सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें तीन पुरुष बाजार में सफेद रंग की चादरों को शॉल या कंबल की तरह ओढ़कर घूमते और खरीदारी करते दिख रहे हैं। इन चादरों पर साफ-साफ नीले रंग में ‘वेस्टर्न रेलवे’ लिखा हुआ है, जिससे यह स्पष्ट है कि ये भारतीय रेलवे की एसी कोच में यात्रियों को दी जाने वाली बेडरोल चादरें हैं। वीडियो लगभग 21 सेकंड का है। इसमें तीनों युवक एक सड़क किनारे की छोटी दुकान के बाहर खड़े हैं। वे चिप्स और अन्य सामान देख रहे हैं, जबकि चादरें उनके कंधों पर लिपटी हुई हैं। रिकॉर्डिंग करने वाला व्यक्ति बैकग्राउंड में कहता सुनाई देता है कि इन लोगों ने वेस्टर्न रेलवे की चादरें चुराई हैं और अब इन्हें ओढ़कर बाजार में घूम रहे हैं।
एक्स पर शेयर किया गया वीडियो
इस वीडियो को एक्स पर @GemsOfRailway नामक हैंडल से शेयर किया गया है। ये चादरें कथित तौर पर पश्चिमी रेलवे की एक ट्रेन से चुराई गई थीं। कैप्शन में लिखा था, “बाजार में तीन आदमी भारतीय रेलवे की चादरों को शॉल की तरह ओढ़े खुलेआम घूमते हुए देखे गए।” इस पोस्ट में रेलवे डिवीजनों में संकलित आरटीआई डेटा का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि जनवरी 2022 और मई 2026 के बीच 1.27 करोड़ से अधिक बेडरोल आइटम चोरी होने की सूचना मिली थी, जिसके परिणामस्वरूप ₹ 104.51 करोड़ से अधिक का संचयी नुकसान हुआ। पोस्ट के अनुसार, रिपोर्ट किए गए नुकसान में 46.54 लाख फेस टॉवल, 41.13 लाख बेडशीट, 23.59 लाख पिलो कवर, 12.95 लाख कंबल और 2.76 लाख तकिए शामिल हैं। कैप्शन में आगे लिखा था, “रेलवे की 104 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का नुकसान हुआ है, और ऐसा लगता है कि इसका कुछ हिस्सा रोजमर्रा के कपड़ों के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।”
नॉर्दन रेलवे ने किया रिएक्ट
नॉर्दर्न रेलवे ने इस वायरल वीडियो पर प्रतिक्रिया दी। एक्स पर अपने आधिकारिक अकाउंट पर नॉर्दन रेलवे लिखा कि, ‘स्टाइल आपसे है, ट्रेन के बेडरोल से नहीं!’ और यात्रियों से अपील की कि बेडरोल का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करें तथा उतरते समय उसे अपनी जगह पर छोड़ दें। वे स्मार्ट रेल यात्री बनने की बात भी कही।
यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं
वीडियो एक्स पर शेयर करने के बाद इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर भी फैल गया। सोशल मीडिया यूजर्स की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आईं, कुछ ने कथित चोरी की आलोचना की तो कुछ ने वीडियो बनाने और पुरुषों को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करने के फैसले पर सवाल उठाए। कई यूजर्स ने इसे ‘ज़ीरो सिविक सेंस’ और ‘नैतिकता की कमी’ का उदाहरण बताया।
एक यूजर ने लिखा कि, ‘इस समस्या के लिए, हमें सिंगापुर की तरह कोड़े मारने सहित सख्त सजाओं की जरूरत है। भारतीय रेलवे इन लोगों के लिए स्वर्ग है।’
दूसरे यूजर ने लिखा कि, ‘अगर लोग बारिश में खुद को ढकने के लिए चादरें ले लेते हैं तो मुझे इसमें कोई समस्या नहीं दिखती। सरकार के पास हमारे कर के पैसे से चादरें खरीदने के लिए पर्याप्त धन है। बिना अनुमति के वीडियो बनाना बंद करो और अपनी सामग्री के लिए उन्हें ऑनलाइन परेशान करना बंद करो। तुम जैसे मूर्खों को नैतिक शिक्षा देने का कोई अधिकार नहीं है, सिर्फ इसलिए कि तुम्हें लगता है कि यह गलत है।’
तीसरे यूजर ने लिखा कि, ‘इस तरह के लोगों में सिविक सेंस बिल्कुल नहीं होता।’
चौथे ने लिखा कि, ‘ठेकेदार की भी जांच करें। क्या पता वे चादरें चुरा रहे हों और यात्रियों के नाम बता रहे हों?’
गौरतलब है कि, इससे पहले ट्रेन में गंदगी फैलाने वाली महिला का वीडियो वायरल हुआ था। इसे भी लोगों ने सिविक सेंस का अभाव बताया था।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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