पहली बार अमेरिका जाने पर भारत की कौन सी ज्यादा याद आती है? इस शख्स ने पोस्ट में शेयर किया; हो रही वायरल

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एक भारतीय यात्री ने अपनी पहली अमेरिका यात्रा के अनुभव सोशल मीडिया पर साझा किए हैं। उन्होंने वहां की विशाल आर्थिक वृद्धि, सड़कों और बुनियादी ढांचे की तारीफ की, लेकिन साथ ही भारत जैसी मददगार भावना और आतिथ्य की कमी को भी रेखांकित किया। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर अरुण नाम के यूजर का यह पोस्ट सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है।

एक्स पर शेयर की पोस्ट 

इस पोस्ट को एक्स पर @arunv2808 नामक हैंडल से शेयर किया गया है। पोस्ट में अरुण ने लिखा, “एक हफ्ते के लिए अमेरिका गया था, पहली बार। दो बातें समझ आईं: जगह पूरे हाइप के लायक है, बड़ी सड़कें, पैदल चलने के अच्छे फुटपाथ, ‘ग्रोथ’ का स्केल जबरदस्त है, सच में बहुत-बहुत जबरदस्त। एयरपोर्ट पर लोग उस तरह मदद नहीं करते जैसे हम भारतीय यहां करते हैं।”

‘भारतीय संस्कृति अमेरिकी संस्कृति से बेहतर’

उन्होंने आगे कहा कि भारत को अभी काफी कुछ पकड़ना बाकी है और उन्होंने महसूस किया कि हम उनके स्तर तक कभी नहीं पहुंच पाएंगे। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि “भारतीय संस्कृति अमेरिकी संस्कृति से बेहतर है” वाली सोच सिर्फ खुद को सांत्वना देने का तरीका है। शॉपिंग के बारे में उन्होंने बताया कि कपड़े, जूते और इलेक्ट्रॉनिक्स अमेरिका में वैल्यू फॉर मनी हैं। रॉस जैसे डिस्काउंट स्टोर में अच्छी क्वालिटी के कपड़े और जूते सस्ते मिल जाते हैं, जो अक्सर भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश या वियतनाम में बने होते हैं। साथ ही iPhone भारत की तुलना में करीब 20 प्रतिशत सस्ते हैं। 

कई ​भारतीयों को होता है अनुभव 

यह अनुभव कई पहली बार विदेश जाने वाले भारतीयों की भावनाओं को छूता है। अमेरिका की विशाल सड़कें, व्यवस्थित फुटपाथ, साफ-सुथरा माहौल और विकास का पैमाना अक्सर प्रभावित करता है। बड़े शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर का स्तर और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार भारतीय यात्रियों को हैरान कर देता है। वहीं, एयरपोर्ट या सार्वजनिक जगहों पर मदद मांगने पर मिलने वाला व्यवहार भारत से अलग महसूस होता है। भारत में अजनबी भी अक्सर रास्ता बताने, सामान उठाने या जानकारी देने में आगे रहते हैं, जो सांस्कृतिक आतिथ्य का हिस्सा माना जाता है। 

यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं 

इस पोस्ट ने भारत और अमेरिका के बीच के अंतरों पर एक चर्चा को जन्म दिया, जिसमें यूजर्स ने अपने स्वयं के अनुभव साझा किए। एक यूजर ने लिखा कि, ‘आप कहाँ गए थे? यह जगह पर निर्भर करता है। बराबरी करना ही सबसे बड़ा अवसर है। चीन का विकास अंततः संयुक्त राज्य अमेरिका से कहीं अधिक होगा। हमारे पास भी इस विकास के बराबर पहुँचने की उतनी ही क्षमता है। लेकिन क्रियान्वयन एक समस्या है।’

दूसरे यूजर ने लिखा कि, ‘अमेरिका की पहली यात्रा से पहले मैंने कई अन्य देशों का दौरा किया था। यह बेहद निराशाजनक था। ऐसा लगा कि अन्य देशों में बेहतर बुनियादी ढांचा और समग्र माहौल था।’

तीसरे यूजर ने लिखा कि, ‘सिर्फ हवाई अड्डे की बात नहीं, सिर्फ अमेरिका की बात नहीं। भारत के बाहर भी आम लोग अपने सवालों के जवाब खोजने के लिए तकनीक, नक्शे और एआई का इस्तेमाल करते हैं। उनकी पहली प्रतिक्रिया कभी भी अजनबियों से मदद मांगना नहीं होती।’

गौरतलब है कि, इससे पहले एक शख्स ने अमेरिका में 1 करोड़ के पैकेज की सच्चाई बताई थी। 

डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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