ईरान युद्ध का नहीं दिख रहा अंत! अमेरिका के रुख से कच्चे तेल में उछाल, ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर के पार

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मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर एक बार फिर कच्चे तेल की कीमतों पर साफ दिखाई देने लगा है। ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष खत्म होने की उम्मीद कमजोर पड़ने के बाद मंगलवार को तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। बाजार में इस बात की चिंता बढ़ गई है कि अगर युद्ध और लंबा चला तो मिडिल ईस्ट से होने वाली तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इसी आशंका के चलते ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी मजबूत हुआ।

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। दोनों देशों के बीच युद्ध को खत्म करने के लिए किसी समझौते की उम्मीद कमजोर होती जा रही है। अमेरिका ने सीजफायर को आगे बढ़ाने के संकेत नहीं दिए हैं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वॉशिंगटन ईरान के मामले में जल्दबाजी नहीं कर रहा है और लंबे समय तक चलने वाले समाधान पर ध्यान दे रहा है। इससे बाजार में यह डर बढ़ गया है कि संघर्ष जल्द खत्म नहीं होगा।

ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर के पार

मंगलवार को ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 27 सेंट यानी 0.3% बढ़कर 91.14 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में भी ब्रेंट ने 30 जुलाई के बाद का अपना सबसे ऊंचा स्तर छुआ था। इसी तरह अमेरिकी WTI क्रूड 42 सेंट बढ़कर 85.04 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान WTI 85.37 डॉलर तक भी गया, जो 31 जुलाई के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर बढ़ी चिंता

तेल बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों का परिवहन होता है। ईरान और ओमान के बीच इस जलमार्ग के प्रबंधन को लेकर बातचीत चल रही है, लेकिन अमेरिका इन बातचीत में शामिल नहीं है। हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर हमलों की खबरों ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है।

आगे 95 डॉलर तक जा सकता है तेल?

माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और बढ़ सकता है। अगर तनाव और बढ़ता है या ईरान पर नए प्रतिबंधों से सप्लाई में बड़ा व्यवधान आता है, तो ब्रेंट क्रूड 95 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है।

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Author: Kaushal kumar

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