इंदौर में सड़क फाड़कर निकला पानी, डर कर पीछे हट गए राहगीर; टेस्टिंग में ही फेल हुई 40 करोड़ की सड़क

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें


इंदौर स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत करीब 40 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की गई आदर्श सड़क की गुणवत्ता पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बड़ा गणपति से कृष्णपुरा छत्री तक बनाई गई इस सड़क पर पानी की पाइपलाइन की टेस्टिंग के दौरान गोराकुंड चौराहे पर सड़क का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। घटना का लाइव सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया है, जिसमें सड़क फूटकर पानी का तेज बहाव बाहर आता दिखाई दे रहा है। इस घटना के बाद करोड़ों रुपए की लागत से हुए निर्माण कार्य की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

प्रेशर टेस्टिंग में धंस गई सड़क

दरअसल, इंदौर में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बड़ा गणपति से कृष्णपुरा छत्री तक सड़क का निर्माण आधुनिक तकनीक और बेहतर सुविधाओं के साथ किया गया था। सड़क के नीचे पानी, सीवर और अन्य यूटिलिटी लाइनों का नेटवर्क भी तैयार किया गया। लेकिन सोमवार सुबह जब पानी की पाइपलाइन की प्रेशर टेस्टिंग की जा रही थी, तभी अचानक दबाव बढ़ने पर पाइपलाइन के आसपास का हिस्सा धंस गया और देखते ही देखते सड़क के नीचे से तेज गति से पानी बाहर निकलने लगा। अचानक हुई इस घटना से वहां से गुजर रहे वाहन चालक और राहगीर घबरा गए।

निर्माण कार्य पर उठे सवाल

इस पूरे मामले में नगर निगम की एमआईसी सदस्य एवं जानकारी समिति प्रभारी राजेंद्र राठौड़ ने स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत किए गए विकास कार्यों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि लगभग एक हजार करोड़ रुपये की लागत से हुए स्मार्ट सिटी के अधिकांश कार्य शुरू से ही गुणवत्ता को लेकर विवादों में रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने पहले भी कई बार तत्कालीन महापौर और नगर निगम आयुक्त को निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर अवगत कराया था, लेकिन कार्रवाई केवल नोटिस जारी करने तक सीमित रही। 

जांच की उठाई मांग

उनका आरोप है कि जिन अधिकारियों के कार्यकाल में यह निर्माण हुआ, वे बाद में स्थानांतरण लेकर इंदौर से चले गए और अब उसकी कीमत शहर की जनता चुका रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जिस सड़क पर चार वर्ष पहले करोड़ों रुपए खर्च किए गए थे, उस पर नगर निगम को बार-बार डामरीकरण करना पड़ रहा है, जो निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़ा करता है। राठौड़ ने पूरे मामले में भ्रष्टाचार की आशंका जताते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को पत्र लिखकर निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। (इनपुट- भरत पाटिल)

यह भी पढ़ें-

सीजेरियन के बाद पेट में रह गए दस्ताने और कागज के रुमाल, जिंदगी और मौत से जूझ रही महिला





Source link

Leave a Comment

और पढ़ें