अयोध्या में सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर एकता को लेकर संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि गुलामी के समय भारत के पास सिर्फ एकजुटता की कमी थी। सीएम योगी ने इस दौरान विपक्ष पर भी जमकर निशाना साधा। सीएम योगी ने कहा कि गुलामी से पहले भारत के पास बल, बुद्धि, वैभव सब था, कमी थी तो एकता की कमी थी, एक साथ चलने की कमी थी। उन्होंने कहा, “हम बंटे थे, इसलिये कटे थे।” उन्होंने कहा कि एकता ही सबसे बड़ी ताकत है। इससे पहले सीएम योगी ने लखनऊ में भी एक कार्यक्रम के दौरान लोगों से एकजुटता की अपील की थी।
‘लोगों में एकता की कमी थी’
दरअसल, अयोध्या में सभा को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा, “1526 में आज से 500 वर्ष पहले आज का जो संभल है, इस संभल में श्री हरिहर मंदिर को तोड़ करके वहां पर एक गुलामी का ढांचा खड़ा कर दिया गया। अगर 1526 में एक जुट हुए होते तो कदाचित 1528 अयोध्या में दोहराने का दुस्साहस कोई नहीं करता। यानी मात्र दो वर्ष के बाद अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि पर प्रभु श्री राम के मंदिर को क्षतिग्रस्त करके सनातन धर्मावलंबियों को अपमानित करते हुए एक गुलामी का ढांचा खड़ा किया गया। ऐसा नहीं है कि सनातनियों के पास बल, बुद्धि या वैभव की कमी रही हो। वह सब कुछ था। कमी थी तो एकता की कमी थी। एक दिशा में एक स्वर में एक साथ चलने की कमी थी। हम बटे थे और इसीलिए तो कटे थे। बार बार वही प्रश्न खड़ा होता है। आज 14 अगस्त है। 14 अगस्त 1947 को आजादी के एक दिन पहले तब केवल हिंदू और सिख ही नहीं कटा था, तब भारत भी कटा था।”
’14 अगस्त 1974 की घटना के लिए कौन जिम्मेदार?’
सीएम योगी ने आगे कहा, “आज भी जब पाकिस्तान और बांग्लादेश के अंदर निर्दोष हिंदू मारे जाते हैं, काटे जाते हैं, और ये हर व्यक्ति जानता है कि मरने वाला जो हिंदू है, ये सभी दलित समुदाय से हैं। एक भी जुबान भारत के अंदर उन राजनीतिज्ञों के मुंह से नहीं निकलती है जो भारत के अंदर एक होने वाली किसी घटना में हाय तौबा एक करके पूरे देश के अंदर घूमते हैं। पाकिस्तान हो या बांग्लादेश इनके मुंह से एक शब्द नहीं निकलता। वहां की घटना पर कोई शब्द नहीं निकलते। वे मौन होते हैं। 14 अगस्त 1947 की घटना के लिए किसकी जवाबदेही थी? कौन जिम्मेदार था उसके लिए? कोई जवाबदेही लेने को तैयार नहीं। क्योंकि उनको सत्ता चाहिए थी। उनको देश की प्रजा से देश की उस समय के भारत की अन्य बहुसंख्यक प्रजा से कोई लेना-देना नहीं था। एन केन प्रकारेण सत्ता चाहिए। और याद करिए आज भी वही स्थिति है। नाम बदले होंगे, चेहरे बदले होंगे। कार्य पद्धति वही है, जो 15वीं सदी में देखने को मिल रही थी।”
‘संभल और अयोध्या आज बदल चुके हैं’
सीएम योगी ने कहा, “हम आपसी झगड़े, जाति-जाति के झगड़े में फंसे हैं। झगड़े में कैसे हमारे तीर्थों पर कब्जे हो गए? कैसे उनका वहां का धार्मिक स्वरूप बदल दिया गया? आज संभल फिर से बदल चुका है। अब वहां दंगा नहीं होता है। अब वहां शांति है, सौहार्द है। अयोध्या में भी वीरान जैसी स्थिति होती थी। अयोध्या बिजली के लिए तरसता था। अयोध्या को कैसे लोगों ने संकरी गलियों और गंदगी का एक पर्याय बनाकर के रखवा दिया था। यहां के घाटों पर सरयू का जल सड़ता रहता था, काई जमी रहती थी। श्रद्धालु आता था, दोनों आंखें बंद करता था, नाक को बंद करता था, डुबकी लगा करके किसी प्रकार से बाहर निकल पड़ता था। आज का बदला हुआ अयोध्या एक बार फिर से हमें त्रेता युग का स्मरण कराता है। अब लगता है अयोध्या अयोध्या है।”
‘कालनेमियों को पहचानना होगा’
सीएम योगी ने कहा, “आज वे राम-राम जपते हुए कालनेमी के रूप में फिर बहकाने का प्रयास कर रहे हैं। हमें इन कालनेमियों को पहचानना होगा। वे आज अपने आप को राम भक्त घोषित करके लोगों के चेहरों पर, राम भक्तों के चेहरे पर धूल झोंकने का कुत्सित प्रयास भी कर रहे हैं। हमें संभलना होगा इन लोगों से और उतनी ही सतर्कता बरतनी पड़ेगी। मुझे याद है समाजवादी पार्टी के नेता ने कहा था कि सपा की सरकार आएगी तो सपा कंस की मूर्ति लगाएगी। तो हमने कहा अभी कंस की सोच ही उनकी है तो उनसे इससे ज्यादा उम्मीद क्या कर सकते हैं। श्री वृंदावन बिहारी की कृपा कि उसके बाद उन्होंने उनको हमेशा के लिए ही विदा कर दिया।”
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