नामी कॉलेजों में एडमिशन के नाम पर देशभर में ठगी का खेल, पुणे के दो फर्जी कॉल सेंटर पर छापा, 10 इंजीनियर गिरफ्तार

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मुंबई की पवई पुलिस ने सोशल मीडिया के जरिए देश के नामी इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने पुणे में चल रहे दो फर्जी कॉल सेंटर पर छापेमारी कर 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। खास बात यह है कि गिरफ्तार सभी आरोपी इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से हैं, जबकि इनमें पांच आरोपी B.Tech इंजीनियर हैं। पुलिस ने आरोपियों के पास से करीब 1 करोड़ 35 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की है।

कैसे की जाती थी ठगी?

पुलिस के मुताबिक, आरोपी Instagram, Facebook और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एडमिशन से जुड़े विज्ञापन जारी करते थे। इसके जरिए इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन की तलाश कर रहे छात्रों और उनके अभिभावकों का डेटा और मोबाइल नंबर हासिल किए जाते थे। इसके बाद आरोपी फर्जी नाम और फर्जी पहचान के जरिए उनसे संपर्क करते थे और देश के अलग-अलग प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन दिलाने का भरोसा देते थे। आरोपी खास तौर पर मैनेजमेंट कोटा और NRI कोटा में एडमिशन दिलाने का दावा करते थे। दिल्ली, हैदराबाद और देश के दूसरे शहरों के नामी इंजीनियरिंग कॉलेजों का नाम लेकर छात्रों और उनके परिवारों को भरोसे में लिया जाता था। PICT, NSUT, DTU और कई अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े दस्तावेज भी पुलिस ने बरामद किए हैं।

अभिभावकों को भरोसा दिलाकर स्कैम

इस गिरोह की ठगी का तरीका बेहद सुनियोजित था। पहले प्रोसेसिंग फीस के नाम पर रकम ली जाती थी और फिर एडमिशन की प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों के नाम पर लगातार पैसे मांगे जाते थे। कुछ मामलों में आरोपियों ने छात्रों और उनके परिवारों को कॉलेज कैंपस तक ले जाकर भरोसा कायम किया। वे अभिभावकों से कॉलेज की कैंटीन में बैठने को कहते थे और खुद कॉलेज प्रशासन के अधिकारियों से मीटिंग करने के बहाने अंदर चले जाते थे। इस तरह पीड़ितों को यह विश्वास दिलाया जाता था कि कॉलेज में उनकी सीधी पहुंच है।

IIIT हैदराबाद में एडमिशन के नाम पर 16.50 लाख की ठगी

पवई इलाके की एक महिला से उसके बेटे को IIIT हैदराबाद में एडमिशन दिलाने के नाम पर करीब 16.50 लाख रुपये की ठगी की गई। पुलिस के मुताबिक इस मामले में पीड़ित से एक साथ पूरी रकम नहीं ली गई, बल्कि एडमिशन की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ अलग-अलग चरणों में पैसे लिए गए। पीड़ित से आखिरी भुगतान जुलाई के अंत में कराया गया था। पुलिस को शक है कि इस साल मार्च के पहले सप्ताह से जुलाई के अंत तक गिरोह ने बड़ी संख्या में छात्रों और अभिभावकों को निशाना बनाया। शुरुआती जांच में करीब 30 से 35 लोगों के साथ ठगी किए जाने का संदेह है। पुलिस को एक सूची भी मिली है, जिसमें पीड़ितों के मोबाइल नंबर बताए जा रहे हैं। फिलहाल इन नंबरों और आरोपियों के बैंक खातों का विश्लेषण किया जा रहा है। ठगी की कुल रकम का सही आंकड़ा जांच पूरी होने के बाद सामने आएगा।

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Image Source : REPORTERठगों से बरामद हुई सामाग्री।

ऑपरेशन बंद कर के फरार हो जाते थे आरोपी

महाराष्ट्र के पुणे से पकड़ा गया ये गिरोह हर साल अलग-अलग जगहों पर फर्जी कॉल सेंटर शुरू करता था और नए मोबाइल नंबरों तथा सिम कार्ड का इस्तेमाल करता था। एडमिशन प्रक्रिया शुरू होने से लेकर अंतिम रकम हासिल करने तक कॉल सेंटर सक्रिय रहता था। जैसे ही एडमिशन प्रक्रिया खत्म होने लगती या कॉलेजों की अंतिम सूची जारी होने वाली होती, आरोपी अपना ऑपरेशन बंद कर मोबाइल फोन और सिम कार्ड स्विच ऑफ कर देते और फरार हो जाते थे। इसके बाद अगले एडमिशन सीजन में अलग जगह से नया सेटअप शुरू किया जाता था। पुलिस की तकनीकी जांच में आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों को ट्रैक किया गया। करीब एक महीने तक तकनीकी निगरानी के साथ ह्यूमन इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया गया। मामले को सुलझाने के लिए पुलिस ने डिकॉय कस्टमर बनकर भी आरोपियों से संपर्क किया और इसी ऑपरेशन के जरिए गिरोह तक पहुंचने में सफलता मिली।

आरोपियों के पास से क्या-क्या बरामद हुआ?

14 अगस्त को पवई पुलिस की टीम ने पुणे के Neon Homes, वडगांव शेरी-लोहगांव इलाके में छापेमारी की। इसके बाद City Vista, खराड़ी स्थित दूसरे कॉल सेंटर पर भी कार्रवाई की गई। दोनों जगहों से कुल 22 मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड डिस्क, JioBook, डेबिट कार्ड, 23 सिम कार्ड और कॉलेजों से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए। आरोपियों की तलाशी में भी मोबाइल फोन मिले। पुलिस ने दो कॉल सेंटर से जुड़े वाहनों को भी जब्त किया है। इनमें BMW, Jaguar और Ciaz जैसी गाड़ियां शामिल बताई गई हैं। कुल जब्त संपत्ति की कीमत करीब 1 करोड़ 35 लाख रुपये आंकी गई है। पुलिस के मुताबिक ठगी की रकम को अलग-अलग तरीकों से निकाला जाता था। आरोपी नकद रकम लेते थे, ATM और POS मशीनों के जरिए पैसे निकालते थे और जांच में क्रिप्टोकरेंसी में रकम लगाने की बात भी सामने आई है।

इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से हैं सभी आरोपी

पुलिस के मुताबिक यह नेटवर्क कम से कम वर्ष 2024 से सक्रिय था। जांच में अब तक मुंबई, नागपुर, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और गुजरात समेत अलग-अलग राज्यों में दर्ज छह मामलों से इस गिरोह का कनेक्शन सामने आया है। हालांकि पुलिस को आशंका है कि देश के दूसरे हिस्सों में भी इसी तरह की ठगी के मामले हो सकते हैं। गिरफ्तार सभी 10 आरोपी इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से हैं। इनमें पांच B.Tech इंजीनियर हैं, जबकि बाकी आरोपी भी इंजीनियरिंग से जुड़े बताए जा रहे हैं। गिरोह का मुख्य आरोपी करीब 35 साल का बताया जा रहा है।

सामने आई जानकारी के अनुसार, मुख्य आरोपी सोनू कुमार (35 साल) समेत शुभम शर्मा, तुषार सैनी, सात्विक सिंह, दीपेंद्र प्रजापति, सौरभ सिंह, किशोर शर्मा, प्रांजल सिंह, देवेंद्र सिंह और सौरभ कुमार को गिरफ्तार किया गया है। अन्य आरोपियों की उम्र 23 से 30 वर्ष के बीच है। इनमें चार आरोपी बिहार, चार उत्तर प्रदेश, एक हरियाणा और एक झारखंड का रहने वाला है।

अभी और छापेमारी की जा सकती है

पुलिस अब यह जांच कर रही है कि फर्जी सिम कार्ड और बैंक खाते उपलब्ध कराने में कौन-कौन लोग शामिल थे? सोशल मीडिया पर विज्ञापन किसके जरिए चलाए जाते थे? देशभर में कितने छात्र और अभिभावक इनके शिकार बने और क्या किसी कॉलेज या उसके प्रशासन से जुड़े व्यक्ति की इस पूरे नेटवर्क में कोई भूमिका थी? पुलिस को कुछ और संभावित ठिकानों की जानकारी मिली है और आने वाले दिनों में वहां भी छापेमारी की जा सकती है। गिरफ्तार 10 आरोपियों को 15 अगस्त को कोर्ट में पेश किया गया था, जहां से उन्हें 20 अगस्त तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है। पवई पुलिस अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

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