Indian Man return from US, Indian return from America video : अमेरिका से वापस लौटे भारतीय शख्स ने कही ऐसी बात

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अमेरिका से भारत वापस लौटे एक भारतीय व्यक्ति ने रोजमर्रा की जिंदगी की चुनौतियों को लेकर अपना अनुभव साझा किया है। उन्होंने पार्किंग की किल्लत, भारी भीड़भाड़ और ट्रैफिक जैसी समस्याओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत लौटना सुविधा के लिए नहीं होना चाहिए, क्योंकि यह एक मिथक है। उनका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और चर्चा का विषय बन गया है। 

इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया वीडियो 

इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @theabroadlab नामक हैंडल से शेयर किया गया है। वीडियो में वनराज ने एक रविवार शाम को मॉल जाने का अनुभव बताया। उन्होंने और उनके पार्टनर ने चर्चा की कि वीकेंड में भीड़ ज्यादा होती है, लेकिन चूंकि शनिवार-रविवार ही बाहर घूमने के दिन होते हैं, इसलिए वे निकल पड़े। मॉल पहुंचने पर पार्किंग कतार में करीब 25 मिनट फंस गए। उन्होंने साफ कहा कि यह किसी खास मॉल के प्रबंधन की समस्या नहीं, बल्कि आबादी की वजह से है। उन्होंने इस “यह तो जनसंख्या का मामला है” कहा। कम आबादी वाले देश में रहने के बाद भारत की भीड़ का फर्क साफ महसूस होता है। 

‘स्मूथनेस की आदत हो जाती है’

वनराज ने कहा कि विदेश में रहने से एक आदत सी बन जाती है कि रोजमर्रा के काम आसानी से हो जाते हैं। “आपको एक आदत सी बन जाती है…वहां पे चीज काफी स्मूथ होती है। यहां पे वो स्मूथनेस चली जाती है।” उन्होंने बताया। शहरों में पार्किंग ढूंढना बहुत मुश्किल है। लोगों और गाड़ियों की भारी संख्या के कारण सही जगह अक्सर नहीं मिलती। कहीं और पार्क करने पर गाड़ी टो हो जाने का खतरा रहता है। वे बोले कि, ‘भारत लौटने वाले लोगों को इन बातों के साथ समझौता करना पड़ता है।’ वीडियो से पता चलता है कि यूजर का मकसद यह बताना था कि परिवार, संस्कृति या भावनात्मक जुड़ाव के लिए लौटना ठीक है, लेकिन सिर्फ सुविधा या आराम की उम्मीद लेकर लौटना गलतफहमी हो सकती है। आबादी का दबाव, ट्रैफिक और पार्किंग जैसी बुनियादी समस्याएं रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करती हैं।

यूजर्स ने दीं मिली-जुली प्रतिक्रियाएं

यह वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं आई हैं। कई यूजर्स ने उनकी बात से सहमति जताई और कहा कि शहरी इलाकों में पार्किंग और भीड़ सचमुच बड़ी समस्या है। कुछ ने सुझाव दिया कि छोटे शहरों या गेटेड कम्युनिटीज में रहने से राहत मिल सकती है। वहीं कुछ ने कहा कि भारत में परिवार का साथ, घरेलू मदद और सस्ता स्वास्थ्य सेवा जैसी सुविधाएं इन परेशानियों की भरपाई कर देती हैं। ए​क यूजर ने लिखा कि, “काश मुझे वापस आने से पहले पता होता… जीवन की कोई गुणवत्ता नहीं, बस किसी तरह जीना है! हफ्ते के किसी भी दिन बाहर निकलना ‘फाइनल डेस्टिनेशन’ जैसे पलों को जीने जैसा है। वापस जाने का बेसब्री से इंतजार है।”

दूसरे यूजर ने लिखा कि, ‘आप कहीं भी रहें, आपका जीवन एक जैसा ही रहता है। यह पूरी तरह से आपकी आर्थिक स्थिति पर निर्भर करता है। भारत में कई मायनों में जीवन आसान है।’

तीसरे यूजर ने लिखा कि, ‘औपनिवेशिक मानसिकता का प्रभाव। भारत की समस्या अलग है। न्यूयॉर्क में पार्किंग ढूंढ़ने की कोशिश करें और अगर मिल भी जाए तो उसके लिए भुगतान करने की कोशिश करें। जनसंख्या समस्या नहीं है, जापान से सीखें। यह सिविक सेंस का मामला है। भारत इसी में पीछे है।’

चौथे यूजर ने लिखा कि, ‘भारत लौटने के बाद से हर समय निराशा होती है। पार्किंग, सिविक सेंस, ध्वनि प्रदूषण, उचित पार्कों की कमी, फुटपाथों की कमी जैसी छोटी-छोटी समस्याओं के कारण सब कुछ एक चुनौती बन जाता है।’ 

गौरतलब है कि, इससे पहले एक महिला ने जर्मनी से 15 साल बाद भारत लौटने का एक्सपीरियंस शेयर किया था। 

डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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