रिलेशनशिप में ‘Orbiting’ क्या है? न बात करते, न पीछा छोड़ते; दिखावटी रिश्तों के इस लूप से कैसे आएं बाहर

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Orbiting In Relationships : जब कोई आपको ऑर्बिट करता है, तो आप एक ‘मेंटल लूप’ में फंस जाते हैं. आप खुद से सवाल करने लगते हैं, “अगर उसे मुझसे बात नहीं करनी, तो वो मेरी स्टोरी क्यों देख रहा है? क्या उसके मन में अब भी मेरे लिए कुछ है?” यह उम्मीद आपको पुरानी यादों से बाहर नहीं निकलने देती और आप एक ऐसे इंसान का इंतजार करने लगते हैं जो शायद कभी वापस नहीं आने वाला.

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रिलेशनशिप में 'Orbiting' क्या है? कैसे बचाएं खुद को इस जाल सेZoom

जब कोई आपको ऑर्बिट करता है, तो आप एक ‘मेंटल लूप’ में फंस जाते हैं.

Digital Relationship Trends: क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि किसी ने आपको ‘घोस्ट’ (Ghost) कर दिया हो(यानी अचानक बात करना बंद कर दिया), लेकिन वो अब भी आपकी हर इंस्टाग्राम स्टोरी सबसे पहले देखता है? या आपके फेसबुक पोस्ट पर कभी-कभी लाइक कर देता है? न तो वो आपसे बात कर रहे हैं और न ही आपकी जिंदगी से पूरी तरह जा रहे हैं. अगर हां, तो आप ‘ऑर्बिटिंग’ (Orbiting) का शिकार हैं. यह सुनने में शायद मामूली लगे, लेकिन मनोवैज्ञानिक रूप से यह किसी भी इंसान को बुरी तरह उलझा सकता है. आइए समझते हैं कि आखिर क्या है यह ‘ऑर्बिटिंग’ और क्यों लोग ऐसा करते हैं.

क्या है ‘ऑर्बिटिंग’?
‘ऑर्बिटिंग’ शब्द का सीधा संबंध अंतरिक्ष से है. जैसे एक उपग्रह (Satellite) किसी ग्रह के चारों ओर चक्कर लगाता है लेकिन उस पर कभी उतरता नहीं, ठीक वैसे ही ‘ऑर्बिटिंग’ करने वाला व्यक्ति आपके साथ सीधे संवाद (Conversation) तो नहीं करता, लेकिन सोशल मीडिया के जरिए आपकी जिंदगी के इर्द-गिर्द चक्कर लगाता रहता है. वे आपके करीब नहीं आएंगे, लेकिन आपको अपनी नजरों से ओझल भी नहीं होने देंगे.

लोग ऐसा क्यों करते हैं?
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, ऑर्बिटिंग करने वाले लोग अक्सर ‘FOMO’ (Fear Of Missing Out) का शिकार होते हैं. वे आपके साथ रिश्ता तो नहीं रखना चाहते, लेकिन वे यह भी नहीं चाहते कि आप उन्हें पूरी तरह भूल जाएं. यह एक तरह का ‘बैकअप प्लान’ रखने जैसा है. कुछ लोग ऐसा सिर्फ अपनी जिज्ञासा शांत करने के लिए करते हैं, तो कुछ लोग इसे अपनी मौजूदगी दर्ज कराने का एक ‘आसान’ तरीका मानते हैं जिसमें उन्हें कोई मेहनत नहीं करनी पड़ती.

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ऑर्बिटिंग आपको कैसे नुकसान पहुँचाती है?
जब कोई आपको ऑर्बिट करता है, तो आप एक ‘मेंटल लूप’ में फंस जाते हैं. आप खुद से सवाल करने लगते हैं— “अगर उसे मुझसे बात नहीं करनी, तो वो मेरी स्टोरी क्यों देख रहा है? क्या उसके मन में अब भी मेरे लिए कुछ है?” यह उम्मीद आपको पुरानी यादों से बाहर नहीं निकलने देती और आप एक ऐसे इंसान का इंतजार करने लगते हैं जो शायद कभी वापस नहीं आने वाला.

इस जहरीले लूप से कैसे आएं बाहर?

  • ब्लॉक या रिस्ट्रिक्ट करें: अगर उनकी डिजिटल मौजूदगी आपको परेशान कर रही है, तो उन्हें ‘अनफॉलो’ या ‘म्यूट’ करने में संकोच न करें. अपनी मानसिक शांति को अपनी प्राथमिकता बनाएं.
  • खुद से सच बोलें: यह स्वीकार करें कि सिर्फ एक स्टोरी देख लेना या फोटो लाइक करना ‘प्यार’ नहीं है. प्यार और रिश्तों में संवाद जरूरी है, जो वो व्यक्ति नहीं कर रहा है.
  • डिजिटल डिटॉक्स: कुछ समय के लिए सोशल मीडिया से दूरी बनाएं ताकि आप उन लोगों पर ध्यान दे सकें जो वास्तव में आपकी जिंदगी में मौजूद हैं.
  • सवालों का जवाब ढूंढना बंद करें: आप कभी नहीं जान पाएंगे कि उनके दिमाग में क्या चल रहा है. इसलिए ‘क्यों’ पूछना बंद करें और आगे बढ़ें.

याद रखें, रिश्ते स्पष्ट होने चाहिए, उलझे हुए नहीं. अगर कोई आपकी जिंदगी में सक्रिय रूप से शामिल नहीं है, तो उसे आपकी ‘डिजिटल लाइफ’ का हिस्सा बनने का भी हक नहीं होना चाहिए. आप किसी के लिए ‘ऑप्शन’ या ‘बैकअप’ नहीं हैं. ऑर्बिटिंग के इस लूप को तोड़ें और अपनी ऊर्जा उन लोगों पर लगाएं जो आपके साथ कदम से कदम मिलाकर चलना चाहते हैं.

About the Author

Pranaty Tiwary

मैंने लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर वूमन से अपनी ग्रेजुएशन और मिरांडा हाउस से मास्टर्स की डिग्री पूरी की है. पत्रकारिता करियर की शुरुआत दूरदर्शन(2009) से की, जिसके बाद दैनिक भास्कर सहित कई प्रमुख अख़बारों में मेनस्ट्र…

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