नीदरलैंड्स के खिलाफ 1-3 की हार ने भारतीय मेन्स हॉकी टीम को वर्ल्ड कप के किनारे पर खड़ा कर दिया है। सेमीफाइनल की उम्मीदें लगभग खत्म होने के बावजूद टीम को अर्जेंटीना के खिलाफ आखिरी ग्रुप मैच से पहले एक बड़ी राहत मिली। इंग्लैंड को अर्जेंटीना ने 3-1 से हरा दिया और इस नतीजे ने भारत के लिए अंतिम चार का दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं होने दिया। हालांकि, अब भारत की किस्मत सिर्फ उसके अपने प्रदर्शन से तय नहीं होगी। क्रेग फुल्टन की टीम को 24 अगस्त को अर्जेंटीना के खिलाफ सिर्फ जीत ही नहीं, बल्कि बड़े अंतर से जीत दर्ज करनी होगी। इसके साथ ही भारत को नीदरलैंड्स से भी एक बड़े उपकार की जरूरत होगी।
पूल-ई में भारत चौथे पायदान पर
पूल-ई की बात की जाए, तो नीदरलैंड्स दो मैचों में 6 पॉइंट लेकर शीर्ष पर है। इंग्लैंड और अर्जेंटीना के 3-3 पॉइंट हैं, जबकि भारत दोनों मैच हारकर बिना किसी पॉइंट के चौथे स्थान पर है। नीदरलैंड्स का गोल अंतर +4, इंग्लैंड का 0, अर्जेंटीना का 0 और भारत का -4 है।
भारत के सामने अर्जेंटीनो की चुनौती
भारत को अर्जेंटीना को कम से कम दो गोल के अंतर से हराना होगा। अगर भारत दो गोल से जीतता है तो गोल किए गए गोलों की संख्या के आधार पर अर्जेंटीना से आगे निकल जाएगा। दो से ज्यादा गोल की जीत की स्थिति में भारत गोल अंतर के आधार पर आगे होगा। हालांकि, अर्जेंटीना को हराना भी आसान नहीं होगा। इस साल FIH प्रो लीग में अर्जेंटीना ने भारत को 8-0 और 4-2 से हराया था। ऐसे में भारत के सामने सिर्फ जीत की चुनौती नहीं है, बल्कि कम से कम दो गोल के अंतर से जीतने की मुश्किल चुनौती भी होगी।
नीदरलैंड्स को करना होगा भारत का काम आसान
भारत की जीत के बाद भी सेमीफाइनल का टिकट पक्का नहीं होगा। उसे उम्मीद करनी होगी कि नीदरलैंड्स अपने आखिरी मैच में इंग्लैंड को बड़े अंतर से हराए। भारत के लिए सबसे आसान समीकरण यही है कि वह अर्जेंटीना को कम से कम दो गोल से हराए और नीदरलैंड्स इंग्लैंड को तीन गोल से मात दे।
भारत अगर अर्जेंटीना को 3-1 से हराता है तो उसके 6 गोल हो जाएंगे और आठ गोल उसके खिलाफ जा चुके होंगे। वहीं अगर इंग्लैंड नीदरलैंड्स से 2-0 से हारता है तो उसके पांच गोल होंगे और सात गोल उसके खिलाफ। ऐसी स्थिति में भारत अधिक गोल करने के कारण इंग्लैंड से आगे निकल जाएगा। लेकिन अगर भारत 3-1 से जीतता है और इंग्लैंड भी 3-1 से हारता है, तो दोनों टीमों के 6 गोल होंगे और गोल अंतर भी समान रहेगा। तब मामला फील्ड गोल तक जा सकता है। मौजूदा स्थिति में भारत के नाम सिर्फ एक फील्ड गोल है, जो दिलप्रीत सिंह ने इंग्लैंड के खिलाफ किया था। इंग्लैंड ने भारत के खिलाफ तीनों फील्ड गोल किए हैं। यानी भारत के लिए सबसे सीधा रास्ता यही है कि अर्जेंटीना को कम से कम दो गोल से हराओ और नीदरलैंड्स से उम्मीद करो कि वह इंग्लैंड को तीन या उससे ज्यादा गोल के अंतर से हरा दे। इससे गोल अंतर का पेचीदा समीकरण खत्म हो जाएगा और भारत सेमीफाइनल में पहुंच जाएगा।
भारत का मुकाबला इंग्लैंड से पहले
एक और दिलचस्प पहलू मैचों का समय है। भारत और अर्जेंटीना का मुकाबला सोमवार शाम 6:30 बजे से होगा, जबकि इंग्लैंड और नीदरलैंड्स का मैच रात 10:30 बजे शुरू होगा। यानी इंग्लैंड मैदान पर उतरने से पहले भारत का नतीजा जान चुका होगा। अगर भारत अर्जेंटीना को हरा देता है, तो इंग्लैंड को साफ पता होगा कि सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए उसे नीदरलैंड्स के खिलाफ क्या करना है। फिलहाल भारत की राह बेहद मुश्किल है, लेकिन उम्मीद अभी बाकी है।
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