महानगरों की भागदौड़ भरी जिंदगी में अकेले रहना अब आम बात हो गई है। नौकरी, पढ़ाई या बेहतर अवसरों के लिए युवा और मध्यम आयु वर्ग के लोग अपने परिवार से दूर जाकर किराए के फ्लैट या अपार्टमेंट में रहने लगते हैं। लेकिन क्या ये फ्लैट कभी घर जैसा महसूस होते हैं? एक शख्स ने अपने वायरल वीडियो में बताया कि, फ्लैट से दूर रहकर काम करना उन्हें वर्क फ्रॉम होम जैसा क्यों नहीं लगता। इंस्टाग्राम पर साझा की गई एक पोस्ट में, वीरेंद्र ने अकेले रहने और पूरे दिन एक ही कमरे में काम करने के अपने अनुभव के बारे में बताया।
इंस्टाग्राम पर शेयर किया वीडियो
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @virendra.uncut नामक हैंडल से शेयर किया गया है। वीडियो में अपनी दिनचर्या साझा करते हुए उन्होंने कहा कि वह उसी कमरे में उठते हैं, काम करने के लिए अपना लैपटॉप खोलते हैं और दिन खत्म होने के बाद उसी कमरे में सो जाते हैं। उन्होंने वर्क फ्रॉम का वास्तविक अर्थ समझने में अपनी उलझन व्यक्त की। उनके अनुसार, वे मूलतः एक फ्लैट से काम कर रहे हैं। उनका पूरा दिन सुबह लैपटॉप खोलने से लेकर शाम को बंद करने तक उसी एक कमरे में बीतता है, और यही दिनचर्या अगले दिन भी दोहराई जाती है। उन्होंने कहा कि इस तरह हर दिन एक ही कमरे में समय बिताने से उन्हें घर जैसा महसूस नहीं होता।
‘घर वो जगह जहां मां की आवाज आए’
वीरेंद्र ने बताया कि वह इस जगह को घर नहीं कह सकते क्योंकि यह सिर्फ एक फ्लैट है। उन्होंने समझाया कि घर वह जगह होती है जहां मां की आवाजं सुनाई देती है, पिता पूछते हैं कि खाना खाया या नहीं, और काम खत्म होने के बाद अपनेपन का एहसास होता है। उनके लिए, जिस जगह पर वे वर्तमान में रहते हैं, वह महज एक कार्यस्थल बनकर रह गई है। वीरेंद्र ने फ्लैट में काम करने और ऑफिस में काम करने के अनुभव की तुलना भी की। उन्होंने बताया कि उनके लिए आसपास के वातावरण के अलावा दोनों में कोई खास अंतर नहीं है। उन्होंने टिप्पणी की कि मॉनिटर के आकार में बदलाव को छोड़कर कार्यालय और उनके कमरे के बीच कोई खास अंतर नहीं है। उनके अनुसार, वे “वर्क फ्रॉम होम” करने के बजाय “फ्लैट से काम” कर रहे हैं, और दोनों अनुभव एक जैसे नहीं हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि उनकी सच्ची इच्छा परिवार के साथ रहते हुए “घर से काम” करने की है।
यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं
वीरेंद्र जैसे कई युवा अब सोच रहे हैं कि करियर के साथ परिवार को भी प्राथमिकता दी जाए। कुछ लोग रिमोट वर्क का विकल्प चुनकर घर लौट रहे हैं, तो कुछ माता-पिता को अपने पास बुला रहे हैं। सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पोस्ट पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं दीं। एक यूजर ने कमेंट किया, “भाई, मुझे तुम्हारी आवाज में दर्द महसूस हो रहा है।”
दूसरे ने लिखा कि, “आप बिल्कुल सही हैं, घर परिवार से ही बनता है।”
तीसरे ने लिखा कि, “सच में भाई, वर्क फ्रॉम होम की जगह वर्क फ्रॉम फ्लैट करना पड़ रहा।”
गौरतलब है कि, इससे पहले एक महिला ने वर्क फ्रॉम होम की चुनौतियों के बारे में बताया था।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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