कौन थे प्रेम अदीब? 9 बार पर्दे पर उतारी राम की मर्यादा, महात्मा गांधी थे फैन, रणबीर कपूर और अरुण गोविल से भी तगड़ी थी फॉलोइंग

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें


आज जब निर्देशक नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायण’ में अभिनेता रणबीर कपूर भगवान राम का किरदार निभाने जा रहे हैं या जब हम 1987 के कालजयी धारावाहिक से अरुण गोविल को याद करते हैं तो इतिहास के पन्नों में एक ऐसा नाम भी दर्ज है जिसने इन सबसे बहुत पहले राम के रूप को पर्दे पर अमर कर दिया था। हम बात कर रहे हैं अभिनेता प्रेम अदीब की, जिन्होंने नौ अलग-अलग फिल्मों में भगवान राम की भूमिका निभाई। उन्होंने इस चरित्र को इतनी आत्मीयता से जीया कि दर्शक उन्हें किसी और रूप में देखने की कल्पना भी नहीं कर पाते थे।

‘भारत मिलाप’ से हुई शुरुआत और महात्मा गांधी से जुड़ा ऐतिहासिक संयोग

प्रेम अदीब की राम के रूप में इस अलौकिक यात्रा की शुरुआत साल 1942 में निर्देशक विजय भट्ट की फिल्म ‘भारत मिलाप’ से हुई थी। इस फिल्म में उनके सौम्य और शांत अभिनय ने दर्शकों के दिलों को गहराई से छुआ। फिल्म की अपार सफलता को देखते हुए विजय भट्ट ने अगले ही साल यानी 1943 में उन्हें फिर से ‘राम राज्य’ में कास्ट किया। फिल्म ‘राम राज्य’ के नाम एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज है। यह पूरे इतिहास की एकमात्र ऐसी फिल्म है जिसे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने देखा था। इसके बाद तो जैसे भक्ति और अभिनय का एक अटूट सिलसिला ही शुरू हो गया।

prem adib

Image Source : CINEMAAZIप्रेम अदीब।

9 फिल्मों में रचा इतिहास और शोभना समर्थ के साथ अमर जोड़ी

दर्शकों में प्रेम अदीब के दिव्य रूप को पर्दे पर देखने की मांग इतनी बढ़ गई कि उन्होंने एक के बाद एक कई धार्मिक फिल्मों में काम किया। उन्होंने ‘रामबाण’, ‘राम विवाह’, ‘राम नवमी’, ‘राम हनुमान युद्ध’, ‘राम लक्ष्मण’, ‘राम भक्त विभीषण’ और 1954 की ‘रामायण’ में भगवान राम का किरदार निभाया। इनमें से 1949 में आई फिल्म ‘राम विवाह’ बेहद खास थी, क्योंकि इसके निर्माता, निर्देशक और मुख्य अभिनेता खुद प्रेम अदीब ही थे। यह एक कलाकार द्वारा अपनी उस पहचान को पूरी तरह अपनाने का एक दुर्लभ उदाहरण था जिसने उसके पूरे करियर को परिभाषित किया था। 1940 के दशक से 1950 के दशक के शुरुआती सालों तक प्रेम अदीब और शोभना समर्थ की ‘राम-सीता’ के रूप में जोड़ी इतनी लोकप्रिय हुई कि उनके चित्रों को लोग कैलेंडर और धार्मिक पत्रिकाओं से निकालकर अपने घरों और मंदिरों में पूजा के लिए लगाने लगे थे।

कश्मीरी पंडित परिवार से मुंबई के सिनेमाई सफर तक

इस ऐतिहासिक सफलता से पहले प्रेम अदीब का व्यक्तिगत सफर बेहद साधारण लेकिन संकल्प से भरा था। उनका जन्म 1917 में एक कश्मीरी पंडित परिवार में हुआ था और उनका वास्तविक नाम शिव प्रसाद अदीब था। ‘अदीब’ शीर्षक उनके दादाजी को अवध के अंतिम नवाब वाजिद अली शाह से मिला था, जिसका अर्थ होता है ‘सांस्कृतिक रूप से सुसंस्कृत व्यक्ति’। बचपन से ही शिव प्रसाद को सिनेमा का गहरा जुनून था। कॉलेज के दिनों में यह जुनून इतना बढ़ गया कि वे बिना अपने परिवार को बताए अब मुंबई चले आए। 1936 में निर्देशक मोहन सिन्हा ने उन्हें फिल्म ‘रोमांटिक इंडिया’ में पहला ब्रेक दिया और उनका फिल्मी नाम रखकर प्रेम अदीब कर दिया। इसके बाद उन्होंने कई समकालीन और आधुनिक किरदार भी निभाए, लेकिन जब वे राम के रूप में पर्दे पर आते तो अपनी पुरानी छवि को पूरी तरह मिटाकर उस गरिमा और संयम में ढल जाते थे।

\

महज 42 वर्ष की उम्र में दुखद अंत

हर कहानी का अंत सुखद नहीं होता। 25 दिसंबर 1959 को केवल 42 वर्ष की आयु में ब्रेन हैमरेज के कारण प्रेम अदीब का असमय निधन हो गया। सिनेमा जगत ने एक ऐसा सितारा खो दिया जिसने आधुनिक पब्लिसिटी और प्रचार-प्रसार के साधनों के बिना करोड़ों लोगों के दिलों में भक्ति का भाव जगाया था। आज जब भारतीय सिनेमा एक बार फिर बड़े बजट, भव्य सेट्स और नई तकनीकों के साथ पौराणिक महागाथाओं को दोहराने जा रहा है, जहां दिवाली 2026 और 2027 में ‘रामायण’ दो भागों में रिलीज होने वाली है, वहीं एसएस राजामौली की महत्वाकांक्षी फिल्म ‘वाराणसी’ (2027) भी पौराणिक तत्वों को नए अंदाज में पेश करने की तैयारी में है, ऐसे समय में प्रेम अदीब को याद करना बेहद प्रासंगिक हो जाता है। आधुनिक चकाचौंध के इस दौर में भी 9 बार भगवान राम का किरदार निभाकर जो गरिमा उन्होंने स्थापित की थी, उसकी मिसाल आज भी बेजोड़ है।

ये भी पढ़ें: ‘चक दे! इंडिया’ की गुंजन लखानी याद है? एक्टिंग छोड़ चुनी अलग दुनिया, सिंगल मदर का नया अवतार देख खा जाएंगे धोखा

Latest Bollywood News





Source link

admin_97d7b6
Author: admin_97d7b6

Leave a Comment

और पढ़ें