अमेरिका में रह रहे एक भारतीय स्टार्टअप संस्थापक ने भारत और अमेरिकी बैंकिंग प्रणाली की तुलना करते हुए दोनों के बीच का सबसे बड़ा अंतर स्पष्ट किया है। उन्होंने दोनों देशों में लोन लेने के अपने अनुभव की तुलना करते हुए कहा कि बैंकों द्वारा उधारकर्ताओं का मूल्यांकन करने के तरीकों में अंतर का व्यवसायों पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। उनके अनुसार, अमेरिकी बैंक सोच-समझकर रिस्क लेने के लिए अधिक तत्पर रहते हैं, जबकि भारतीय बैंक लोन स्वीकृत करने से पहले अक्सर जटिल डॉक्यूमेंटेशन की मांग करते हैं। अब इस वायरल पोस्ट पर यूजस की काफी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
एक्स पर अमेरिकी बैंकों को बताया बेहतर
इस पोस्ट को एक्स पर @shreyansj नामक हैंडल से शेयर किया गया है। इस पोस्ट में श्रेयंस जैन ने दोनों देशों के बैंकों के साथ अपने अनुभव के आधार पर एक्स के बारे में अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बैंकों के साथ अपने अनुभव ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि दोनों प्रणालियां लोन चाहने वाले लोगों और व्यवसायों के साथ कैसा व्यवहार करती हैं। उन्होंने कहा, ‘भारत और अमेरिका के बैंकों के साथ मेरे अनुभव इतने अलग हैं कि इससे पता चलता है कि ये दोनों देश किस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।’ उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी बैंक और क्रेडिट यूनियन अच्छे क्रेडिट स्कोर और अपेक्षाकृत कम क्रेडिट इतिहास वाले लोगों को बड़े लोन दे सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘अगर आप किसी अमेरिकी बैंक या क्रेडिट यूनियन में जाते हैं, तो आपको अपनी वार्षिक आय से कई गुना अधिक लोन प्राप्त करने के लिए केवल एक अच्छा क्रेडिट स्कोर और कम क्रेडिट हिस्ट्री की आवश्यकता होती है।’
भारत में जटिल डॉक्यूमेंटेशन
शख्स ने कहा कि, भारत में आवेदकों को अच्छी आर्थिक स्थिति होने के बावजूद भी कई वित्तीय डॉक्यूमेंट्स जमा करने पड़ सकते हैं। वे बोले कि, ‘भारत में आपको उत्कृष्ट क्रेडिट स्कोर, लंबा क्रेडिट इतिहास, आयकर रिटर्न, आयकर गणना, बैंक स्टेटमेंट, चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा अनुमोदित नेट वर्थ स्टेटमेंट, व्यावसायिक बैलेंस शीट, व्यावसायिक कर रिटर्न आदि की आवश्यकता होती है, और यह सूची शायद अंतहीन है।’ उन्होंने आगे कहा कि इन दस्तावेज को प्रस्तुत करने के बावजूद, उधारकर्ताओं को अपेक्षाकृत छोटे लोन के लिए भी मना किया जा सकता है। आगे वे लिखते हैं कि, ‘और फिर आपको ऐसे लोन से भी वंचित कर दिया जाता है जो आपकी वार्षिक आय के मुश्किल से तीन गुना और आपकी कुल संपत्ति के एक छोटे से हिस्से के बराबर होता है।’ उनका कहना है कि सतर्कतापूर्वक लोन देना बड़े विचारों को नुकसान पहुंचा सकता है।
शख्स ने दिए सुझाव
उनका मानना है कि यह मुद्दा व्यक्तिगत उधारकर्ताओं के अनुभव से कहीं अधिक व्यापक है। उन्होंने तर्क दिया कि जब बैंक रिस्क लेने को तैयार नहीं होते हैं, तो महत्वाकांक्षी व्यवसायों के लिए विकास हेतु आवश्यक धन जुटाना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने सुझाव दिया कि यह एक कारण हो सकता है कि भारत कुछ प्रमुख वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों के स्तर की कंपनियां विकसित करने में संघर्ष कर रहा है। वे लिखते हैं कि, ‘लोन की कमी से जूझ रहा और बैंकिंग रिस्कसहने की क्षमता शून्य वाला देश विश्व मंच पर कहीं भी आगे नहीं बढ़ पाएगा। भारत से कोई अगली एंथ्रोपिक या फॉक्सकॉन कंपनी नहीं निकलेगी जो मामूली रकम से दुनिया को बदल देगी।’
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
शख्स की टिप्पणियों के बाद सोशल मीडिया पर इस बात पर बहस छिड़ गई कि क्या बैंक लोन तक आसान पहुंच वास्तव में बड़ी कंपनियों की सफलता के पीछे एक प्रमुख कारक है। एक यूजर ने लिखा कि, ‘मुझे 2011 में अमेरिका में अपना पहला 2 मिलियन डॉलर का क्रेडिट मिला, वो भी बिना सामाजिक सुरक्षा नंबर (SSN) के। अमेरिका ने पेशेवर रूप से मेरी इस तरह मदद की जो भारत ने कभी नहीं की और शायद कभी नहीं करेगा।’
दूसरे यूजर ने लिखा कि, ‘बैंक लोन से आईटी दिग्गज नहीं बनते। कोई भी बड़ी तकनीकी दिग्गज कंपनी पारंपरिक बैंक लोन के माध्यम से स्थापित या शुरू नहीं हुई है।’
तीसरे यूजर ने लिखा कि, ‘एंथ्रोपिक क्रेडिट या बैंक लोन पर नहीं बना था। इसने वेंचर कैपिटल और कॉर्पोरेट इक्विटी निवेश से अरबों डॉलर जुटाए।’ श्रेयंस जैन ने जवाब देते हुए कहा कि, ‘वेंचर कैपिटल और क्रेडिट आपस में जुड़े हुए हैं। गूगल, अमेज़ॅन वगैरह वेंचर कैपिटल और रेवेन्यू होने के बावजूद भी भारी मात्रा में उधार लेते हैं। क्रेडिट सिर्फ गुजारा करने का साधन नहीं है।’
एक और यूजर ने लिखा कि, ‘मैं पूरी तरह सहमत हूं, भारत को उपभोक्ता स्तर पर अधिक विश्वसनीय बैंक की आवश्यकता है। अच्छा सॉफ्टवेयर, बेहतर ग्राहक सेवा और ऐसा बैंक जिसमें कम कागजी कार्रवाई की आवश्यकता हो।’
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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