How to Stay Calm: मुश्किल हालात और तनाव में भी शांत कैसे रहते हैं कुछ लोग? जानिए मनोविज्ञान का सच

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How to Stay Calm: जीवन में परेशानियाँ, तनाव और अनिश्चितता किसी को बताकर नहीं आतीं. हर किसी की जिंदगी में ऐसे मोड़ आते हैं जहाँ सब कुछ बिखरता हुआ महसूस होता है. लेकिन आपने ध्यान दिया होगा कि ऐसी स्थितियों में जहाँ कुछ लोग घबरा जाते हैं, गुस्सा करने लगते हैं या हार मान लेते हैं, वहीं कुछ लोग गहरे संकट में भी बिल्कुल शांत और स्थिर बने रहते हैं. कई बार ऐसा लगता है कि क्या इन लोगों को दर्द या तनाव महसूस ही नहीं होता? मनोवैज्ञानिक शोध बताते हैं कि यह कोई जादुई ताकत नहीं है, बल्कि मानसिक अभ्यासों, आदतों और दिमाग के काम करने के खास तरीके का नतीजा है.

How to Stay Calm: जीवन में परेशानियाँ, तनाव और अनिश्चितता किसी को बताकर नहीं आतीं. हर किसी की जिंदगी में ऐसे मोड़ आते हैं जहाँ सब कुछ बिखरता हुआ महसूस होता है. लेकिन आपने ध्यान दिया होगा कि ऐसी स्थितियों में जहाँ कुछ लोग घबरा जाते हैं, गुस्सा करने लगते हैं या हार मान लेते हैं, वहीं कुछ लोग गहरे संकट में भी बिल्कुल शांत और स्थिर बने रहते हैं. कई बार ऐसा लगता है कि क्या इन लोगों को दर्द या तनाव महसूस ही नहीं होता? मनोवैज्ञानिक शोध बताते हैं कि यह कोई जादुई ताकत नहीं है, बल्कि मानसिक अभ्यासों, आदतों और दिमाग के काम करने के खास तरीके का नतीजा है.

मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो हमारा दिमाग किसी भी खतरे या तनाव पर दो तरह से प्रतिक्रिया करता है—पहला, बिना सोचे-समझे तुरंत रीएक्ट (React) करना और दूसरा, स्थिति को समझकर सही रिस्पॉन्स (Response) देना. संकट के समय जो लोग शांत रहते हैं, वे असल में अपने दिमाग के तार्किक हिस्से का इस्तेमाल करना जानते हैं. वे परिस्थितियों के सामने घुटने टेकने के बजाय खुद को और अपनी सोच को संभालते हैं. आइए 8 आसान बिंदुओं और मनोवैज्ञानिक तथ्यों के जरिए समझते हैं कि आखिर कुछ लोग हर तूफान में भी इतने शांत कैसे बने रहते हैं.

1. अमिग्डाला हाइजैक को रोकना (Controlling the Amygdala)- हमारे दिमाग में ‘अमिग्डाला’ (Amygdala) नाम का एक छोटा सा हिस्सा होता है, जिसका काम हमें खतरों से बचाना है. जब भी कोई मुश्किल स्थिति आती है, यह दिमाग को ‘फाइट या फ्लाइट’ (लड़ो या भागो) का मैसेज भेजता है, जिससे हमें गुस्सा, डर या घबराहट महसूस होती है. शांत रहने वाले लोग इस ‘अमिग्डाला हाइजैक’ को होने से रोक लेते हैं. वे संकट आते ही तुरंत कोई फैसला या रिएक्शन नहीं देते. वे कुछ सेकंड का ब्रेक लेते हैं, जिससे उनके दिमाग का तार्किक और सोचने वाला हिस्सा—प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स (Prefrontal Cortex)—सक्रिय हो जाता है. यही 5-10 सेकंड का ठहराव उन्हें सही और शांत निर्णय लेने में मदद करता है.

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2. भावनाओं को स्वीकारना, दबाना नहीं (Emotional Regulation)- अक्सर लोगों को लगता है कि शांत रहने वाले लोग अपनी भावनाओं या दर्द को छुपाते या दबाते हैं, जबकि सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है. मनोविज्ञान के अनुसार, ऐसे लोग ‘इमोशनल रेगुलेशन’ यानी भावनाओं के प्रबंधन में माहिर होते हैं. जब संकट आता है, तो वे यह स्वीकार करते हैं कि “हाँ, स्थिति खराब है और मुझे तनाव महसूस हो रहा है.” वे अपनी घबराहट या डर को नकारते नहीं हैं, बल्कि उसे स्वीकार करके शांत दिमाग से यह सोचते हैं कि अब आगे क्या करना है. भावनाओं को स्वीकार कर लेने से दिमाग का आधा तनाव अपने आप खत्म हो जाता है.

3. इंटरनल लोकस ऑफ कंट्रोल (Internal Locus of Control)- मनोविज्ञान में एक अवधारणा है जिसे ‘लोकस ऑफ कंट्रोल’ कहा जाता है. जिन लोगों का ‘इंटरनल लोकस ऑफ कंट्रोल’ मजबूत होता है, उनका मानना होता है कि बाहरी परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, उन पर अपनी प्रतिक्रिया (Response) को वे खुद नियंत्रित कर सकते हैं. शांत रहने वाले लोग इस बात को बहुत गहराई से समझते हैं कि वे दुनिया को, दूसरों के व्यवहार को या अचानक आई मुसीबत को नहीं बदल सकते. वे अपना समय और ऊर्जा उन चीजों पर बर्बाद नहीं करते जो उनके बस में नहीं हैं. उनका पूरा ध्यान सिर्फ इस बात पर होता है कि वे खुद कैसे प्रतिक्रिया देते हैं.

4. कॉग्निटिव रिफ्रेमिंग या सोच का नजरिया (Cognitive Reframing)- विपरीत परिस्थितियों में शांत रहने वाले लोगों की एक सबसे बड़ी ताकत होती है—’कॉग्निटिव रिफ्रेमिंग’. इसका मतलब है किसी भी बुरी स्थिति को देखने का अपना नजरिया बदलना. जहाँ एक आम व्यक्ति किसी संकट को ‘तबाही’ या ‘सब खत्म हो गया’ के रूप में देखता है, वहीं मानसिक रूप से मजबूत व्यक्ति उसी समस्या को एक ‘चुनौती’ या ‘सीखने का अवसर’ मान लेता है. जैसे ही दिमाग किसी घटना को तबाही की जगह चुनौती के रूप में देखता है, शरीर में तनाव बढ़ाने वाला स्ट्रेस हार्मोन (कोर्टिसोल) कम बनने लगता है और दिमाग समस्या का समाधान खोजने में जुट जाता है.

5. माइंडफुलनेस और सांसों का विज्ञान (The Science of Breathing)- शारीरिक स्तर पर तनाव और शांति का सीधा संबंध हमारी सांसों से होता है. जब भी हम तनाव में होते हैं, हमारी सांसें तेज और उथली हो जाती हैं, जिससे दिल की धड़कन बढ़ जाती है. शांत रहने का अभ्यास करने वाले लोग अनजाने में या जानबूझकर ‘माइंडफुल ब्रीदिंग’ (सचेत सांस) का सहारा लेते हैं. गहरी और धीमी सांस लेने से हमारे शरीर का पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम (Parasympathetic Nervous System) एक्टिवेट हो जाता है. यह सिस्टम दिमाग को सीधा सिग्नल भेजता है कि “सब सुरक्षित है, घबराने की जरूरत नहीं है.” इससे शरीर तुरंत शांत होने लगता है.

6. ओवर थिंकिंग से दूरी (Avoiding Overthinking)- तनाव के समय ज्यादातर लोग आधी से ज्यादा लड़ाई अपनी कल्पनाओं में लड़ रहे होते हैं. वे सोचने लगते हैं कि “अगर ऐसा हो गया तो क्या होगा?” या “अब सब बर्बाद हो जाएगा.” शांत रहने वाले लोग इस तरह के ‘वॉरस्ट केस सिनेरियो’ (सबसे बुरे नतीजों) की बेवजह कल्पना करने से बचते हैं. वे सिर्फ वर्तमान समय और वर्तमान तथ्य (Facts) पर ध्यान केंद्रित करते हैं. वे काल्पनिक डर से डरने के बजाय इस बात पर ध्यान देते हैं कि “आज और अभी इस वक्त क्या किया जा सकता है.” वर्तमान में टिके रहने की यही आदत उन्हें शांत रखती है.

7. कठिन समय में अतीत के अनुभवों पर भरोसा (Past Resilience)- मानसिक रूप से शांत रहने वाले लोगों को अपनी क्षमताओं पर भरोसा होता है. जब भी कोई नया संकट आता है, उनका दिमाग अनजाने में ही अतीत की उन स्थितियों को याद करता है जहाँ वे पहले भी मुश्किलों से निकल चुके हैं. इस मनोवैज्ञानिक अनुभव को ‘रेजिलिएंस’ (Resilience) या मानसिक लचीलापन कहा जाता है. उन्हें यह विश्वास होता है कि “अगर मैं पिछली बार उस मुश्किल से बाहर निकल आया था, तो इस बार भी कोई न कोई रास्ता निकाल ही लूँगा.” यह आत्मविश्वास उनके अंदर बेवजह की घबराहट पैदा नहीं होने देता.

8. खुद को शांत रखने का अभ्यास कैसे करें?- शांत रहना कोई जन्मजात गुण नहीं है, इसे कोई भी व्यक्ति अपनी दैनिक जिंदगी में अभ्यास के जरिए सीख सकता है. अगर आप भी मुश्किल समय में शांत रहना चाहते हैं, तो सबसे पहले संकट आते ही 10 सेकंड के लिए रुकने और लंबी सांस लेने की आदत डालें. अपने आप से सवाल पूछें कि “क्या यह बात 5 साल बाद भी मायने रखेगी?” और “इस स्थिति में मेरे नियंत्रण में क्या है?” हर दिन थोड़ा समय ध्यान (Meditation) या योग को दें ताकि आपका दिमाग शांत रहने के लिए ट्रेंड हो सके. याद रखिए, तूफान को रोकना आपके हाथ में नहीं है, लेकिन अपनी कश्ती को संभालना पूरी तरह आपके हाथ में है.

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