मुंबई के एक कर्मचारी ने रेडिट पर अपना दैनिक सफर साझा करते हुए बताया कि वे रोजाना करीब छह घंटे यात्रा में बिताते हैं। बदलापुर से गोरेगांव ऑफिस जाने वाले इस कर्मचारी की मासिक सैलरी सिर्फ ₹35,000 है। उन्होंने लिखा, “सोचिए, हर दिन 6 घंटे यात्रा में बिताना कितना मुश्किल होता है। मैं घर सिर्फ रात को सोने के लिए आता हूं।” उनकी रेडिट पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। कर्मचारी ने अपने व्यस्त कार्यक्रम का विस्तार से वर्णन किया, जिसमें सोने के अलावा किसी और चीज़ के लिए बहुत कम समय बचता है।
रेडिट पर शेयर की गई पोस्ट
इस पोस्ट को रेडिट पर r/mumbai हैंडल से शेयर किया गया है। इस पोस्ट में कर्मचारी ने अपनी दिनचर्या का विस्तार से जिक्र किया। वे सुबह 5 बजे उठते हैं, करीब 6:30 बजे घर से निकलते हैं और बदलापुर स्टेशन से 7:15 बजे लोकल ट्रेन पकड़ते हैं। दादर पहुंचकर वेस्टर्न लाइन की ट्रेन लेते हैं, गोरेगांव स्टेशन पहुंचते हैं और वहां से शेयर रिक्शा की कतार में 30 मिनट खड़े रहते हैं। ऑफिस पहुंचने का समय करीब 10 बजे होता है। शाम को 7 बजे ऑफिस छोड़ते हैं और बदलापुर घर रात 11 बजे पहुंचते हैं। सिर्फ रविवार को छुट्टी होती है।’ ऑफिस के पास शिफ्ट करने के सुझाव पर उन्होंने जवाब दिया कि उन्होंने पीजी ढूंढने की कोशिश की, लेकिन ज्यादातर महंगे हैं और सस्ते वाले बहुत गंदे। अपनी मासिक तनख्वाह केवल 35,000 रुपये बताते हुए वे बोले कि इसलिए मैं वहां किराए पर जगह नहीं ले सकता। उन्होंने साफ कहा। उनके फील्ड में अवसर कम होने की वजह से नौकरी बदलना भी आसान नहीं है। उस व्यक्ति ने आगे कहा, ‘सोचिए, हर दिन 6 घंटे यात्रा में बिताने पड़ते हैं। मैं रात को सिर्फ सोने के लिए घर आता हूं।’

Image Source : REDDIT/@R/MUMBAI रेडिट पर शेयर की गई पोस्ट।
यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं
रेडिट यूजर्स ने कई सुझाव दिए। कुछ ने पास में सस्ता किराया ढूंढने, नौकरी बदलने या रिमोट वर्क के विकल्प तलाशने की सलाह दी। कई ने सहानुभूति जताई और कहा कि इतनी सैलरी में इतना लंबा सफर असहनीय है। कुछ ने मुंबई की हाउसिंग क्राइसिस और पब्लिक ट्रांसपोर्ट की कमी पर बात की। एक यूजर ने लिखा कि, ‘बस एक विचार है, हॉस्टल या डॉर्म की तलाश करें, सस्ते वाले जैसे 500-700 रुपये प्रति रात वाले। आप उन्हें सप्ताह में दो बार, महीने में 10 बार बुक कर सकते हैं, यानी 25 दिनों में से लगभग 14 दिनों के लिए आप बदलापुर की यात्रा कर सकते हैं। कम किराए में अधिक संतुलित दिनचर्या मिलेगी।’
दूसरे यूजर ने लिखा कि, ‘भाई, यह यात्रा नहीं है। यह तो सरासर टॉर्चर है।’
तीसरे यूजर ने लिखा कि, ‘मैंने 15 साल पहले इसी मार्ग पर यात्रा की थी। फिर मैं डोंबिवली चला गया और कुछ समय बाद नौकरी बदल ली। यदि संभव हो, तो पश्चिमी मार्ग पर सबसे सस्ते पीजी (ग्रामीण आवास) ढूंढें।’
चौथे यूजर ने लिखा कि, ‘आप नौकरी क्यों नहीं बदलते? ये तो जीने का बहुत बुरा तरीका है। ऑफिस से कुछ छुट्टियां लेकर इंटरव्यू की तैयारी कीजिए।’ उस पर शख्स ने जवाब दिया कि उनके क्षेत्र में अवसर बहुत कम हैं।
गौरतलब है कि, इससे पहले एक यूजर ने शाम 7 बजे के बाद ऑफिस में अकेले रुकने करे थेरेपी जैसा बताया था।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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