क्या निशाने पर लगी राहुल गांधी की ‘पैलेट गन’? Coffee Par Kurukshetra में देखें पूरी चर्चा

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इंडिया टीवी के कार्यक्रम ‘कॉफी पर कुरुक्षेत्र’ में राहुल गांधी के द्वारा दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में धरने पर चर्चा की गई। राहुल गांधी के करीब साढ़े छह घंटे लंबे धरने के बाद पैलेट गन से घायल होने का दावा करने वाले छात्र साहिल लोचब की शिकायत पर FIR दर्ज कर ली गई। राहुल गांधी दोपहर करीब 1 बजे कांग्रेस नेताओं के साथ थाने पहुंचे थे। उनकी मांग थी कि साहिल की शिकायत पर FIR दर्ज की जाए। राहुल गांधी ने साफ कहा था कि शिकायत दर्ज होने तक वह थाने से नहीं उठेंगे। कार्यक्रम में एंकर सौरभ शर्मा के साथ वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता और इंडिया टीवी के पॉलिटिकल एडिटर देवेंद्र पाराशर ने अपने विचार रखे।

FIR दर्ज करने में क्यों लगा इतना समय?

‘कॉफी पर कुरुक्षेत्र’ कार्यक्रम में हुई चर्चा का सबसे बड़ा सवाल यही रहा कि जब आखिरकार FIR दर्ज करनी थी तो इसमें इतना लंबा समय क्यों लगा। पैनल में मौजूद वक्ताओं ने माना कि यदि FIR पहले ही दर्ज कर ली जाती तो राहुल गांधी को करीब साढ़े छह घंटे थाने में बैठने का मौका नहीं मिलता और मामला इतना बड़ा राजनीतिक मुद्दा भी नहीं बनता।

पुलिस की ओर से यह तर्क सामने आया कि 20 जुलाई की घटना की जांच क्राइम ब्रांच कर रही है और सुप्रीम कोर्ट की ओर से भी पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाई गई है। हालांकि चर्चा में यह स्पष्ट किया गया कि किसी नागरिक की शिकायत पर FIR दर्ज करना और किसी व्यापक जांच का हिस्सा होना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। FIR के बाद जांच में आरोपों की वास्तविकता सामने आएगी।

पैलेट गन के इस्तेमाल पर हुई चर्चा

पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर भी कार्यक्रम में विस्तार से चर्चा हुई। विश्लेषकों ने कहा कि पैलेट गन का इस्तेमाल किन परिस्थितियों में हुआ, यह सबसे अहम सवाल है। चर्चा में प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों के घायल होने और भीड़ के उग्र होने का भी उल्लेख किया गया। साथ ही यह सवाल उठाया गया कि अगर पैलेट गन चली थी तो दिल्ली पुलिस को अब तक यह स्पष्ट क्यों नहीं करना चाहिए था कि उसे चलाने की जरूरत किन परिस्थितियों में पड़ी।

कार्यक्रम में यह बात भी सामने आई कि पैलेट गन दिल्ली पुलिस के बजाय आरएएफ के पास होने की बात कही जा रही है। चर्चा के दौरान संभावना जताई गई कि भीड़ में घिरे किसी आरएएफ जवान ने अपनी सुरक्षा के लिए इसका इस्तेमाल किया हो सकता है। हालांकि पैनलिस्टों ने साफ किया कि यह केवल एक संभावना है और वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही सामने आएगी।

क्या निशाने पर लगी राहुल की पैलेट गन?

चर्चा में इसके जवाब में कहा गया कि विपक्षी दल किसी मुद्दे को राजनीतिक रूप से उठाकर उसे तार्किक निष्कर्ष तक ले जाने की कोशिश करता है। कार्यक्रम में निष्कर्ष के तौर पर यह बात सामने आई कि राजनीतिक तौर पर राहुल गांधी इस मुद्दे को अपने केंद्र में लाने में सफल रहे। अब FIR के बाद असली सवाल जांच का है। इसमें पैलेट गन किसने चलाई, किन परिस्थितियों में चलाई गई और क्या उस समय उसका इस्तेमाल जरूरी था। इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे।

डिटेल में पूरी चर्चा देखने के लिए सबसे ऊपर दिये गये वीडियो पर क्लिक करें।

(डिस्क्लेमरः यह आर्टिकल कार्यक्रम में हुई चर्चा पर आधारित है और कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए गए विचार मेहमानों के निजी विचार हैं।)



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Author: Kaushal kumar

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