वन नेशन-वन इलेक्शन के मुद्दे पर सोमवार को जेपीसी की महत्वपूर्ण बैठक हुआ जिसमें प्रियंका गांधी, सुप्रिया सुले समेत विपक्षी दलों के कई नेता भी मौजूद रहे। ऐसी रिपोर्ट सामने आई है कि वन नेशन-वन इलेक्शन 2029 तक भी आ सकता है। इसके अलावा देश में परिसीमन, महिला आरक्षण और नए मंत्रिमंडल पर भी चर्चा जारी है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी ताबड़तोड़ फैसले लेने वाले हैं और सभी को चौंकाने वाले हैं। इंडिया टीवी के लोकप्रिय कार्यक्रम कॉफी पर कुरुक्षेत्र में एंकर और इंडिया टीवी के सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर सौरव शर्मा ने वरिष्ठ पत्रकार अनंत विजय, वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री और इंडिया टीवी के पॉलिटिकल एडिटर देवेंद्र पाराशर के साथ इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की।
2029 में वन नेशन-वन इलेक्शन?
कार्यक्रम में चर्चा के दौरान वन नेशन-वन इलेक्शन को लेकर बताया गया कि मौजूदा प्रस्ताव के तहत देश में लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने की दिशा में 2034 का लक्ष्य है। हालांकि, यह संभावना भी चर्चा में आई कि कुछ राज्य अपने विधानसभा कार्यकाल को कम या आगे-पीछे करके 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ चुनाव करा सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक करीब 10-14 राज्यों के चुनावों को किसी हद तक 2029 के साथ जोड़े जाने की गुंजाइश बताई गई, लेकिन इसके लिए राज्यों की राजनीतिक सहमति और परिस्थितियां अहम होंगी।
चर्चा के दौरान विशेषज्ञों के पैनल ने यह भी तर्क दिया कि बीजेपी या एनडीए शासित राज्य अपने मौजूदा कार्यकाल को छोटा क्यों करेंगे। इसके पीछे चुनावी गणित अहम हो सकता है। अगर किसी समय लोकसभा और विधानसभा दोनों चुनाव साथ कराने में राजनीतिक माहौल अनुकूल दिखाई देता है, तो दोनों स्तरों पर लाभ लेने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि, विधानसभा और लोकसभा चुनावों में मतदाताओं के मतदान व्यवहार में अंतर का उदाहरण देते हुए इस रणनीति की अनिश्चितता भी बताई गई।
परिसीमन और महिला आरक्षण के मुद्दे पर चर्चा
कॉफी पर कुरुक्षेत्र कार्यक्रम में चर्चा के दौरान परिसीमन और महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी बात हुई। कार्यक्रम में दावा किया गया कि सरकार के लिए परिसीमन से जुड़ा मुद्दा प्राथमिकता में हो सकता है और यदि जरूरी संख्या का समर्थन सुनिश्चित हो जाए तो संसद का विशेष सत्र बुलाकर इसे आगे बढ़ाया जा सकता है। चर्चा में सरकार के पास लोकसभा में 366 सांसदों के समर्थन का दावा किए जाने की भी बात हुई।
कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेता जयराम रमेश द्वारा संसद के सत्रावसान में देरी को लेकर जताई गई आशंका पर भी चर्चा हुई। उनके सवालों को परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संभावित विधेयक की तैयारी से जोड़कर देखा गया। हालांकि, कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि सत्रावसान नहीं होना अपने आप में किसी विशेष विधेयक के आने का प्रमाण नहीं है। इसके अलावा कार्यक्रम में डीएमके और एनसीपी से जुड़े राजनीतिक समीकरणों पर भी चर्चा हुई। डीएमके के साथ किसी मुद्दे पर रणनीतिक सहयोग की संभावना और एनसीपी के दोनों धड़ों के संभावित एकीकरण में नेतृत्व से जुड़ी अड़चन पर बात की गई।
मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है बड़ा सरप्राइज
कार्यक्रम के आखिर में संभावित केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार को एक बड़े ‘सरप्राइज’ के तौर पर चर्चा में रखा गया। विशेषज्ञों के मुताबिक मंत्रिमंडल का विस्तार होना संभावित है, लेकिन कब और किन चेहरों को शामिल किया जाएगा, इसकी जानकारी सीमित है। संगठन स्तर पर अलग-अलग राज्यों से संभावित नाम पहले से भेजे जाने की बात भी कही गई।
ये भी पढ़ें- क्या निशाने पर लगी राहुल गांधी की ‘पैलेट गन’? Coffee Par Kurukshetra में देखें पूरी चर्चा
योगी-अखिलेश की चुनावी पिच में बड़ा फर्क, Coffee Par Kurukshetra में देखें पूरी चर्चा








