कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. डी. वाई. पाटिल का निधन हो गया। शिक्षा की अलख गांव-गांव तक पहुंचाने वाले शिक्षण सम्राट, पद्मश्री डॉ. डी. वाई. पाटील ने कोल्हापुर के कसबा बावड़ा स्थित अपने निवास पर अंतिम सांस ली। प्रख्यात शिक्षाविद, समाजसेवी और पूर्व राज्यपाल डॉ. ज्ञानदेव यशवंतराव (डी. वाई.) पाटिल का जन्म 22 अक्टूबर 1935 को हुआ था। डॉ. पाटिल ने बिहार, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में अपनी सेवाएं दीं। वे डी. वाई. पाटिल ग्रुप के संस्थापक थे। उनके नेतृत्व में देशभर में 182 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों, सात विश्वविद्यालयों और अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के विशाल नेटवर्क की स्थापना हुई।
कल होगा अंतिम संस्कार
शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनके योगदान को देशभर में लंबे समय तक याद किया जाएगा। बुधवार सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद शाम 4 बजे कसबा बावड़ा स्थित ‘यशवंत निवास’ से उनकी अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। उनका अंतिम संस्कार कोल्हापुर के लाइन बाजार स्थित डॉ. डी. वाई. पाटील मेडिकल कॉलेज परिसर में किया जाएगा।
राजनीति में रहे सक्रिय, शिक्षा का अलख जगाया
उनका जन्म एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य के रूप में कांग्रेस के नेतृत्व में कार्य किया और राज्य मंत्रिमंडल में भी जिम्मेदारी निभाई। हालांकि, उन्होंने सक्रिय राजनीति से अधिक शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र को अपना कार्यक्षेत्र बनाया। उन्होंने महाराष्ट्र के कोल्हापुर, पुणे और मुंबई सहित देश के विभिन्न हिस्सों तथा विदेशों में विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, कृषि महाविद्यालय और अन्य शिक्षण संस्थानों की स्थापना की। जापान में भी विश्वविद्यालय स्थापित कर उन्होंने भारतीय शिक्षा को वैश्विक पहचान दिलाई। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनके योगदान की देश और दुनिया में व्यापक सराहना हुई।
वर्ष 2018 में उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में प्रवेश किया था, लेकिन वे सक्रिय राजनीति से दूर रहे। कांग्रेस में लंबे समय तक कार्य करने के बाद उन्हें क्रमशः त्रिपुरा, बिहार और पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया। तीन राज्यों के राज्यपाल के रूप में उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया।
आम जनता के हितों का मुद्दा उठाया
डॉ. डी. वाई. पाटील ने वर्ष 1957 से 1962 तक कोल्हापुर के महापौर के रूप में सेवा दी। इसके बाद 1967 से 1972 तक महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य (विधायक) रहे। इस दौरान उन्होंने आम जनता के हितों, न्याय और बुनियादी सुविधाओं के मुद्दों को विधानसभा में प्रभावी ढंग से उठाया। वे कांग्रेस के विधान परिषद दल के नेता विधायक सतेज पाटील और डी. वाई. पाटील समूह के प्रमुख संजय पाटिल के पिता थे, जबकि कोल्हापुर दक्षिण के पूर्व विधायक ऋतुराज पाटिल उनके पौत्र हैं।









