छतरपुर की खजुराहो पुलिस ने 28 लाख के एक बड़े ऑनलाइन साइबर फ्रॉड केस को सुलझा लिया है। पुलिस ने एक ऐसे गैंग के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जो लोगों को टेलीग्राम पर नकली रेटिंग-बूस्टिंग टास्क के जरिए पैसे दोगुना करने का लालच देकर ठगते थे। पीडित मोहित चौबे के साथ 28 लाख की ठगी हुई थी, जिस पर BNS के तहत केस दर्ज किया गया था। एसपी रजत सकलेचा के निर्देशन में गठित विशेष टीम ने तकनीकी साक्ष्य और बैंक ट्रांजेक्शन की जांच की तो गोटेगांव, जिला नरसिंहपुर के गिरोह का नाम सामने आया। इसके पहले ग्वालियर में भाजपा नेता के NGO खाते से 21 करोड़ की साइबर ठगी हुई थी।
28 लाख की साइबर ठगी का खुलासा
यह गैंग इंस्टाग्राम पर विज्ञापन चलाकर लोगों को आसानी से पैसे कमाने के लिए अपने बैंक अकाउंट किराए पर देने का मौका देता था। एक बार जब उनका इन अकाउंट्स पर कंट्रोल हो जाता था तो वे धोखाधड़ी से मिले पैसे को इनमें डालते थे फिर तुरंत उन फंड्स को दूसरे अकाउंट्स में ट्रांसफर कर देते थे और आखिर में पैसे को क्रिप्टोकरेंसी में बदल देते थे ताकि उनका पता न चल सके। मोहित चौबे जैसे पीड़ितों से शुरू में टेलीग्राम पर रेटिंग बूस्ट करके पैसे कमाने के लिए संपर्क किया जाता था और बड़ी रकम ट्रांसफर करने के बाद उन्हें ठग लिया जाता था।
4 आरोपी गिरफ्तार
भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत शिकायत मिलने पर SP रजत सकलेचा ने एक स्पेशल टीम बनाई, जिसने टेक्निकल सबूतों और बैंक ट्रांज़ैक्शन पैटर्न का एनालिसिस किया। इससे जांचकर्ता नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव तक पहुंचे, जहां यह गैंग मुख्य रूप से काम कर रहा था। पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया: शुभम (उर्फ शिवम) – गरा (गोटेगांव) से नीरज पटेल – गोटेगांव से कैलाश (उर्फ केवल) – ध्वनिया गांव से और हीरालाल (उर्फ संदीप) – यह भी ध्वनिया से।
नेटवर्क का दायरा
जांचकर्ताओं को अब तक किराए पर लिए गए खातों में लगभग 80 लाख के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है और उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, तेलंगाना, तमिलनाडु, दिल्ली, बिहार और झारखंड समेत कई राज्यों से 50 शिकायतें मिली हैं। यह नेटवर्क बंगाल, उत्तराखंड और महाराष्ट्र से भी जुड़ा है, जिससे एक अंतर-राज्यीय साइबर अपराध सिंडिकेट का संकेत मिलता है।
कार्रवाई जारी
पुलिस ने आरोपियों से दो मोबाइल फोन, ATM कार्ड और 38,000 नकद जब्त किए हैं और 1.50 लाख वाले बैंक खातों को फ़्रीज कर दिया है। यह मामला बताता है कि कैसे टास्क-बेस्ड धोखाधड़ी और मनी-म्यूल नेटवर्क का इस्तेमाल नागरिकों को ठगने और क्रिप्टो कन्वर्जन के जरिए अवैध पैसे को वैध बनाने के लिए किया जा रहा है।
(स्ट्रिंगर- प्रेम गुप्ता)
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