corporate life formula, corporate funda video : कॉर्पोरेट लाइफ में टिके रहने का बेहतरीन फॉर्मूला

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कॉर्पोरेट दुनिया में काम का दबाव, ऑफिस पॉलिटिक्स और अनकहे नियम अक्सर कर्मचारियों को मानसिक रूप से थका देते हैं। कई लोग शौक छोड़ देते हैं या खुश रहने पर भी दोषी महसूस करते हैं। ऐसे में इंस्टाग्राम पर काशी विश्वनाथ नाम के एक व्यक्ति का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने कॉर्पोरेट जिंदगी में सुकून से रहने और अपने शौक जारी रखने का एक सीधा और असरदार नियम बताया है- ‘अपना काम पूरा करो।’  

इंस्टाग्राम पर वीडियो वायरल

इंस्टाग्राम पर इस वीडियो को @kashiviswanathkosuri नामक हैंडल से शेयर किया गया है। वीडियो में काशी विश्वनाथ ने अपने वीडियो में साफ कहा, ‘अगर आप खुश रहते हैं तो ऑफिस वाले सोचेंगे कि आपके लिए नौकरी जरूरी नहीं है। अगर आप अपने शौक पूरे करते हैं तो उन्हें लगेगा कि आप जॉब को प्राथमिकता नहीं दे रहे। ऑफिस में अपनी काबिलियत साबित करने का सिर्फ एक ही रास्ता है और वो है आपके नतीजे।’ उन्होंने जोर दिया कि आपके KPI या KRA जो भी हों, उन्हें हर हाल में पूरा कीजिए। टारगेट और डेडलाइन मिस मत कीजिए। जब आप अपना काम समय पर और सही तरीके से डिलीवर कर देते हैं, तो उसके बाद आप क्या करते हैं, इस पर कोई उंगली नहीं उठाता। वीडियो में उन्होंने एक कड़वी सच्चाई भी बताई। अगर काम अधूरा रह जाता है तो सौ दूसरी अच्छी बातें भी बेकार हो जाती हैं। कोई आपकी मेहनत या अन्य योगदान की तारीफ नहीं करेगा। इसलिए सबसे पहले नंबर पूरे करो, काम पूरा करो। उसके बाद चाहे आप शौक पूरा करें, समय पर ऑफिस छोड़ें या खुश रहें-कोई सवाल नहीं पूछेगा। उनका कैप्शन था- “काम पर जवाब देने का एकमात्र तरीका अपने काम के माध्यम से।” 

यूजर्स ने शेयर किए अनुभव 

यह सलाह कई कर्मचारियों को राहत देने वाली लग रही है। कॉर्पोरेट कल्चर में अक्सर यह धारणा बन जाती है कि जो व्यक्ति हमेशा व्यस्त दिखे, लेट तक बैठे या शौक न करे, वही समर्पित है। काशी विश्वनाथ का कहना है कि असली प्रमाण प्रदर्शन है, दिखावा नहीं। जब परिणाम सही हों तो व्यक्तिगत जीवन पर सवाल नहीं उठते। कई यूजर्स ने वीडियो पर सहमति जताई। एक व्यक्ति ने फ्रेशर्स से पर्याप्त समर्थन के बिना काम करने की उम्मीद किए जाने का मुद्दा उठाया और लिखा, “कल्पना कीजिए कि एक फ्रेशर को उचित प्रशिक्षण की आवश्यकता है। लेकिन कई कंपनियां पर्याप्त प्रशिक्षण प्रदान नहीं करतीं और इसके बजाय सीधे कार्य सौंप देती हैं और उनसे काम पूरा करने की अपेक्षा करती हैं। ऐसी स्थिति में, चाहे KPI कुछ भी हों, अपेक्षाओं को पूरा करना मुश्किल हो सकता है क्योंकि कर्मचारी को काम ठीक से करना नहीं सिखाया गया है। फिर क्या होता है?” 

इस चिंता का जवाब देते हुए विश्वनाथ ने सुझाव दिया कि इस मुद्दे को मैनेजर के सामने स्पष्ट रूप से उठाएं और बातचीत को लिखित रूप में दर्ज करें। उन्होंने कहा, ‘मैं इस समस्या से अवगत हूं। अपनी अगली मीटिंग में अपने मैनेजर से कहें कि आप टीम के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों में से एक बनना चाहते हैं, और इसके लिए आपको उचित प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और सहयोग की आवश्यकता है। मीटिंग के बाद, इसी अनुरोध का सारांश देते हुए एक ईमेल लिखें और उसे अपने मैनेजर को भेजें ताकि लिखित रूप में भी स्पष्ट संचार हो सके।’

यूजर्स ने ऐसे भी दिए रिएक्शन 

काशी विश्वनाथ का यह संदेश याद दिलाता है कि कॉर्पोरेट में टिके रहने के लिए जटिल रणनीतियों की जरूरत नहीं। बस अपना काम पूरा करो। नतीजे खुद बोलेंगे और आपको शौक छोड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह सरल नियम कई लोगों के लिए कॉर्पोरेट जिंदगी को आसान और संतुलित बना सकता है। इस बात को समझते हुए अन्य यूजर्स ने भी उनके संदेश से काफी हद तक सहमति जताई। एक व्यक्ति ने लिखा, ‘परिणाम दिखावे से ज्यादा मायने रखते हैं।’ दूसरे ने कहा, ‘यह वास्तव में करियर के लिए ठोस सलाह है।’ तीसरे ने कहा, ‘हां, यह सच है।’  


गौरतलब है कि, इससे पहले एक शख्स ने कॉर्पोरेट ऑफिसों की चमक-दमक के पीछे की सच्चाई बयां की थी। 

डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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