कैसे बनेंगे प्लास्टिक के नोट और क्या होंगे इसके फायदे? नकली नोटों पर कैसे लगेगी लगाम? जानिए सबकुछ

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भारत में जल्द ही फटे-पुराने और भीगे हुए करेंसी नोटों की समस्या से मुक्ति मिलने वाली है। केंद्र सरकार ने 10 और 20 रुपये के 100-100 करोड़ पॉलीमर (प्लास्टिक) बैंक नोटों को फील्ड ट्रायल के लिए जारी करने की मंजूरी दे दी है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब के जरिए इस बड़े कदम की जानकारी साझा की।

कैसे बनेंगे ये खास पॉलीमर नोट?

कागजी नोटों की छपाई में कपास और विशेष पेपर का उपयोग होता है, जबकि प्लास्टिक नोटों को एक विशेष सिंथेटिक सामग्री से तैयार किया जाता है।भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जिस पॉलीमर का उपयोग करने जा रहा है, उसे तकनीकी भाषा में बायएक्सियली ओरिएंटेड पॉलीप्रोपाइलीन (BOPP) कहा जाता है। यह लगभग 90 माइक्रोन की मजबूत और पारदर्शी प्लास्टिक शीट होती है। इसी शीट के ऊपर नोट का अट्रैक्टिव डिजाइन, सीरियल नंबर और अत्याधुनिक सुरक्षा फीचर्स प्रिंट किए जाते हैं।

पॉलीमर नोटों के 3 बड़े फायदे

  1. 30 साल तक सुरक्षित और लंबी उम्र: ₹10 और ₹20 के सामान्य कागजी नोट हाथों-हाथ घूमने, जेब में मुड़ने या पसीने से 1-2 साल में ही गल या फट जाते हैं। इसके विपरीत पॉलीमर नोट बेहद मजबूत होते हैं और लगभग 30 साल तक पूरी तरह सुरक्षित रह सकते हैं।
  2. बार-बार छपाई का खर्च बचेगा: नोटों की उम्र लंबी होने के कारण रिजर्व बैंक को बार-बार नए नोट छापने और पुराने कटे-फटे नोटों को नष्ट करने में होने वाले अरबों रुपये के खर्च की बचत होगी।
  3. पानी और गंदगी का असर नहीं: ये नोट पानी, बारिश या चाय-कॉफी गिरने पर भी खराब नहीं होते। प्लास्टिक की सतह होने से इन पर धूल या गंदगी नहीं चिपकती और इन्हें आसानी से पोंछकर साफ किया जा सकता है।

नकली नोटों पर कैसे लगेगी लगाम?

प्लास्टिक नोटों के आने से जाली नोटों (फेक करेंसी) के कारोबार पर पूरी तरह ब्रेक लग जाएगा। इन नोटों में एक पारदर्शी ‘खिड़की’ यानी विंडो सुरक्षा फीचर के तौर पर शामिल होती है। किसी भी साधारण प्रिंटर या स्कैनर से इस पारदर्शी फीचर और जटिल पॉलीमर डिजाइन की नकल करना लगभग नामुमकिन होता है।

दुनिया के कई देशों में पहले से है चलन

  • ऑस्ट्रेलिया: 1988 में सबसे पहले $10 का स्मारक पॉलीमर नोट जारी कर इसकी शुरुआत की थी।
  • ब्रिटेन व कनाडा: ब्रिटेन ने 2016 से अपने सभी नोट प्लास्टिक पॉलीमर में बदल दिए हैं, वहीं कनाडा में 2011 से यह व्यवस्था लागू है।
  • न्यूजीलैंड व रोमानिया: न्यूजीलैंड अपनी पूरी करेंसी पॉलीमर में ढाल चुका है, जबकि रोमानिया 1999 में प्लास्टिक नोट छापने वाला यूरोप का पहला देश बना था।

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Author: Kaushal kumar

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