Walking Ahead Of Your Partner Psychology : कल्पना कीजिए कि आप अपने पार्टनर के साथ किसी सड़क पर टहल रहे हैं. शुरुआत में आप दोनों साथ-साथ हैं, लेकिन अचानक आप महसूस करते हैं कि वह बिना कुछ कहे धीरे धीरे आपसे दो कदम आगे निकल गया है. आप अपनी गति बढ़ाते हैं, लेकिन वह धीमा नहीं होता. कोई बहस नहीं हुई, कोई शब्द नहीं कहा गया, लेकिन उस पल में एक अजीब सी दूरी महसूस हुई. शायद आपको लगे कि यह एक छोटी सी बात है, लेकिन मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि ये छोटे-छोटे पल हमारे रिश्तों की गहराई, ताकत और संवेदनशीलता के बारे में बहुत कुछ कह जाते हैं.
साथ चलना क्यों जरूरी?
मशहूर मनोवैज्ञानिक अल्बर्ट मेहरबियन के अनुसार, इंसान अपनी बॉडी लैंग्वेज और शारीरिक दूरी (Nonverbal Behavior) से लगातार भावनात्मक संकेत भेजता है. जब दो लोग इमोशनली कनेक्टेड रहते हैं तो वे एक-दूसरे के कदमों से कदम मिलाकर अपनेआप चलने लगते हैं.
इस छोटे से बॉडी लैंग्वेज पर रिलेशनशिप एक्सपर्ट डॉ. जॉन गॉटमैन का कहना है कि यह ‘इमोशनल बिड्स’ (Emotional Bids) हैं यानी कि छोटे-छोटे इशारे जिनसे हम एक-दूसरे को संकेत देते हैं कि हम उनका ख्याल रखते हैं. लेकिन साथ न चलना मेंटल प्रेशर बढ़ाने का काम कर सकता है.
आगे चलने का क्या है मतलब?
जर्नल ऑफ नॉनवर्बल बिहेवियर में प्रकाशित एक अध्ययन की मानें तो जो लोग लगातार आगे चलते हैं, उन्हें अक्सर रिश्ते में ‘हावी’ या ‘कंट्रोल करने वाला’ माना जाता है. ऐसे में अगर कोई पार्टनर बार-बार आपको पीछे छोड़कर आगे निकल जाता है और इस बात पर ध्यान भी नहीं देता, तो यह उसकी इस सोच को दर्शाता है कि वह आपके साथ बिना तालमेल बिठाए अकेले आगे बढ़ जाना चाहता है.’
गॉटमैन का यह मानना है कि जब पार्टनर इन छोटे संकेतों पर ध्यान देना बंद कर देते हैं, तो रिश्तों में भावनात्मक दूरी धीरे-धीरे बढ़नी शुरू हो जाती है.
पीछे रह जाना यानी नजरअंदाज होना
जो व्यक्ति पीछे चल रहा होता है, वह भले ही कुछ न कहे, लेकिन ऐसे इंसान खुद को ‘नजरअंदाज’ किया जाना समझते हैं. पीछे चलने वाले को अक्सर ये महसूस हो सकता है कि वह रिश्ते में महत्वपूर्ण नहीं है. उसे बार-बार ‘कैच-अप’ यानी बराबरी करने की कोशिश करनी पड़ रही है और उसकी मौजूदगी की सामने वाले को परवाह नहीं है.
तालमेल ही असली प्यार
एक शोध के अनुसार, एक ही गति में साथ चलने से आपसी विश्वास और सहयोग बढ़ता है. जो लोग वाकई अपने साथी की परवाह करते हैं, वे बिना सोचे-समझे अपनी गति धीमी कर लेते हैं या पीछे मुड़कर अपने पार्टनर को देखते हैं. हालांकि कभी-कभी आगे चलने का मतलब रिश्ता खराब होना नहीं होता. कई बार तनाव या किसी बात की जल्दी होना, दोनों की लंबाई या चलने की रफ्तार में अंतर या रास्ते से अनजान होना भी वजह हो सकते हैं.
इस तरह याद रखें कि साथ चलना केवल शिष्टाचार नहीं, बल्कि ‘ध्यान’ (Attention) देने की बात भी है. आप साथ में कैसे चलते हैं, यह दिखलाता है आप भावनात्मक रूप से एक दूसरे के लिए कितने मौजूद हैं.









