Marriage Advice For Women By Praveen Radhakrishnan : जब बात शादी की आती है, तो अकसर सलाह दी जाती है कि लड़का अच्छी नौकरी वाला होना चाहिए, उसका अच्छा बैकग्राउंड हो, और समाज में उसका रुतबा हो. लेकिन क्या सिर्फ अच्छी कमाई या धाकड़ पर्सनालिटी ही एक खुशहाल शादीशुदा जिंदगी की गारंटी है? आध्यात्मिक वक्ता श्री प्रवीण राधाकृष्णन का मानना है कि ऐसा बिल्कुल नहीं है. उन्होंने शादी की राह तलाश रही महिलाओं को एक ऐसी सलाह दी है जो आज के दौर के रिश्तों के हिसाब से बेहद जरूरी और आंखें खोलने वाली है. उनका कहना है कि महिलाओं को हर बात में खुद को ‘अल्फा’ साबित करने वाले पुरुषों के बजाय ऐसे साथी को चुनना चाहिए जो उनकी बात सुने, समझे और बराबरी का दर्जा दे.
ऐसे पुरुष जो खुद को घर का इकलौता और सबसे बड़ा डिसीजन-मेकर मानते हैं, वे अपनी पत्नी की पसंद और फैसलों को दरकिनार कर देते हैं. canva
अल्फा मेल का दबदबा और शादी में मुश्किलें
अकसर समाज में ‘अल्फा मेल’ यानी ऐसे पुरुषों की तारीफ की जाती है जो हर जगह अपना दबदबा बनाए रखते हैं, सख्त होते हैं और घर के सारे फैसले अकेले लेना पसंद करते हैं. लेकिन जब यही सोच शादी के रिश्ते में आती है, तो कई बार घुटन महसूस होने लगती है. प्रवीण राधाकृष्णन के अनुसार, ऐसे पुरुष जो खुद को घर का इकलौता और सबसे बड़ा डिसीजन-मेकर मानते हैं, वे अपनी पत्नी की पसंद और फैसलों को दरकिनार कर देते हैं.
अगर कोई पुरुष यह सोचता है कि शादी के बाद उसकी पत्नी का काम सिर्फ घर संभालना, खाना बनाना और परिवार की देखरेख करना भर है, तो ऐसा रिश्ता लंबे समय तक खुशहाल नहीं रह सकता. खासकर उन आधुनिक महिलाओं के लिए जो शादी के बाद भी अपनी पढ़ाई, अपना करियर, अपनी पसंद और अपनी अलग पहचान बनाए रखना चाहती हैं, एक ‘अल्फा’ पार्टनर के साथ तालमेल बिठाना बहुत मुश्किल हो जाता है.
पत्नी का काम सिर्फ घर संभालना नहीं
शादी दो लोगों की बराबरी की साझेदारी है. घर और परिवार को संभालना दोनों की साझी जिम्मेदारी होनी चाहिए. लेकिन समाज में आज भी एक सोच बनी हुई है कि शादी के बाद समझौता सिर्फ महिला को करना है. उनका स्पष्ट मानना है कि किसी महिला को सिर्फ घर संभालने वाली मशीन समझ लेना सरासर गलत है.
एक अच्छे शादीशुदा रिश्ते में पत्नी को भी अपनी बात खुलकर कहने, अपने फैसले खुद लेने और अपनी जिंदगी को अपने तरीके से आगे बढ़ाने की पूरी आजादी मिलनी चाहिए. जब पति अपनी पत्नी को केवल ‘होममेकर’ के दायरे में कैद करने के बजाय उसके सपनों को पंख देता है, तभी रिश्ता मजबूत होता है.
अर्जुन और द्रौपदी का पौराणिक उदाहरण
अपनी बात को गहराई से समझाने के लिए प्रवीण राधाकृष्णन ने महाभारत से अर्जुन और द्रौपदी (मां पंचाली) का खूबसूरत उदाहरण दिया. उन्होंने बताया कि द्रौपदी के जीवन में जब-जब संकट और मुश्किलें आईं, अर्जुन ने कभी अपनी धौंस जमाने की कोशिश नहीं की, बल्कि हमेशा उनके साथ एक मजबूत सहारा बनकर खड़े रहे.
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