मुंबई: मुंबई के सिद्धि विनायक मंदिर में चढ़ावा चोरी पर आज ट्रस्ट ने पहली बार सफाई दी। ट्र्स्ट ने कहा कि चढ़ावा चोरी हुई है लेकिन ये उन्होंने नहीं की, इसमें शिवसेना यूबीटी यानी उद्धव की पार्टी के कार्यकर्ताओं का हाथ है। ट्रस्ट के अध्यक्ष सदा सरवणकर ने कहा कि 21 मार्च को पहली बार चोरी पकड़ी गई। सीसीटीवी फुटेज के जरिए 8 लोगों को चोरी करते पकड़ा गया। उनकी गिरफ्तारी हुई, जेल भेजा गया। उनमे कुछ कर्मचारी शिवसेना यूबीटी से जुड़े हुए थे। इसके बाद 45 कर्मचारियों पर एक्शन हुआ।
इनमे वो कर्मचारी भी शामिल थे, जो भक्तों के साथ वीआईपी दर्शन के नाम पर ठगी कर रहे थे। सदा सरवणकर ने कहा कि पहले एक सप्ताह में चढ़ावे की रकम 45 लाख तक आती थी, जो बढ़कर अब 98 लाख हो गई है। उन्हें शक है कि चढ़ावे में हेरफेर कर ट्रस्ट को 12 करोड़ रुपये साल का चूना लगाया गया है। उन्होंने कहा कि ये बात सच है कि ट्रस्ट ने ही एसीबी को जांच के लिए कहा था। ऑडिट कराने की मांग की थी लेकिन चोरी से मौजूदा ट्रस्ट का कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने तो व्यवस्थाएं ठीक की हैं। मंदिर में दलालों का नेटवर्क तोड़ा है, जिससे चढ़ावे की रकम अचानक बढ़ गई है।
सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सदा सरवणकर ने की PC
सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सदा सरवणकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “क्या कोई जानबूझकर हमारे सिद्धिविनायक मंदिर की छवि खराब करने की कोशिश कर रहा है? क्या इसके पीछे कोई साजिश है? पहले एक सार्वजनिक कार्यक्रम में राज ठाकरे ने मंदिर में कथित अनियमितताओं से जुड़ा एक पत्र पढ़कर सुनाया था। मैंने स्वयं मंदिर में हो रही कथित गड़बड़ियों की शिकायत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) से की थी। इसके बाद ACB ने जांच शुरू की, ट्रैप भी लगाए गए। बाद में सीसीटीवी फुटेज में दिखाई देने वाले ट्रस्ट के कुछ कर्मचारियों को हटाने का निर्णय लिया गया। इसके बाद ट्रस्ट के कर्मचारी राजन पेंडुलकर को गिरफ्तार किया गया और उसके साथ 9 अन्य लोग भी इस मामले में शामिल पाए गए।
राजन पेंडुलकर और अन्य आरोपी विशाखा राऊत (शिवसेना-यूबीटी नेता) से जुड़े हुए थे।”
सरवणकर का आरोप है कि गिरफ्तार किए गए लोग शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेताओं से जुड़े हुए थे। सरवणकर ने कहा, “हमने लगभग 45 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है। ट्रस्ट ने पूरे रिकॉर्ड का ऑडिट कराने के लिए विधि एवं न्याय विभाग को पत्र लिखा है। क्या सिर्फ इसलिए मुझे इस्तीफा दे देना चाहिए कि मैंने यह मामला ACB के पास पहुंचाया और संबंधित कर्मचारियों की गिरफ्तारी करवाई? मैं या मेरी टीम का कोई सदस्य इस्तीफा क्यों दे? मैं अपने सभी आरोपों पर कायम हूं और मेरे पास इस बात के सबूत हैं कि गिरफ्तार कर्मचारी शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं से जुड़े हुए थे।”
सदा सरवणकर ने बताया, “पहले मंदिर की दान राशि का हिसाब करीब 40-50 लाख तक जाता था लेकिन बाद में 90 लाख रुपये तक ही दर्ज हुआ । जांच में सालाना लगभग 18 करोड़ रुपये का अंतर दिखाई दिया। इसी वजह से हमने ACB को पत्र लिखकर जांच की मांग की कि इस अंतर के लिए जिम्मेदार कौन है। हमारी टीम के कार्यभार संभालने के बाद दर्ज होने वाली दान राशि में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसलिए हमने पूर्व कार्यकाल के दौरान हुए इस अंतर की जांच की मांग की है।”
ट्रस्टी राहुल लोंढे ने क्या कहा?
राहुल ने कहा, “विधि एवं न्याय विभाग ने प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट मिलने के बाद इसे मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्रियों के समक्ष रखा जाएगा। ACB की जांच पहले से चल रही है। इसके अलावा हम इस पूरे मामले की CID जांच की भी मांग करेंगे।”
राहुल ने कहा, “मैं फिर स्पष्ट करना चाहता हूं कि हमने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को कोई पत्र नहीं लिखा है। आप (मीडिया) राज ठाकरे से पूछिए कि वह किसका पत्र पढ़ रहे थे। हम यह भी मांग कर रहे हैं कि वर्ष 2019 में तत्कालीन अध्यक्ष आदेश बांदेकर द्वारा शिव भोजन योजना के लिए दिए गए 10 करोड़ रुपये की जांच हो। उस समय उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री थे और मंदिर से इस योजना के लिए धन मांगा गया था। हम जानना चाहते हैं कि यह राशि कहां खर्च हुई, किन केंद्रों को दी गई और इसका उपयोग किस प्रकार किया गया। हमारी नई टीम ने सदा सरवणकर के नेतृत्व में कार्यभार संभालने के बाद पिछले दो वर्षों में मंदिर की दर्ज दान राशि में पहले की तुलना में काफी वृद्धि हुई है। इसलिए हमने ACB से पूर्व कार्यकाल के दौरान दान राशि में अंतर की जांच कराने की मांग की है।”
पूरे मामले को गलत तरीके से पेश किया जा रहा: सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट
सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट का कहना है कि पूरे मामले को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। ट्रस्ट का दावा है कि जिस पत्र का हवाला देकर चढ़ावे में कथित घोटाले की बात कही जा रही है, उसमें ट्रस्टियों पर किसी तरह के भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगाया गया है। ट्रस्ट का कहना है कि उसने खुद अनियमितताओं का पता लगाया, कार्रवाई की और जांच की मांग भी की।
राहुल लोंढे ने दावा किया कि वर्ष 2024 में ट्रस्ट की जिम्मेदारी संभालने के बाद मंदिर की व्यवस्था की समीक्षा में कई अनियमितताएं सामने आईं। उनके मुताबिक, दादर स्टेशन से मंदिर तक श्रद्धालुओं से अवैध वसूली का एक नेटवर्क सक्रिय था, जिसमें कुछ फूल विक्रेता, टैक्सी चालक और मंदिर के कर्मचारी कथित रूप से शामिल थे। ट्रस्ट का कहना है कि आरती के बाद दानपेटी से पैसे निकालने के आरोप में कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई, आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया और अन्य मामलों में भी कार्रवाई की गई।
ट्रस्ट का दावा है कि सख्त कार्रवाई और प्रशासनिक सुधारों के बाद साप्ताहिक चढ़ावे की राशि 20 से 50 लाख रुपये से बढ़कर 90 लाख से एक करोड़ रुपये से अधिक हो गई। इसी आधार पर ट्रस्ट ने अनुमान लगाया कि पहले हर महीने करीब डेढ़ करोड़ रुपये और सालाना लगभग 18 करोड़ रुपये तक की संभावित गड़बड़ी हुई हो सकती है। ट्रस्ट ने इस पूरे मामले की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो और विधि एवं न्याय विभाग से कराने की मांग की है।
लोंढे ने यह भी आरोप लगाया कि जिन कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई, उनका संबंध उद्धव ठाकरे गुट से था। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री रहते सिद्धिविनायक ट्रस्ट से शिवभोजन योजना के लिए दिए गए 10 करोड़ रुपये के उपयोग की भी जांच कराई जाए।
ट्रस्ट में चढ़ावे में कथित गड़बड़ी को लेकर सियासत तेज
मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट में चढ़ावे में कथित गड़बड़ी को लेकर सियासत तेज हो गई है। ट्रस्ट के आठ ट्रस्टियों द्वारा 21 अप्रैल 2026 को उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को लिखे गए पत्र के सार्वजनिक होने के बाद इस मुद्दे ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। पत्र में दावा किया गया था कि कुछ कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद मंदिर के चढ़ावे में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। इससे आशंका जताई गई कि पहले चढ़ावे में चोरी के कारण दान की राशि कम दर्ज हो रही थी और सालाना करीब 18 करोड़ रुपये की संभावित गड़बड़ी हुई हो सकती है।
इसी पत्र का हवाला देते हुए राज ठाकरे ने सिद्धिविनायक मंदिर में चढ़ावे में कथित चोरी की जांच की मांग की। इसके बाद महाराष्ट्र सरकार में मंत्री छगन भुजबल ने भी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता बताई। कांग्रेस ने भी मामले की जांच कर तथ्यों को सार्वजनिक करने की मांग की है।
हालांकि, सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि चढ़ावे में बढ़ोतरी का कारण चोरी नहीं, बल्कि ट्रस्ट द्वारा किए गए प्रशासनिक सुधार हैं। ट्रस्ट का कहना है कि जिन कर्मचारियों की गतिविधियां संदिग्ध थीं, उनके खिलाफ पहले ही कार्रवाई की जा चुकी है और व्यवस्था में मौजूद खामियों को दूर किया गया है।
ट्रस्ट में शिवसेना, बीजेपी और एनसीपी (अजित पवार गुट) के प्रतिनिधि ट्रस्टी के रूप में शामिल
सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट में शिवसेना, बीजेपी और एनसीपी (अजित पवार गुट) के प्रतिनिधि ट्रस्टी के रूप में शामिल हैं। ट्रस्ट के अध्यक्ष सदा सरवणकर ने बताया कि 21 मार्च 2026 को ट्रस्ट की शिकायत पर आठ कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया था। इन कर्मचारियों पर आरती की थाली में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए पैसे चोरी करने का आरोप है। मंदिर परिसर में लगे 208 सीसीटीवी कैमरों में कुछ कर्मचारियों की कथित रूप से पैसे निकालते हुए तस्वीरें सामने आई थीं। जांच के बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की गई।
ट्रस्ट ने यह भी बताया कि इस वर्ष 19 अन्य कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई। आरोप है कि ये कर्मचारी मंदिर के बाहर फूल-हार बेचने वालों के साथ मिलकर श्रद्धालुओं से 100 से 500 रुपये तक लेकर जल्दी दर्शन कराने की व्यवस्था करते थे। जांच के दौरान कर्मचारियों के बैंक खातों और गूगल पे लेन-देन की पड़ताल में फूल विक्रेताओं से पैसे मिलने के प्रमाण सामने आए, जिसके आधार पर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की गई।
ट्रस्ट का कहना है कि इन अनियमितताओं पर रोक लगाने और व्यवस्था में सुधार करने के बाद चढ़ावे की राशि में स्वाभाविक बढ़ोतरी हुई है। साथ ही, वर्ष के अलग-अलग धार्मिक अवसरों और त्योहारों के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने से भी चढ़ावे में उतार-चढ़ाव आता है।
उधर, राज ठाकरे ने एमएनएस के एक कार्यक्रम में अप्रैल 2026 के उसी पत्र का उल्लेख करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। मंत्री छगन भुजबल ने भी कहा कि यदि आरोप लगे हैं तो उनकी उचित जांच होनी चाहिए। वहीं, महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि जैसे अन्य धार्मिक संस्थानों से जुड़े मामलों में सवाल उठे हैं, वैसे ही इस मामले की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
कुछ समय पहले ही ये खबर भी सामने आई थी कि श्री सिद्धिविनायक मंदिर परिसर को नया लुक दिया जाएगा।
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