पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय नागेंद्र रॉय उर्फ अनंत महाराज सुर्खियों में बने हुए हैं। उन्होंने देश के महान स्वतंत्रता सेनानी सुभाष चंद्र बोस को लेकर विवादित बयान दिया था। नेताजी और आजाद हिंदू फौज की भूमिका पर सवाल उठाने और उन्हें ‘युद्ध अपराधी’ बताने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जा रही है। इसी बीच उनसे ‘बंग विभूषण’ सम्मान भी छीन लिया गया। बंग विभूषण सम्मान छीन जाने के महज 24 घंटे के भीतर ही कूच बिहार जिले की पुलिस ने एक स्थानीय निवासी की शिकायत पर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है और इस मामले में जांच भी शुरू कर दी गई है।
आगे की कानूनी कार्रवाई
कूच बिहार पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद अब इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया तेज हो गई है। स्थानीय निवासी की शिकायत के आधार पर पुलिस यह जांच कर रही है कि बयान के पीछे किस तरह की भावनाएं और उद्देश्य थे। दूसरी ओर, राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि आने वाले दिनों में यह विवाद बंगाल की सियासत को और अधिक गरमा सकता है। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थिति पर कड़ी नजर रखी हुई है।
नेताजी पर टिप्पणी के बाद गरमाई थी सियासत
अनंत महाराज ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व और स्वतंत्रता संग्राम में आजाद हिंद फौज के योगदान पर आपत्तिजनक टिप्पणियां कर दी थीं। उनके बयान जब सबके सामने आए तो पश्चिम बंगाल में राजनीतिक दलों के बीच घमासान मच गया। कई राजनीतिक दलों के द्वारा अनंत महाराज के इस बयान की कड़ी निंदा की गई है। नेताजी पर किए गए आपत्तिजनक बयान के बाद ही ‘बंग विभूषण’ सम्मान उनसे वापस लिया गया था। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा अनंत महाराज से ‘बंगा विभूषण’ सम्मान वापस लेने पर कहा, ‘अनंत महाराज को ‘बंग विभूषण’ से किसने सम्मानित किया? उस पर चर्चा होनी चाहिए। बहुत सारी पार्टियां राज्यसभा में लोगों को भेजती है,TMC ने भी बहुत लोगों को भेजा। मैं कई नाम बता सकता हूं लेकिन ‘बंग भूषण’ जो पश्चिम बंगाल का सबसे बड़ा सम्मान है, किसने दिया? वे लोग बड़ी बातें कर रहे हैं।’
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदू अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नेताजी के खिलाफ अपमानजनक, भ्रामक जानकारी और मीम्स प्रसारित करने वालों के खिलाफ स्पष्ट कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश भी जारी किए हैं। सरकार के द्वारा यह भी स्पष्ट किया गया है कि कानून की नजर में सभी एक समान हैं और सांसद, विधायक, प्रशासनिक अधिकारी या किसी भी राजनीतिक दल के प्रभावशाली नेता को कोई विशेष छूट नहीं दी जाएगी।
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