70 और 80 साल के स्वस्थ यूरोपीय लोगों पर महिला ने किया रिएक्ट, भारतीय लाइफस्टाइल पर जो कहा; होने लगा वायरल

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यूरोप की यात्रा के दौरान एक भारतीय महिला ने 70 और 80 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों को अकेले घूमते, अपना सामान खुद उठाते और लंबी दूरी पैदल तय करते देखा। इस दृश्य ने उन्हें भारतीय जीवनशैली पर सवाल उठाने को मजबूर कर दिया। एक्स हैंडल से पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा कि भारतीय आहार और शारीरिक गतिविधि में ‘कुछ तो गड़बड़’ है। 

एक्स पर शेयर की पोस्ट 

इस पोस्ट को एक्स (पूर्व ट्विटर) पर @Kavitastocks नामक हैंडल से शेयर किया गया है। कविता ने एक तस्वीर के साथ वायरल पोस्ट में कहा, “ये वे ‘बूढ़े लोग’ हैं जिन्हें मैं यूरोप यात्रा के दौरान बार-बार देखती हूं। इनमें से कई 70 या 80 से ऊपर हैं, अकेले यात्रा कर रहे हैं, अपना सूटकेस खुद उठाए हुए हैं, हर जगह पैदल चल रहे हैं और बेहद फिट लग रहे हैं।” उन्होंने आगे लिखा, “यह सच में मुझे सोचने पर मजबूर करता है: भारतीय लाइफस्टाइल में हमारे आहार और शारीरिक गतिविधि को लेकर कुछ तो गड़बड़ है? 50 साल से ऊपर के लोग लंबी दूरी पैदल चलने में कठिनाई महसूस करते हैं और यात्रा के दौरान एयरपोर्ट पर व्हीलचेयर की भारी संख्या दिखती है।”  

‘फिट होने काम मतलब लंबा जीना नहीं’

उन्होंने जोर दिया कि फिट रहने का असली लक्ष्य सिर्फ लंबा जीना नहीं, बल्कि उन अतिरिक्त वर्षों का स्वतंत्र रूप से आनंद लेना है। “फिट होने का असली लक्ष्य सिर्फ लंबे समय तक जीना नहीं है। यह इतना स्वतंत्र रहना है कि उन अतिरिक्त वर्षों का आनंद ले सकें,” उन्होंने लिखा। यह पोस्ट तेजी से वायरल हो गई और सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। कई यूजर्स ने सहमति जताई। 

यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं 

कुछ ने कहा कि यूरोपीय शहरों में पैदल चलना रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है, जबकि भारत में गाड़ी या स्कूटर पर निर्भरता ज्यादा है। आहार की बात करते हुए एक यूजर ने लिखा कि यूरोपीय प्रोटीन और फाइबर युक्त भोजन ज्यादा करते हैं, जबकि कई भारतीयों का आहार कार्बोहाइड्रेट प्रधान होता है। कुछ ने शारीरिक श्रम को स्टेटस सिंबल न मानने की सलाह दी। वहीं, आलोचकों ने कहा कि पर्यटन स्थलों पर दिखने वाले बुजुर्ग वे हैं जो स्वस्थ और सक्षम हैं। बीमार या घर में रहने वाले नजर नहीं आते, जिसे ‘सिलेक्शन बायस’ कहा जाता है।  

एक यूजर ने लिखा कि, “हां। एक देश के रूप में हम अभी भी पुराने सामाजिक मानदंडों और अपेक्षाओं में उलझे हुए हैं। खासकर महिलाएं अपने स्वास्थ्य और खान-पान पर ध्यान नहीं देतीं। साथ ही, हमें बेहतर बुनियादी ढांचा और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था भी बनानी होगी ताकि लोग अकेले और कम खर्च में यात्रा कर सकें,” एक उपयोगकर्ता ने कहा।

दूसरे ने लिखा कि, “उनका जीवन तनावमुक्त है। यही मुख्य कारण है। जन्म से ही उनका जीवन आसान होता है, शायद सभी के लिए नहीं, लेकिन अधिकांश आबादी के लिए। फिर भी हम बुनियादी जीवन के लिए संघर्ष करते हैं।”

तीसरे ने लिखा कि, “कार्बोहाइड्रेट से भरपूर और प्रोटीन की बहुत कम मात्रा वाला कम पोषक तत्वों वाला भोजन, शारीरिक व्यायाम या खेलकूद की कमी या नियमित रूप से पैदल न चलना… यही कारण है कि कई भारतीयों, विशेषकर महिलाओं को रजोनिवृत्ति के तुरंत बाद घुटनों की समस्या हो जाती है और उन्हें चलने में कठिनाई होती है।”


 

चौथे ने लिखा कि, “भारत में… 50 साल से अधिक उम्र के लोगों को लंबे समय तक चलने में कठिनाई होती है।”  

डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

   

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Author: Kaushal kumar

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