है,अस्थायी रूप से सुप्त (Deactivate) हो जाता है. यही कारण है कि अच्छे-भले समझदार लोग भी प्यार में ये 6 बचकानी हरकतें करने लगते हैं:

1. फोन को हर 30 सेकंड में चेक करना
भले ही फोन साइलेंट पर न हो, लेकिन एक प्रेमी को अक्सर ‘फैंटम वाइब्रेशन’ महसूस होता है. उन्हें लगता है कि शायद कोई नोटिफिकेशन आया होगा. पेंसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी के मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, यह ‘डोपामाइन रश’ का नतीजा है. दिमाग के लिए पार्टनर का हर मैसेज एक ‘रिवॉर्ड’ की तरह है, जिससे ब्रेन का रिवॉर्ड सिस्टम बार-बार फोन चेक करने की लत लगा देता है.

2. खुद से बातें करना और मुस्कुराना
शीशे के सामने खड़े होकर अपनी स्माइल चेक करना या पार्टनर से होने वाली अगली मुलाकात की रिहर्सल करना. यह बाहर से देखने में बचकाना लग सकता है, लेकिन असल में यह हमारा नर्वस सिस्टम है जो उस सुखद अहसास (Pleasurable experience) को प्रोसेस कर रहा होता है.

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3. ‘बेबी-टॉक’ (Baby Talk) का इस्तेमाल
“मेले बाबू ने थाना थाया?” – यह सुनकर भले ही दुनिया को अजीब लगे, लेकिन फ्लोरिडा स्टेट यूनिवर्सिटी के शोध बताते हैं कि पार्टनर के बीच ‘बेबी टॉक’ या खास निकनेम्स वास्तव में उनके बॉन्ड को मजबूत करते हैं. इसे मनोविज्ञान में ‘पैरेंटसी’ (Parentese) से प्रेरित माना जाता है, जो रिश्तों में सुरक्षा, कोमलता और अटूट जुड़ाव का अहसास कराती है.

4. पुराने चैट्स को बार-बार ‘री-रीड’ करना
एक ही पुरानी बातचीत को 50 बार पढ़ना और हर बार वही खुशी महसूस करना. वैज्ञानिक रूप से, प्यार में पड़ा दिमाग उन शब्दों के जरिए उसी ‘इमोशनल हाई’ को दोबारा महसूस करना चाहता है जो पहली बार पढ़ते समय हुआ था. यह यादें ताजा रखने की एक न्यूरोलॉजिकल प्रक्रिया है.

5. ‘सोशल स्नूपिंग’ या डिजिटल जासूसी
पार्टनर ने पुरानी फोटो पर किसे ‘लाइक’ किया था या उनकी प्रोफाइल पर नए कमेंट्स किसके हैं? एक बुद्धिमान इंसान भी कभी-कभी डिजिटल डिटेक्टिव बन जाता है. साइबर-मनोविज्ञान के अनुसार, यह असुरक्षा नहीं बल्कि पार्टनर की दुनिया के बारे में और अधिक जानने की एक जिज्ञासु (परंतु बचकानी) कोशिश होती है.

6. छोटी-छोटी चीजों से ‘सेंटिमेंटल अटैचमेंट’
मूवी की टिकट का आधा हिस्सा, चॉकलेट का रैपर या एक सूखा हुआ फूल. एक प्रोफेशनल व्यक्ति के लिए जो चीजें बेकार हैं, एक प्रेमी के लिए वे अनमोल हैं. इसे ‘मेमोरी कीपिंग’ कहा जाता है, जहां दिमाग वस्तु की कीमत को नहीं, बल्कि उससे जुड़ी भावना और उस खास पल की याद को सहेजता है.

तो क्या यह ‘बुद्धूपन’ बुरा है?
बिल्कुल नहीं! हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्यार में होने वाली ये गतिविधियां शरीर में तनाव कम करने वाले हार्मोन ‘ऑक्सीटोसिन’ (Oxytocin) और ‘वेसोप्रेसिन’ (Vasopressin) को बढ़ाती हैं. तो अगर आप भी प्यार में पड़कर थोड़ा ‘पागलपन’ कर रहे हैं, तो खुश हो जाइए, आपका दिमाग पूरी तरह स्वस्थ है और आप जीवन के सबसे खूबसूरत और नेचुरल अहसास को जी रहे हैं.



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