Sleep Divorce: रात का सन्नाटा, दिनभर की थकान और एक ही बिस्तर… सुनने में सब कुछ परफेक्ट लगता है, लेकिन हर कपल की हकीकत ऐसी नहीं होती. कई घरों में रात होते ही एक नई लड़ाई शुरू हो जाती है-किसी को खर्राटों से परेशानी, किसी को करवटों से, तो किसी को अलग स्लीप टाइमिंग से. ऐसे में अब एक नया ट्रेंड तेजी से सामने आ रहा है, जिसे ‘स्लीप डिवोर्स’ कहा जा रहा है. नाम भले थोड़ा चौंकाने वाला लगे, लेकिन असल में यह रिश्ते को खत्म करने का नहीं, बल्कि उसे बचाने का तरीका बनता जा रहा है. दिलचस्प बात यह है कि भारत समेत दुनिया भर में कई कपल्स इसे अपनाने लगे हैं और इसके फायदे भी महसूस कर रहे हैं. तो आखिर क्यों बढ़ रहा है यह ट्रेंड और क्या सच में इससे रिश्ते मजबूत होते हैं? आइए समझते हैं.
क्या है स्लीप डिवोर्स?
स्लीप डिवोर्स का मतलब है. पति-पत्नी का आपसी सहमति से अलग-अलग सोना. यह अलग कमरा हो सकता है या एक ही कमरे में अलग बेड. इसका मकसद दूरी बनाना नहीं, बल्कि बेहतर नींद लेना होता है. आज के समय में जब लाइफस्टाइल काफी बदल चुका है, लोगों की नींद का पैटर्न भी एक जैसा नहीं रहता. कोई देर रात तक मोबाइल चलाता है, तो कोई जल्दी सोना चाहता है. ऐसे में साथ सोना कई बार तनाव की वजह बन जाता है.
क्यों तेजी से बढ़ रहा है यह ट्रेंड?
नींद की कमी बन रही बड़ी समस्या
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में नींद पूरी न होना आम बात हो गई है, लेकिन जब इसकी वजह आपका पार्टनर बन जाए, तो समस्या और बढ़ जाती है. नींद खराब होने से मूड खराब रहता है और दिनभर चिड़चिड़ापन बना रहता है.
खर्राटे और स्लीप डिसऑर्डर
कई लोगों को खर्राटे लेने की आदत होती है, जो दूसरे के लिए बड़ी परेशानी बन सकती है. वहीं कुछ लोग स्लीप एपनिया जैसी समस्या से जूझते हैं, जिससे रात में बार-बार नींद टूटती है.
अलग-अलग स्लीप टाइमिंग
आज के दौर में हर किसी का रूटीन अलग है. कोई देर रात तक काम करता है, तो कोई जल्दी उठ जाता है. ऐसे में एक ही टाइम पर सोना हर किसी के लिए संभव नहीं होता.
बार-बार करवट बदलना या हलचल
कुछ लोग नींद में ज्यादा मूवमेंट करते हैं, जिससे दूसरे की नींद बार-बार डिस्टर्ब होती है. धीरे-धीरे यह छोटी परेशानी बड़ी झुंझलाहट में बदल जाती है.
क्या कहते हैं आंकड़े?
हाल के सर्वे बताते हैं कि करीब 30% से ज्यादा लोग अब स्लीप डिवोर्स अपना रहे हैं. खासकर 35 से 44 साल की उम्र के लोग इसे सबसे ज्यादा फॉलो कर रहे हैं. इस उम्र में काम का दबाव, फैमिली जिम्मेदारियां और हेल्थ इश्यू-तीनों मिलकर नींद को काफी प्रभावित करते हैं. ऐसे में लोग समझदारी से फैसला लेते हुए अपनी नींद को प्राथमिकता दे रहे हैं.
क्या इससे रिश्ता कमजोर होता है?
यह सवाल सबसे ज्यादा पूछा जाता है. लेकिन एक्सपर्ट्स की मानें तो जवाब उल्टा है. जब दोनों पार्टनर अच्छी नींद लेते हैं, तो उनका मूड बेहतर रहता है. वे एक-दूसरे से कम झगड़ते हैं और दिनभर ज्यादा पॉजिटिव रहते हैं. यानी दूरी सिर्फ रात तक सीमित रहती है, दिलों के बीच नहीं आती.
रियल लाइफ में क्या हो रहा है?
दिल्ली में रहने वाले एक कपल का उदाहरण लें. दोनों की जॉब अलग-अलग शिफ्ट में थी. पहले वे साथ सोने की कोशिश करते थे, लेकिन इससे दोनों की नींद खराब होती थी और रोज छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा होने लगा. बाद में उन्होंने अलग-अलग सोने का फैसला लिया. नतीजा? दोनों की नींद सुधरी, मूड बेहतर हुआ और झगड़े लगभग खत्म हो गए. ऐसे कई उदाहरण अब सामने आ रहे हैं, जहां स्लीप डिवोर्स ने रिश्तों को बचाने में मदद की है.
रोमांस कैसे बनाए रखें?
सोने से पहले साथ समय बिताएं
चाहे आप अलग सो रहे हों, लेकिन सोने से पहले कुछ वक्त साथ बिताना जरूरी है. साथ में चाय पीना, बात करना या कोई शो देखना रिश्ते को जुड़ा रखता है.
क्वालिटी टाइम फिक्स करें
दिनभर की भागदौड़ में थोड़ा समय सिर्फ एक-दूसरे के लिए निकालें. इससे इमोशनल कनेक्शन बना रहता है.
वीकेंड को खास बनाएं
वीकेंड पर साथ सोना या ज्यादा समय बिताना एक अच्छा तरीका हो सकता है, जिससे दूरी महसूस न हो.
क्या हर कपल के लिए सही है स्लीप डिवोर्स?
जरूरी नहीं कि यह हर किसी के लिए काम करे. कुछ लोगों के लिए साथ सोना ही रिलेशनशिप का अहम हिस्सा होता है. इसलिए यह फैसला पूरी तरह आपसी समझ और जरूरत पर निर्भर करता है. अगर दोनों पार्टनर सहमत हैं और इससे उनकी लाइफ बेहतर हो रही है, तो इसमें कोई बुराई नहीं है.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)







