आजकल, इंसुलिन रेजिस्टेंस तेजी से बढ़ती एक मेटाबॉलिक समस्या है। इसकी वजह से खून में ग्लूकोज और इंसुलिन का स्तर बढ़ने लगता है, जो आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज का कारण बन सकता है। शुरुआत में इसके लक्षण अक्सर सामान्य नजर आते हैं। लेकिन इन संकेतों पर ध्यान देकर इंसुलिन रेजिस्टेंस को कंट्रोल कर सकते हैं। डबल बोर्ड-सर्टिफाइड एनेस्थिसियोलॉजिस्ट और इंटरवेंशनल पेन मेडिसिन फिजिशियन, डॉक्टर कुणाल सूद ने इंसुलिन रेजिस्टेंस के ऐसे ही लक्षण बताए हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ने पर शरीर में दिखते हैं ये बदलाव
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पेट की चर्बी बढ़ना: इंसुलिन का लेवल ज़्यादा होने से शरीर में फैट जमा होता है, खासकर पेट के आस-पास। एक्स्ट्रा इंसुलिन पेट के निचले हिस्से में ज़्यादा एनर्जी जमा करने का संकेत देता है। समय के साथ, इस वजह से सूजन बढ़ती है और टाइप 2 डायबिटीज़ और दिल की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।
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त्वचा की सिलवटों का काला पड़ना: इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण खून में इंसुलिन का लेवल बढ़ जाता है। ज़्यादा इंसुलिन त्वचा की कोशिकाओं में ग्रोथ फैक्टर रिसेप्टर्स से जुड़ता है, जिससे तेज़ी से ग्रोथ होती है। इस वजह से गर्दन, बगल या जांघों के बीच त्वचा पर मोटे, मखमली पैच बन जाते हैं।
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खाना खाने के बाद थकान: अगर आपको खाना खाने के बाद बहुत ज़्यादा थकान जैसा महसूस होता है तो हो सकता है कि इंसुलिन-रेसिस्टेंट बढ़ा हुआ हो। दरअसल, जब कोशिकाओं को एनर्जी नहीं मिलती तो इस वजह से सुस्त महसूस कर सकते हैं। इंसुलिन के अचानक बढ़ने से ब्लड शुगर में तेज़ी से गिरावट आ सकती है, जिससे अचानक एनर्जी कम होना, चिड़चिड़ापन और थकान महसूस हो सकती है।
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कार्ब्स या चीनी की क्रेविंग: इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण अक्सर ब्लड शुगर का लेवल अस्थिर रहता है। खाना खाने के बाद, इंसुलिन के अचानक बढ़ने से ब्लड शुगर गिर सकता है, जिससे एनर्जी बैलेंस को ठीक करने के लिए और ज़्यादा चीनी या स्टार्च खाने की इच्छा बढ़ जाती है।
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स्किन टैग: अगर आपकी स्किन में छोटे छोटे स्किन टैग बढ़ गए हैं तो यह भी इंसुलिन रेजिस्टेंस का एक मुख्य कारण है। लंबे समय तक इंसुलिन का लेवल ज़्यादा रहने से यह ग्रोथ फैक्टर की तरह काम करता है और त्वचा में कोशिकाओं की वृद्धि को बढ़ाता है। ऐसा बढ़े हुए IGF-1 और कम IGF-बाइंडिंग प्रोटीन के कारण होता है।
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ज़्यादा प्यास लगना: जब ब्लड शुगर ज़्यादा रहता है, तो किडनी ज़्यादा पेशाब बनाकर एक्स्ट्रा शुगर को बाहर निकालने की कोशिश करती है। इससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है। इस प्रक्रिया में शरीर के टिशूज़ से पानी भी खिंच जाता है।
Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है)








